धारा 464 · कारावास की सजा के क्रियान्वयन को स्थगित करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब किसी अपराधी को केवल जुर्माने की सजा सुनाई गई हो और जुर्माना न अदा करने पर कारावास की सजा दी गई हो, और जुर्माना तुरंत अदा न किया गया हो, तो न्यायालय---
(क) यह आदेश दिया जा सकता है कि जुर्माना या तो आदेश की तारीख से तीस दिनों से अधिक की तारीख तक पूरा देय होगा, या दो या तीन किस्तों में देय होगा, जिनमें से पहली किस्त आदेश की तारीख से तीस दिनों से अधिक की तारीख तक देय होगी और अन्य या अन्य किस्तें, जैसा भी मामला हो, तीस दिनों से अधिक के अंतराल पर देय होंगी;
(ख) न्यायालय कारावास की सजा के निष्पादन को निलंबित कर सकता है और अपराधी को, न्यायालय द्वारा उचित समझे जाने वाले बांड या जमानत बांड के निष्पादन पर, इस शर्त के साथ कि वह उस तिथि या तिथियों पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होगा जिस पर जुर्माना या उसकी किश्तों का भुगतान किया जाना है; और यदि जुर्माने या किसी किश्त की राशि, जैसा भी मामला हो, आदेश के तहत देय अंतिम तिथि पर या उससे पहले प्राप्त नहीं होती है, तो न्यायालय कारावास की सजा को तुरंत लागू करने का निर्देश दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के प्रावधान ऐसे किसी भी मामले में भी लागू होंगे जिसमें धन के भुगतान का आदेश दिया गया हो और उसकी वसूली न होने पर कारावास की सजा दी जा सकती हो, तथा यदि वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है, उस उपधारा में निर्दिष्ट बांड भरने के लिए कहे जाने पर ऐसा करने में विफल रहता है, तो न्यायालय तुरंत कारावास की सजा सुना सकता है।
(क) यह आदेश दिया जा सकता है कि जुर्माना या तो आदेश की तारीख से तीस दिनों से अधिक की तारीख तक पूरा देय होगा, या दो या तीन किस्तों में देय होगा, जिनमें से पहली किस्त आदेश की तारीख से तीस दिनों से अधिक की तारीख तक देय होगी और अन्य या अन्य किस्तें, जैसा भी मामला हो, तीस दिनों से अधिक के अंतराल पर देय होंगी;
(ख) न्यायालय कारावास की सजा के निष्पादन को निलंबित कर सकता है और अपराधी को, न्यायालय द्वारा उचित समझे जाने वाले बांड या जमानत बांड के निष्पादन पर, इस शर्त के साथ कि वह उस तिथि या तिथियों पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होगा जिस पर जुर्माना या उसकी किश्तों का भुगतान किया जाना है; और यदि जुर्माने या किसी किश्त की राशि, जैसा भी मामला हो, आदेश के तहत देय अंतिम तिथि पर या उससे पहले प्राप्त नहीं होती है, तो न्यायालय कारावास की सजा को तुरंत लागू करने का निर्देश दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के प्रावधान ऐसे किसी भी मामले में भी लागू होंगे जिसमें धन के भुगतान का आदेश दिया गया हो और उसकी वसूली न होने पर कारावास की सजा दी जा सकती हो, तथा यदि वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है, उस उपधारा में निर्दिष्ट बांड भरने के लिए कहे जाने पर ऐसा करने में विफल रहता है, तो न्यायालय तुरंत कारावास की सजा सुना सकता है।
पुराने कानून में
BNSS 464CRPC 424
424. Suspension of execution of sentence of imprisonment.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
