धारा 343 · सह-अपराधी को क्षमादान की पेशकश।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस धारा के अंतर्गत आने वाले किसी अपराध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल या उससे परिचित माने जाने वाले किसी व्यक्ति का साक्ष्य प्राप्त करने के उद्देश्य से, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपराध की जांच या पूछताछ के किसी भी चरण में, और प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट जो अपराध की जांच या सुनवाई कर रहा हो, जांच या सुनवाई के किसी भी चरण में, ऐसे व्यक्ति को इस शर्त पर क्षमादान दे सकता है कि वह अपराध से संबंधित और उसमें मुख्य अपराधी या सहायक के रूप में शामिल प्रत्येक अन्य व्यक्ति के संबंध में अपने ज्ञान में मौजूद सभी परिस्थितियों का पूर्ण और सत्य खुलासा करे।
(2) यह धारा निम्नलिखित पर लागू होती है---
(क) कोई भी अपराध जो सत्र न्यायालय या किसी अन्य कानून के तहत नियुक्त विशेष न्यायाधीश के न्यायालय द्वारा ही विचारणीय हो;
(ख) कोई भी अपराध जिसके लिए सात वर्ष तक की कारावास या इससे अधिक कठोर सजा हो सकती है।
(3) उपधारा (1) के अधीन क्षमादान देने वाला प्रत्येक मजिस्ट्रेट निम्नलिखित को रिकॉर्ड करेगा—
(क) ऐसा करने के उनके कारण;
(ख) निविदा उस व्यक्ति द्वारा स्वीकार की गई थी या नहीं, जिसे वह दी गई थी, और अभियुक्त द्वारा किए गए आवेदन पर, उसे ऐसे अभिलेख की एक प्रति नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
(4) उपधारा (1) के अधीन क्षमादान का प्रस्ताव स्वीकार करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ---
(क) अपराध का संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट के न्यायालय में और बाद में होने वाले मुकदमे में, यदि कोई हो, तो उसे गवाह के रूप में जांचा जाएगा;
(ख) यदि वह पहले से जमानत पर नहीं है, तो उसे मुकदमे की समाप्ति तक हिरासत में रखा जाएगा।
(5) जहाँ किसी व्यक्ति ने उपधारा (1) के अधीन दी गई क्षमादान की पेशकश स्वीकार कर ली है और उपधारा (4) के अधीन उसकी जाँच की गई है, तो अपराध का संज्ञान लेने वाला मजिस्ट्रेट मामले में कोई और जाँच किए बिना---
(क) इसे परीक्षण के लिए सौंप दें---
(i) सत्र न्यायालय को, यदि अपराध केवल उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है या यदि संज्ञान लेने वाला मजिस्ट्रेट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट है;
(ii) किसी अन्य कानून के तहत नियुक्त विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में, यदि अपराध केवल उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय हो;
(ख) किसी अन्य मामले में, मामले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंप दिया जाएगा, जो स्वयं मामले की सुनवाई करेगा।
(2) यह धारा निम्नलिखित पर लागू होती है---
(क) कोई भी अपराध जो सत्र न्यायालय या किसी अन्य कानून के तहत नियुक्त विशेष न्यायाधीश के न्यायालय द्वारा ही विचारणीय हो;
(ख) कोई भी अपराध जिसके लिए सात वर्ष तक की कारावास या इससे अधिक कठोर सजा हो सकती है।
(3) उपधारा (1) के अधीन क्षमादान देने वाला प्रत्येक मजिस्ट्रेट निम्नलिखित को रिकॉर्ड करेगा—
(क) ऐसा करने के उनके कारण;
(ख) निविदा उस व्यक्ति द्वारा स्वीकार की गई थी या नहीं, जिसे वह दी गई थी, और अभियुक्त द्वारा किए गए आवेदन पर, उसे ऐसे अभिलेख की एक प्रति नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
(4) उपधारा (1) के अधीन क्षमादान का प्रस्ताव स्वीकार करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ---
(क) अपराध का संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट के न्यायालय में और बाद में होने वाले मुकदमे में, यदि कोई हो, तो उसे गवाह के रूप में जांचा जाएगा;
(ख) यदि वह पहले से जमानत पर नहीं है, तो उसे मुकदमे की समाप्ति तक हिरासत में रखा जाएगा।
(5) जहाँ किसी व्यक्ति ने उपधारा (1) के अधीन दी गई क्षमादान की पेशकश स्वीकार कर ली है और उपधारा (4) के अधीन उसकी जाँच की गई है, तो अपराध का संज्ञान लेने वाला मजिस्ट्रेट मामले में कोई और जाँच किए बिना---
(क) इसे परीक्षण के लिए सौंप दें---
(i) सत्र न्यायालय को, यदि अपराध केवल उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है या यदि संज्ञान लेने वाला मजिस्ट्रेट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट है;
(ii) किसी अन्य कानून के तहत नियुक्त विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में, यदि अपराध केवल उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय हो;
(ख) किसी अन्य मामले में, मामले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंप दिया जाएगा, जो स्वयं मामले की सुनवाई करेगा।
पुराने कानून में
BNSS 343CRPC 306
306. Tender of pardon to accomplice.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
