धारा 478 · किन मामलों में जमानत ली जा सकती है?
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(1) जब किसी गैर-जमानती अपराध के आरोपी व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा बिना वारंट के गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है, या वह किसी न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है, और यदि वह अधिकारी की हिरासत में रहते हुए या न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के किसी भी चरण में जमानत देने के लिए तैयार हो, तो ऐसे व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा:
बशर्ते कि ऐसा अधिकारी या न्यायालय, यदि वह उचित समझे, तो यदि ऐसा व्यक्ति निर्धन है और जमानत देने में असमर्थ है, तो उससे जमानत बांड लेने के बजाय, उसे उसके द्वारा नीचे दिए गए प्रावधानों के अनुसार उपस्थिति के लिए बांड निष्पादित करने पर रिहा कर सकता है।
स्पष्टीकरण। —यदि कोई व्यक्ति अपनी गिरफ्तारी की तारीख से एक सप्ताह के भीतर जमानत बांड देने में असमर्थ है, तो यह अधिकारी या न्यायालय के लिए इस परंतुक के प्रयोजनों के लिए यह अनुमान लगाने का पर्याप्त आधार होगा कि वह एक निर्धन व्यक्ति है।
इसके अलावा, इस धारा में कोई भी बात धारा 135 की उपधारा (3) या धारा 492 के प्रावधानों को प्रभावित करने वाली नहीं मानी जाएगी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई व्यक्ति जमानत बांड या जमानत बांड की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, चाहे वह समय और स्थान के संबंध में हो, तो न्यायालय उसे जमानत पर रिहा करने से इनकार कर सकता है, जब वह उसी मामले में बाद में किसी अवसर पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता है या हिरासत में लिया जाता है, और ऐसा इनकार न्यायालय की उन शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा जिसके तहत वह ऐसे बांड या जमानत बांड से बंधे किसी व्यक्ति को धारा 491 के तहत जुर्माना अदा करने के लिए कह सकता है।
बशर्ते कि ऐसा अधिकारी या न्यायालय, यदि वह उचित समझे, तो यदि ऐसा व्यक्ति निर्धन है और जमानत देने में असमर्थ है, तो उससे जमानत बांड लेने के बजाय, उसे उसके द्वारा नीचे दिए गए प्रावधानों के अनुसार उपस्थिति के लिए बांड निष्पादित करने पर रिहा कर सकता है।
स्पष्टीकरण। —यदि कोई व्यक्ति अपनी गिरफ्तारी की तारीख से एक सप्ताह के भीतर जमानत बांड देने में असमर्थ है, तो यह अधिकारी या न्यायालय के लिए इस परंतुक के प्रयोजनों के लिए यह अनुमान लगाने का पर्याप्त आधार होगा कि वह एक निर्धन व्यक्ति है।
इसके अलावा, इस धारा में कोई भी बात धारा 135 की उपधारा (3) या धारा 492 के प्रावधानों को प्रभावित करने वाली नहीं मानी जाएगी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई व्यक्ति जमानत बांड या जमानत बांड की शर्तों का पालन करने में विफल रहता है, चाहे वह समय और स्थान के संबंध में हो, तो न्यायालय उसे जमानत पर रिहा करने से इनकार कर सकता है, जब वह उसी मामले में बाद में किसी अवसर पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता है या हिरासत में लिया जाता है, और ऐसा इनकार न्यायालय की उन शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा जिसके तहत वह ऐसे बांड या जमानत बांड से बंधे किसी व्यक्ति को धारा 491 के तहत जुर्माना अदा करने के लिए कह सकता है।
पुराने कानून में
BNSS 478CRPC 436
436. In what cases bail to be taken.
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