धारा 181 · पुलिस को दिए गए बयान और उनका उपयोग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अध्याय के अंतर्गत किसी जांच के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा किसी पुलिस अधिकारी को दिया गया कोई भी बयान, यदि लिखित रूप में दर्ज किया जाता है, तो बयान देने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित नहीं किया जाएगा; और न ही ऐसा कोई बयान या उसका कोई अभिलेख, चाहे पुलिस डायरी में हो या किसी अन्य रूप में, या ऐसे बयान या अभिलेख का कोई भाग, उस समय जांचधीन किसी अपराध के संबंध में किसी जांच या मुकदमे में, जब ऐसा बयान दिया गया था, किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाएगा, सिवाय इसके कि जैसा कि इसके बाद प्रावधान किया गया है।
बशर्ते कि जब किसी गवाह को ऐसी जांच या मुकदमे में अभियोजन पक्ष द्वारा बुलाया जाता है जिसका बयान उपर्युक्त रूप से लिखित में दर्ज किया गया हो, तो उसके बयान का कोई भी भाग, यदि विधिवत सिद्ध हो जाता है, तो आरोपी द्वारा और न्यायालय की अनुमति से अभियोजन पक्ष द्वारा, भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 148 में वर्णित तरीके से ऐसे गवाह का खंडन करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है; और जब ऐसे बयान के किसी भाग का इस प्रकार प्रयोग किया जाता है, तो उसका कोई भाग ऐसे गवाह की पुनःपरीक्षा में भी प्रयोग किया जा सकता है, परन्तु केवल उसकी जिरह में उल्लिखित किसी मामले को स्पष्ट करने के उद्देश्य से।
(2) इस धारा में कोई बात भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 26 के खंड (क) के प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले किसी कथन पर लागू नहीं मानी जाएगी; और न ही उस अधिनियम की धारा 23 की उपधारा (2) के परंतुक के प्रावधानों को प्रभावित करेगी।
स्पष्टीकरण। उपधारा (1) में निर्दिष्ट कथन में किसी तथ्य या परिस्थिति का उल्लेख न करना विरोधाभास माना जाएगा यदि वह उस संदर्भ को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण और प्रासंगिक प्रतीत होता है जिसमें ऐसा उल्लेख हुआ है, और क्या किसी विशेष संदर्भ में कोई उल्लेख विरोधाभास है, यह तथ्य का प्रश्न होगा।
बशर्ते कि जब किसी गवाह को ऐसी जांच या मुकदमे में अभियोजन पक्ष द्वारा बुलाया जाता है जिसका बयान उपर्युक्त रूप से लिखित में दर्ज किया गया हो, तो उसके बयान का कोई भी भाग, यदि विधिवत सिद्ध हो जाता है, तो आरोपी द्वारा और न्यायालय की अनुमति से अभियोजन पक्ष द्वारा, भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 148 में वर्णित तरीके से ऐसे गवाह का खंडन करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है; और जब ऐसे बयान के किसी भाग का इस प्रकार प्रयोग किया जाता है, तो उसका कोई भाग ऐसे गवाह की पुनःपरीक्षा में भी प्रयोग किया जा सकता है, परन्तु केवल उसकी जिरह में उल्लिखित किसी मामले को स्पष्ट करने के उद्देश्य से।
(2) इस धारा में कोई बात भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 26 के खंड (क) के प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले किसी कथन पर लागू नहीं मानी जाएगी; और न ही उस अधिनियम की धारा 23 की उपधारा (2) के परंतुक के प्रावधानों को प्रभावित करेगी।
स्पष्टीकरण। उपधारा (1) में निर्दिष्ट कथन में किसी तथ्य या परिस्थिति का उल्लेख न करना विरोधाभास माना जाएगा यदि वह उस संदर्भ को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण और प्रासंगिक प्रतीत होता है जिसमें ऐसा उल्लेख हुआ है, और क्या किसी विशेष संदर्भ में कोई उल्लेख विरोधाभास है, यह तथ्य का प्रश्न होगा।
पुराने कानून में
BNSS 181CRPC 162
162.Statements to police not to be signed: Use of statements in evidence.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
