BNSS 114अध्याय VIII · Reciprocal Arrangements for Assistance in Certain Matters and Procedure for Attachment and Forfeiture of Propertyपहले CRPC 105B
धारा 114 · व्यक्तियों के स्थानांतरण को सुरक्षित करने में सहायता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि भारत में कोई न्यायालय किसी आपराधिक मामले के संबंध में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए जारी किए गए वारंट को, किसी संविदाकारी राज्य के किसी स्थान पर निष्पादित करवाना चाहे, तो वह ऐसे वारंट की दो प्रतियां ऐसे प्रपत्र में ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को ऐसे प्राधिकारी के माध्यम से भेजेगा, जैसा कि केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट करे, और वह न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, जैसा भी मामला हो, उसे निष्पादित करवाएगा।
(2) यदि किसी अपराध की जाँच या पूछताछ के दौरान, जाँच अधिकारी या उससे उच्चतर पद के किसी अधिकारी द्वारा यह आवेदन किया जाता है कि किसी संविदाकारी राज्य में स्थित किसी व्यक्ति की उपस्थिति ऐसी जाँच या पूछताछ के संबंध में आवश्यक है, और न्यायालय संतुष्ट है कि ऐसी उपस्थिति आवश्यक है, तो वह उक्त व्यक्ति के विरुद्ध ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को दो प्रतियों में समन या वारंट जारी करेगा, ऐसे प्रपत्र में जैसा कि केंद्र सरकार इस संबंध में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे, ताकि उसे तामील या निष्पादित किया जा सके।
(3) जहाँ भारत में किसी न्यायालय को किसी आपराधिक मामले के संबंध में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए वारंट प्राप्त हुआ हो, जिसमें उसे उस न्यायालय में या किसी अन्य जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने या उपस्थित होकर कोई दस्तावेज या अन्य वस्तु प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो, और यह वारंट किसी संविदाकारी राज्य के न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया हो, तो इसे इस प्रकार निष्पादित किया जाएगा मानो यह वारंट भारत के किसी अन्य न्यायालय से उसकी स्थानीय सीमाओं के भीतर निष्पादन के लिए प्राप्त हुआ हो।
(4) जहां उपधारा (3) के अनुसार किसी संविदाकारी राज्य में स्थानांतरित किया गया व्यक्ति भारत में कैदी है, तो भारत में न्यायालय या केंद्र सरकार ऐसी शर्तें लगा सकती है जो न्यायालय या सरकार उचित समझे।
(5) जहां उपधारा (1) या उपधारा (2) के अनुसार भारत में स्थानांतरित किया गया व्यक्ति किसी संविदाकारी राज्य में कैदी है, तो भारत में न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि जिन शर्तों के अधीन कैदी को भारत में स्थानांतरित किया गया है, उनका अनुपालन किया जाए और ऐसे कैदी को ऐसी हिरासत में रखा जाएगा, जो केंद्र सरकार द्वारा लिखित रूप में निर्देशित शर्तों के अधीन हो।
(2) यदि किसी अपराध की जाँच या पूछताछ के दौरान, जाँच अधिकारी या उससे उच्चतर पद के किसी अधिकारी द्वारा यह आवेदन किया जाता है कि किसी संविदाकारी राज्य में स्थित किसी व्यक्ति की उपस्थिति ऐसी जाँच या पूछताछ के संबंध में आवश्यक है, और न्यायालय संतुष्ट है कि ऐसी उपस्थिति आवश्यक है, तो वह उक्त व्यक्ति के विरुद्ध ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को दो प्रतियों में समन या वारंट जारी करेगा, ऐसे प्रपत्र में जैसा कि केंद्र सरकार इस संबंध में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे, ताकि उसे तामील या निष्पादित किया जा सके।
(3) जहाँ भारत में किसी न्यायालय को किसी आपराधिक मामले के संबंध में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए वारंट प्राप्त हुआ हो, जिसमें उसे उस न्यायालय में या किसी अन्य जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने या उपस्थित होकर कोई दस्तावेज या अन्य वस्तु प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो, और यह वारंट किसी संविदाकारी राज्य के न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया हो, तो इसे इस प्रकार निष्पादित किया जाएगा मानो यह वारंट भारत के किसी अन्य न्यायालय से उसकी स्थानीय सीमाओं के भीतर निष्पादन के लिए प्राप्त हुआ हो।
(4) जहां उपधारा (3) के अनुसार किसी संविदाकारी राज्य में स्थानांतरित किया गया व्यक्ति भारत में कैदी है, तो भारत में न्यायालय या केंद्र सरकार ऐसी शर्तें लगा सकती है जो न्यायालय या सरकार उचित समझे।
(5) जहां उपधारा (1) या उपधारा (2) के अनुसार भारत में स्थानांतरित किया गया व्यक्ति किसी संविदाकारी राज्य में कैदी है, तो भारत में न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि जिन शर्तों के अधीन कैदी को भारत में स्थानांतरित किया गया है, उनका अनुपालन किया जाए और ऐसे कैदी को ऐसी हिरासत में रखा जाएगा, जो केंद्र सरकार द्वारा लिखित रूप में निर्देशित शर्तों के अधीन हो।
पुराने कानून में
BNSS 114CRPC 105B
105B. Assistance in securing transfer of persons.
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