धारा 370 · जांच या मुकदमे की पुनः शुरुआत।
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(1) जब भी धारा 367 या धारा 368 के तहत कोई जांच या मुकदमा स्थगित किया जाता है, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय, जैसा भी मामला हो, संबंधित व्यक्ति के मानसिक रूप से अस्वस्थ न रहने के बाद किसी भी समय जांच या मुकदमे को पुनः शुरू कर सकता है और आरोपी को ऐसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने या लाए जाने का आदेश दे सकता है।
(2) जब अभियुक्त को धारा 369 के तहत रिहा कर दिया गया हो, और उसके उपस्थित होने के लिए जमानतदार उसे उस अधिकारी के समक्ष पेश करें जिसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय इस संबंध में नियुक्त करता है, तो ऐसे अधिकारी का यह प्रमाण पत्र कि अभियुक्त अपना बचाव करने में सक्षम है, साक्ष्य में स्वीकार्य होगा।
(2) जब अभियुक्त को धारा 369 के तहत रिहा कर दिया गया हो, और उसके उपस्थित होने के लिए जमानतदार उसे उस अधिकारी के समक्ष पेश करें जिसे मजिस्ट्रेट या न्यायालय इस संबंध में नियुक्त करता है, तो ऐसे अधिकारी का यह प्रमाण पत्र कि अभियुक्त अपना बचाव करने में सक्षम है, साक्ष्य में स्वीकार्य होगा।
पुराने कानून में
BNSS 370CRPC 331
331. Resumption of inquiry or trial.
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संबंधित कानूनी धाराएँ
- संबंधितभा.ना.सु.सं. §367यदि आरोपी व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो प्रक्रिया क्या होगी?
- संबंधितभा.ना.सु.सं. §368न्यायालय के समक्ष अस्वास्थ्यकर व्यक्ति के मामले में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया।
- संबंधितभा.ना.सु.सं. §369जांच या मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने के दौरान मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की रिहाई।
