धारा 377 · वह प्रक्रिया जिसके तहत मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को हिरासत से रिहा करने के लिए योग्य घोषित किया जाता है।
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(1) यदि किसी व्यक्ति को धारा 369 की उपधारा (2) या धारा 374 के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया जाता है, और ऐसे महानिरीक्षक या आगंतुक यह प्रमाणित करते हैं कि उनके या उनके निर्णय के अनुसार, उसे स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुँचाने के खतरे के बिना रिहा किया जा सकता है, तो राज्य सरकार उसे रिहा करने, हिरासत में रखने, या किसी सार्वजनिक मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में स्थानांतरित करने का आदेश दे सकती है, यदि उसे पहले से ही ऐसे संस्थान में नहीं भेजा गया है; और, यदि वह उसे किसी सार्वजनिक मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में स्थानांतरित करने का आदेश देती है, तो वह एक न्यायिक अधिकारी और दो चिकित्सा अधिकारियों से मिलकर एक आयोग नियुक्त कर सकती है।
(2) ऐसा आयोग ऐसे व्यक्ति की मानसिक स्थिति की औपचारिक जांच करेगा, आवश्यक साक्ष्य लेगा और राज्य सरकार को रिपोर्ट करेगा, जो उसकी रिहाई या हिरासत का आदेश दे सकती है जैसा वह उचित समझे।
(2) ऐसा आयोग ऐसे व्यक्ति की मानसिक स्थिति की औपचारिक जांच करेगा, आवश्यक साक्ष्य लेगा और राज्य सरकार को रिपोर्ट करेगा, जो उसकी रिहाई या हिरासत का आदेश दे सकती है जैसा वह उचित समझे।
पुराने कानून में
BNSS 377CRPC 338
338. Procedure where lunatic detained is declared fit to be released.
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