BNSS 183अध्याय XIII · Information to the Police and Their Powers to Investigateपहले CRPC 164बदलाव हुआ
धारा 183 · इकबालिया बयानों और कथनों की रिकॉर्डिंग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जिस जिले में किसी अपराध के घटित होने की सूचना दर्ज की गई है, उस जिले का कोई मजिस्ट्रेट, चाहे उसे उस मामले में अधिकार क्षेत्र प्राप्त हो या न हो, इस अध्याय के अंतर्गत या उस समय लागू किसी अन्य कानून के अंतर्गत किसी जांच के दौरान या उसके बाद किसी भी समय, लेकिन जांच या मुकदमे के प्रारंभ होने से पहले, उसे दिए गए किसी भी इकबालिया बयान या कथन को दर्ज कर सकता है।
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत दिया गया कोई भी इकबालिया बयान या कथन, अपराध के आरोपी व्यक्ति के वकील की उपस्थिति में ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी रिकॉर्ड किया जा सकता है:
इसके अलावा, किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा कोई भी इकबालिया बयान दर्ज नहीं किया जाएगा, जिसे किसी भी लागू कानून के तहत मजिस्ट्रेट की कोई शक्ति प्रदान की गई हो।
(2) मजिस्ट्रेट किसी भी ऐसे इकबालिया बयान को दर्ज करने से पहले, बयान देने वाले व्यक्ति को समझाएगा कि वह बयान देने के लिए बाध्य नहीं है और यदि वह ऐसा करता है, तो इसका उपयोग उसके विरुद्ध साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है; और मजिस्ट्रेट ऐसे किसी भी इकबालिया बयान को तब तक दर्ज नहीं करेगा जब तक कि बयान देने वाले व्यक्ति से पूछताछ करने पर उसे यह विश्वास करने का कारण न हो कि यह स्वेच्छा से दिया जा रहा है।
(3) यदि इकबालिया बयान दर्ज किए जाने से पहले किसी भी समय मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित व्यक्ति यह कहता है कि वह इकबालिया बयान देने के लिए इच्छुक नहीं है, तो मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को पुलिस हिरासत में रखने की अनुमति नहीं देगा।
(4) ऐसा कोई भी इकबालिया बयान धारा 316 में अभियुक्त व्यक्ति की परीक्षा दर्ज करने के लिए निर्धारित तरीके से दर्ज किया जाएगा और इकबालिया बयान देने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा; और मजिस्ट्रेट ऐसे रिकॉर्ड के अंत में निम्नलिखित आशय का एक ज्ञापन बनाएगा:—
मैंने (नाम) को समझाया है कि वह इकबालिया बयान देने के लिए बाध्य नहीं है और यदि वह ऐसा करता है, तो उसके द्वारा दिया गया कोई भी इकबालिया बयान उसके खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और मेरा मानना है कि यह इकबालिया बयान स्वेच्छा से दिया गया था। यह मेरी उपस्थिति और सुनवाई में लिया गया था, और इसे बयान देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाया गया था और उसने इसे सही माना था, और इसमें उसके द्वारा दिए गए बयान का पूरा और सच्चा विवरण शामिल है।
(5) उपधारा (1) के अधीन दिया गया कोई भी कथन (स्वीकृति के अतिरिक्त) साक्ष्य दर्ज करने के लिए आगे दिए गए तरीके से दर्ज किया जाएगा, जो मजिस्ट्रेट की राय में मामले की परिस्थितियों के लिए सबसे उपयुक्त हो; और मजिस्ट्रेट को उस व्यक्ति को शपथ दिलाने का अधिकार होगा जिसका कथन इस प्रकार दर्ज किया गया है।
(6) (क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70, धारा 71, धारा 74, धारा 75, धारा 76, धारा 77, धारा 78, धारा 79 या धारा 124 के तहत दंडनीय मामलों में, मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति का बयान उपधारा (5) में निर्दिष्ट तरीके से दर्ज करेगा, जैसे ही अपराध के घटित होने की सूचना पुलिस को दी जाती है:
बशर्ते कि ऐसा बयान, जहां तक संभव हो, एक महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा और उसकी अनुपस्थिति में एक पुरुष मजिस्ट्रेट द्वारा एक महिला की उपस्थिति में दर्ज किया जाएगा:
इसके अलावा, दस वर्ष या उससे अधिक कारावास या आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडनीय अपराधों से संबंधित मामलों में, मजिस्ट्रेट पुलिस अधिकारी द्वारा उसके समक्ष लाए गए गवाह का बयान दर्ज करेगा।
इसके अलावा, यदि बयान देने वाला व्यक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम है, तो मजिस्ट्रेट बयान दर्ज करने में दुभाषिया या विशेष प्रशिक्षक की सहायता लेगा।
इसके अलावा, यदि बयान देने वाला व्यक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम है, तो दुभाषिया या विशेष शिक्षक की सहायता से उस व्यक्ति द्वारा दिया गया बयान ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से, अधिमानतः मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड किया जाएगा;
(ख) खंड (क) के अंतर्गत किसी ऐसे व्यक्ति का दर्ज किया गया बयान, जो अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम है, भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 142 में निर्दिष्ट मुख्य परीक्षा के स्थान पर बयान माना जाएगा, ताकि बयान देने वाले से उस बयान पर जिरह की जा सके, और परीक्षण के समय उसे दर्ज करने की आवश्यकता न हो।
(7) इस धारा के तहत इकबालिया बयान या कथन दर्ज करने वाला मजिस्ट्रेट उसे उस मजिस्ट्रेट को भेजेगा जिसके द्वारा मामले की जांच या सुनवाई की जानी है।
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत दिया गया कोई भी इकबालिया बयान या कथन, अपराध के आरोपी व्यक्ति के वकील की उपस्थिति में ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी रिकॉर्ड किया जा सकता है:
इसके अलावा, किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा कोई भी इकबालिया बयान दर्ज नहीं किया जाएगा, जिसे किसी भी लागू कानून के तहत मजिस्ट्रेट की कोई शक्ति प्रदान की गई हो।
(2) मजिस्ट्रेट किसी भी ऐसे इकबालिया बयान को दर्ज करने से पहले, बयान देने वाले व्यक्ति को समझाएगा कि वह बयान देने के लिए बाध्य नहीं है और यदि वह ऐसा करता है, तो इसका उपयोग उसके विरुद्ध साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है; और मजिस्ट्रेट ऐसे किसी भी इकबालिया बयान को तब तक दर्ज नहीं करेगा जब तक कि बयान देने वाले व्यक्ति से पूछताछ करने पर उसे यह विश्वास करने का कारण न हो कि यह स्वेच्छा से दिया जा रहा है।
(3) यदि इकबालिया बयान दर्ज किए जाने से पहले किसी भी समय मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित व्यक्ति यह कहता है कि वह इकबालिया बयान देने के लिए इच्छुक नहीं है, तो मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को पुलिस हिरासत में रखने की अनुमति नहीं देगा।
(4) ऐसा कोई भी इकबालिया बयान धारा 316 में अभियुक्त व्यक्ति की परीक्षा दर्ज करने के लिए निर्धारित तरीके से दर्ज किया जाएगा और इकबालिया बयान देने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा; और मजिस्ट्रेट ऐसे रिकॉर्ड के अंत में निम्नलिखित आशय का एक ज्ञापन बनाएगा:—
मैंने (नाम) को समझाया है कि वह इकबालिया बयान देने के लिए बाध्य नहीं है और यदि वह ऐसा करता है, तो उसके द्वारा दिया गया कोई भी इकबालिया बयान उसके खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और मेरा मानना है कि यह इकबालिया बयान स्वेच्छा से दिया गया था। यह मेरी उपस्थिति और सुनवाई में लिया गया था, और इसे बयान देने वाले व्यक्ति को पढ़कर सुनाया गया था और उसने इसे सही माना था, और इसमें उसके द्वारा दिए गए बयान का पूरा और सच्चा विवरण शामिल है।
(हस्ताक्षरित) एबी
मजिस्ट्रेट।
(5) उपधारा (1) के अधीन दिया गया कोई भी कथन (स्वीकृति के अतिरिक्त) साक्ष्य दर्ज करने के लिए आगे दिए गए तरीके से दर्ज किया जाएगा, जो मजिस्ट्रेट की राय में मामले की परिस्थितियों के लिए सबसे उपयुक्त हो; और मजिस्ट्रेट को उस व्यक्ति को शपथ दिलाने का अधिकार होगा जिसका कथन इस प्रकार दर्ज किया गया है।
(6) (क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70, धारा 71, धारा 74, धारा 75, धारा 76, धारा 77, धारा 78, धारा 79 या धारा 124 के तहत दंडनीय मामलों में, मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति का बयान उपधारा (5) में निर्दिष्ट तरीके से दर्ज करेगा, जैसे ही अपराध के घटित होने की सूचना पुलिस को दी जाती है:
बशर्ते कि ऐसा बयान, जहां तक संभव हो, एक महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा और उसकी अनुपस्थिति में एक पुरुष मजिस्ट्रेट द्वारा एक महिला की उपस्थिति में दर्ज किया जाएगा:
इसके अलावा, दस वर्ष या उससे अधिक कारावास या आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडनीय अपराधों से संबंधित मामलों में, मजिस्ट्रेट पुलिस अधिकारी द्वारा उसके समक्ष लाए गए गवाह का बयान दर्ज करेगा।
इसके अलावा, यदि बयान देने वाला व्यक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम है, तो मजिस्ट्रेट बयान दर्ज करने में दुभाषिया या विशेष प्रशिक्षक की सहायता लेगा।
इसके अलावा, यदि बयान देने वाला व्यक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम है, तो दुभाषिया या विशेष शिक्षक की सहायता से उस व्यक्ति द्वारा दिया गया बयान ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से, अधिमानतः मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड किया जाएगा;
(ख) खंड (क) के अंतर्गत किसी ऐसे व्यक्ति का दर्ज किया गया बयान, जो अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम है, भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 की धारा 142 में निर्दिष्ट मुख्य परीक्षा के स्थान पर बयान माना जाएगा, ताकि बयान देने वाले से उस बयान पर जिरह की जा सके, और परीक्षण के समय उसे दर्ज करने की आवश्यकता न हो।
(7) इस धारा के तहत इकबालिया बयान या कथन दर्ज करने वाला मजिस्ट्रेट उसे उस मजिस्ट्रेट को भेजेगा जिसके द्वारा मामले की जांच या सुनवाई की जानी है।
पुराने कानून में
BNSS 183CRPC 164
164.Recording of confessions and statements.
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संबंधित कानूनी धाराएँ
- संबंधितभा.न्या.सं. §124एसिड आदि के प्रयोग से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
- संबंधितभा.सा.अधि. §142गवाहों की जांच।
- संबंधितभा.ना.सु.सं. §316अभियुक्त की जांच का रिकॉर्ड।
- संबंधितभा.न्या.सं. §64बलात्कार के लिए सजा।
- संबंधितभा.न्या.सं. §65कुछ मामलों में बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान है।
- संबंधितभा.न्या.सं. §66पीड़ित की मृत्यु का कारण बनने या उसे स्थायी रूप से कोमा जैसी स्थिति में पहुंचाने के लिए दी जाने वाली सजा।
- संबंधितभा.न्या.सं. §67पति द्वारा अपनी पत्नी से अलग रहने के दौरान उसके साथ यौन संबंध बनाना।
- संबंधितभा.न्या.सं. §68प्राधिकारी पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा यौन संबंध।
- संबंधितभा.न्या.सं. §69छलपूर्ण साधनों का प्रयोग करके यौन संबंध बनाना, आदि।
- संबंधितभा.न्या.सं. §70सामूहिक बलात्कार।
- संबंधितभा.न्या.सं. §71बार-बार अपराध करने वालों के लिए दंड।
- संबंधितभा.न्या.सं. §74किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना।
- संबंधितभा.न्या.सं. §75यौन उत्पीड़न।
- संबंधितभा.न्या.सं. §76किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना।
- संबंधितभा.न्या.सं. §77ताक-झांक करना।
- संबंधितभा.न्या.सं. §78पीछा करना।
- संबंधितभा.न्या.सं. §79किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से कहे गए शब्द, हावभाव या कार्य।
