धारा 146 · भत्ते में परिवर्तन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 144 के तहत भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण के लिए मासिक भत्ता प्राप्त करने वाले किसी व्यक्ति की परिस्थितियों में परिवर्तन का प्रमाण मिलने पर, या उसी धारा के तहत अपनी पत्नी, बच्चे, पिता या माता को भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण के लिए मासिक भत्ता देने का आदेश प्राप्त करने वाले किसी व्यक्ति की परिस्थितियों में परिवर्तन होने पर, मजिस्ट्रेट भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण के लिए भत्ते में ऐसा परिवर्तन कर सकता है, जैसा वह उचित समझे।
(2) जहाँ मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि किसी सक्षम सिविल न्यायालय के किसी निर्णय के परिणामस्वरूप धारा 144 के अंतर्गत दिए गए किसी आदेश को रद्द या परिवर्तित किया जाना चाहिए, तो वह आदेश को रद्द कर देगा या, जैसा भी मामला हो, उसमें तदनुसार परिवर्तन करेगा।
(3) जहाँ धारा 144 के अंतर्गत किसी ऐसी स्त्री के पक्ष में कोई आदेश दिया गया हो जिसे उसके पति ने तलाक दे दिया हो या जिसने अपने पति से तलाक प्राप्त कर लिया हो, तो मजिस्ट्रेट, यदि वह संतुष्ट हो कि—
(क) यदि स्त्री ने तलाक की तारीख के बाद पुनर्विवाह कर लिया है, तो पुनर्विवाह की तारीख से ऐसा आदेश रद्द कर दिया जाएगा;
(ख) यदि महिला को उसके पति द्वारा तलाक दे दिया गया है और उसने उक्त आदेश की तिथि से पहले या बाद में, उन पक्षों पर लागू किसी प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत, ऐसे तलाक पर देय पूरी राशि प्राप्त कर ली है, तो ऐसे आदेश को रद्द कर दिया जाए,—
(i) यदि ऐसी राशि ऐसे आदेश से पहले भुगतान की गई थी, तो उस तारीख से जिस तारीख को ऐसा आदेश दिया गया था;
(ii) किसी अन्य मामले में, उस अवधि की समाप्ति की तारीख से, यदि कोई हो, जिसके लिए पति द्वारा महिला को वास्तव में भरण-पोषण का भुगतान किया गया हो;
(ग) यदि महिला ने अपने पति से तलाक प्राप्त कर लिया है और उसने तलाक के बाद स्वेच्छा से भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण के अपने अधिकारों को त्याग दिया है, तो उस तारीख से आदेश रद्द कर दिया जाए।
(4) किसी व्यक्ति द्वारा भरण-पोषण या दहेज की वसूली के लिए कोई डिक्री बनाते समय, जिसे धारा 144 के तहत भरण-पोषण और अंतरिम भरण-पोषण या इनमें से किसी एक के लिए मासिक भत्ता देने का आदेश दिया गया है, सिविल न्यायालय उस राशि को ध्यान में रखेगा जो उक्त आदेश के अनुसार ऐसे व्यक्ति को भरण-पोषण और अंतरिम भरण-पोषण या इनमें से किसी एक के लिए मासिक भत्ते के रूप में भुगतान की गई है या वसूल की गई है।
(2) जहाँ मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि किसी सक्षम सिविल न्यायालय के किसी निर्णय के परिणामस्वरूप धारा 144 के अंतर्गत दिए गए किसी आदेश को रद्द या परिवर्तित किया जाना चाहिए, तो वह आदेश को रद्द कर देगा या, जैसा भी मामला हो, उसमें तदनुसार परिवर्तन करेगा।
(3) जहाँ धारा 144 के अंतर्गत किसी ऐसी स्त्री के पक्ष में कोई आदेश दिया गया हो जिसे उसके पति ने तलाक दे दिया हो या जिसने अपने पति से तलाक प्राप्त कर लिया हो, तो मजिस्ट्रेट, यदि वह संतुष्ट हो कि—
(क) यदि स्त्री ने तलाक की तारीख के बाद पुनर्विवाह कर लिया है, तो पुनर्विवाह की तारीख से ऐसा आदेश रद्द कर दिया जाएगा;
(ख) यदि महिला को उसके पति द्वारा तलाक दे दिया गया है और उसने उक्त आदेश की तिथि से पहले या बाद में, उन पक्षों पर लागू किसी प्रथागत या व्यक्तिगत कानून के तहत, ऐसे तलाक पर देय पूरी राशि प्राप्त कर ली है, तो ऐसे आदेश को रद्द कर दिया जाए,—
(i) यदि ऐसी राशि ऐसे आदेश से पहले भुगतान की गई थी, तो उस तारीख से जिस तारीख को ऐसा आदेश दिया गया था;
(ii) किसी अन्य मामले में, उस अवधि की समाप्ति की तारीख से, यदि कोई हो, जिसके लिए पति द्वारा महिला को वास्तव में भरण-पोषण का भुगतान किया गया हो;
(ग) यदि महिला ने अपने पति से तलाक प्राप्त कर लिया है और उसने तलाक के बाद स्वेच्छा से भरण-पोषण या अंतरिम भरण-पोषण के अपने अधिकारों को त्याग दिया है, तो उस तारीख से आदेश रद्द कर दिया जाए।
(4) किसी व्यक्ति द्वारा भरण-पोषण या दहेज की वसूली के लिए कोई डिक्री बनाते समय, जिसे धारा 144 के तहत भरण-पोषण और अंतरिम भरण-पोषण या इनमें से किसी एक के लिए मासिक भत्ता देने का आदेश दिया गया है, सिविल न्यायालय उस राशि को ध्यान में रखेगा जो उक्त आदेश के अनुसार ऐसे व्यक्ति को भरण-पोषण और अंतरिम भरण-पोषण या इनमें से किसी एक के लिए मासिक भत्ते के रूप में भुगतान की गई है या वसूल की गई है।
पुराने कानून में
BNSS 146CRPC 127
127.Alteration in allowance.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
