धारा 342 · निगम या पंजीकृत संस्था के आरोपी होने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस धारा में, "निगम" से तात्पर्य निगमित कंपनी या अन्य निगमित निकाय से है, और इसमें सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (21 ऑफ 1860) के तहत पंजीकृत सोसायटी शामिल है।
(2) जहाँ कोई निगम किसी जाँच या मुकदमे में आरोपी व्यक्ति या आरोपियों में से एक है, तो वह जाँच या मुकदमे के उद्देश्य से एक प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है और ऐसी नियुक्ति निगम की मुहर के अधीन होना आवश्यक नहीं है।
(3) जहाँ किसी निगम का प्रतिनिधि उपस्थित होता है, वहाँ इस संहिता की कोई भी आवश्यकता कि कोई भी कार्य अभियुक्त की उपस्थिति में किया जाए या अभियुक्त को पढ़कर सुनाया जाए या समझाया जाए, उसे प्रतिनिधि की उपस्थिति में किए जाने या पढ़कर सुनाए जाने या समझाए जाने की आवश्यकता के रूप में समझा जाएगा, और अभियुक्त की जाँच किए जाने की कोई भी आवश्यकता प्रतिनिधि की जाँच किए जाने की आवश्यकता के रूप में समझी जाएगी।
(4) जहाँ किसी निगम का प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होता है, वहाँ उपधारा (3) में संदर्भित ऐसी कोई आवश्यकता लागू नहीं होगी।
(5) जहाँ निगम के प्रबंध निदेशक या उनके द्वारा विधिवत अधिकृत किसी व्यक्ति (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) द्वारा हस्ताक्षरित कोई लिखित वक्तव्य प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें निगम के मामलों का प्रबंधन करने वाले या निगम के मामलों का प्रबंधन करने वाले व्यक्तियों में से एक व्यक्ति द्वारा यह कहा गया हो कि वक्तव्य में नामित व्यक्ति को इस धारा के प्रयोजनों के लिए निगम के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया है, तो न्यायालय, जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह मान लेगा कि ऐसे व्यक्ति को इस प्रकार नियुक्त किया गया है।
(6) यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी न्यायालय के समक्ष किसी जांच या मुकदमे में निगम के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित होने वाला कोई व्यक्ति ऐसा प्रतिनिधि है या नहीं, तो प्रश्न का निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
(2) जहाँ कोई निगम किसी जाँच या मुकदमे में आरोपी व्यक्ति या आरोपियों में से एक है, तो वह जाँच या मुकदमे के उद्देश्य से एक प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है और ऐसी नियुक्ति निगम की मुहर के अधीन होना आवश्यक नहीं है।
(3) जहाँ किसी निगम का प्रतिनिधि उपस्थित होता है, वहाँ इस संहिता की कोई भी आवश्यकता कि कोई भी कार्य अभियुक्त की उपस्थिति में किया जाए या अभियुक्त को पढ़कर सुनाया जाए या समझाया जाए, उसे प्रतिनिधि की उपस्थिति में किए जाने या पढ़कर सुनाए जाने या समझाए जाने की आवश्यकता के रूप में समझा जाएगा, और अभियुक्त की जाँच किए जाने की कोई भी आवश्यकता प्रतिनिधि की जाँच किए जाने की आवश्यकता के रूप में समझी जाएगी।
(4) जहाँ किसी निगम का प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होता है, वहाँ उपधारा (3) में संदर्भित ऐसी कोई आवश्यकता लागू नहीं होगी।
(5) जहाँ निगम के प्रबंध निदेशक या उनके द्वारा विधिवत अधिकृत किसी व्यक्ति (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) द्वारा हस्ताक्षरित कोई लिखित वक्तव्य प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें निगम के मामलों का प्रबंधन करने वाले या निगम के मामलों का प्रबंधन करने वाले व्यक्तियों में से एक व्यक्ति द्वारा यह कहा गया हो कि वक्तव्य में नामित व्यक्ति को इस धारा के प्रयोजनों के लिए निगम के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया है, तो न्यायालय, जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह मान लेगा कि ऐसे व्यक्ति को इस प्रकार नियुक्त किया गया है।
(6) यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी न्यायालय के समक्ष किसी जांच या मुकदमे में निगम के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित होने वाला कोई व्यक्ति ऐसा प्रतिनिधि है या नहीं, तो प्रश्न का निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
पुराने कानून में
BNSS 342CRPC 305
305. Procedure when corporation or registered society is an accused.
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