धारा 293 · मामले का निपटारा।
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जहां धारा 292 के तहत मामले का संतोषजनक निपटारा हो चुका हो, वहां न्यायालय मामले का निपटारा निम्नलिखित तरीके से करेगा, अर्थात्:—
(क) न्यायालय धारा 292 के अधीन किए गए निर्णय के अनुसार पीड़ित को मुआवजा प्रदान करेगा और सजा की मात्रा, अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर या धारा 401 के तहत चेतावनी के बाद अभियुक्त को रिहा करने या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का 20) या उस समय लागू किसी अन्य कानून के प्रावधानों के तहत अभियुक्त से निपटने के संबंध में पक्षों की सुनवाई करेगा और अभियुक्त पर सजा लगाने के लिए अनुवर्ती खंडों में निर्दिष्ट प्रक्रिया का पालन करेगा;
(ख) खंड (क) के अधीन पक्षों को सुनने के बाद, यदि न्यायालय का यह मत है कि धारा 401 या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (20 ऑफ 1958) या उस समय लागू किसी अन्य कानून के प्रावधान अभियुक्त के मामले में लागू होते हैं, तो वह अभियुक्त को परिवीक्षा पर रिहा कर सकता है या ऐसे किसी कानून का लाभ प्रदान कर सकता है;
(ग) खंड (ख) के अधीन पक्षों को सुनने के बाद, यदि न्यायालय पाता है कि अभियुक्त द्वारा किए गए अपराध के लिए कानून के तहत न्यूनतम दंड का प्रावधान किया गया है, तो वह अभियुक्त को ऐसे न्यूनतम दंड का आधा दंड दे सकता है, और यदि अभियुक्त पहली बार अपराध कर रहा है और अतीत में किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है, तो वह अभियुक्त को ऐसे न्यूनतम दंड का एक चौथाई दंड दे सकता है;
(घ) यदि खंड (ख) के अंतर्गत पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय यह पाता है कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध खंड (ख) या खंड (ग) के अंतर्गत नहीं आता है, तो न्यायालय अभियुक्त को ऐसे अपराध के लिए निर्धारित या अनुदृद्ध दंड का एक-चौथाई दंड दे सकता है, और यदि अभियुक्त प्रथम अपराधकर्ता है और अतीत में किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है, तो न्यायालय अभियुक्त को ऐसे अपराध के लिए निर्धारित या अनुदृद्ध दंड का एक-छठा भाग दंड दे सकता है।
(क) न्यायालय धारा 292 के अधीन किए गए निर्णय के अनुसार पीड़ित को मुआवजा प्रदान करेगा और सजा की मात्रा, अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर या धारा 401 के तहत चेतावनी के बाद अभियुक्त को रिहा करने या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का 20) या उस समय लागू किसी अन्य कानून के प्रावधानों के तहत अभियुक्त से निपटने के संबंध में पक्षों की सुनवाई करेगा और अभियुक्त पर सजा लगाने के लिए अनुवर्ती खंडों में निर्दिष्ट प्रक्रिया का पालन करेगा;
(ख) खंड (क) के अधीन पक्षों को सुनने के बाद, यदि न्यायालय का यह मत है कि धारा 401 या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (20 ऑफ 1958) या उस समय लागू किसी अन्य कानून के प्रावधान अभियुक्त के मामले में लागू होते हैं, तो वह अभियुक्त को परिवीक्षा पर रिहा कर सकता है या ऐसे किसी कानून का लाभ प्रदान कर सकता है;
(ग) खंड (ख) के अधीन पक्षों को सुनने के बाद, यदि न्यायालय पाता है कि अभियुक्त द्वारा किए गए अपराध के लिए कानून के तहत न्यूनतम दंड का प्रावधान किया गया है, तो वह अभियुक्त को ऐसे न्यूनतम दंड का आधा दंड दे सकता है, और यदि अभियुक्त पहली बार अपराध कर रहा है और अतीत में किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है, तो वह अभियुक्त को ऐसे न्यूनतम दंड का एक चौथाई दंड दे सकता है;
(घ) यदि खंड (ख) के अंतर्गत पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय यह पाता है कि अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध खंड (ख) या खंड (ग) के अंतर्गत नहीं आता है, तो न्यायालय अभियुक्त को ऐसे अपराध के लिए निर्धारित या अनुदृद्ध दंड का एक-चौथाई दंड दे सकता है, और यदि अभियुक्त प्रथम अपराधकर्ता है और अतीत में किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है, तो न्यायालय अभियुक्त को ऐसे अपराध के लिए निर्धारित या अनुदृद्ध दंड का एक-छठा भाग दंड दे सकता है।
पुराने कानून में
BNSS 293CRPC 265E
265E. Disposal of the case.
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