BNSS 385अध्याय XXVIII · Provisions as to Offences Affecting the Administration of Justiceपहले CRPC 346
धारा 385 · वह प्रक्रिया जिसमें न्यायालय यह मानता है कि मामले को धारा 384 के तहत नहीं निपटाया जाना चाहिए।
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(1) यदि न्यायालय किसी मामले में यह विचार करे कि धारा 384 में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए आरोपित व्यक्ति, जिसने उसकी दृष्टि या उपस्थिति में अपराध किया है, को जुर्माने के भुगतान में चूक के अलावा किसी अन्य कारण से कारावास दिया जाना चाहिए, या उस पर दो सौ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जाना चाहिए, या न्यायालय किसी अन्य कारण से यह राय रखता है कि मामले का निपटारा धारा 384 के तहत नहीं किया जाना चाहिए, तो ऐसा न्यायालय, अपराध के तथ्यों और अभियुक्त के बयान को जैसा कि पहले प्रावधान किया गया है, दर्ज करने के बाद, मामले को उस मजिस्ट्रेट को भेज सकता है जिसे उस मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है, और ऐसे व्यक्ति की मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थिति के लिए जमानत की मांग कर सकता है, या यदि पर्याप्त जमानत नहीं दी जाती है, तो ऐसे व्यक्ति को हिरासत में ऐसे मजिस्ट्रेट को भेज सकता है।
(2) इस धारा के अधीन जिस मजिस्ट्रेट को कोई मामला भेजा जाता है, वह यथासंभव इस प्रकार से निपटारा करेगा मानो वह मामला पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज किया गया हो।
(2) इस धारा के अधीन जिस मजिस्ट्रेट को कोई मामला भेजा जाता है, वह यथासंभव इस प्रकार से निपटारा करेगा मानो वह मामला पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज किया गया हो।
पुराने कानून में
BNSS 385CRPC 346
346. Procedure where Court considers that case should not be dealt with under section 345.
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