बीएनएसएस → सीआरपीसी
610 प्रविष्टियाँ
संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार और प्रारंभ।
(1) इस अधिनियम को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 कहा जा सकता है। (2) इस संहिता के अध्याय नौ, ग्यारह और बारह से संबंधित प्रावधानों के अलावा अन्य प्रावधान लागू नहीं होंगे--- (क) नागालैंड राज्य को; (ख) जनजातीय क्षेत्रों को, लेकिन संबंधित राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, ऐसे प्रावधानों या उनमें से किसी को नागालैंड राज्य…
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त शीर्षक, विस्तार और प्रारंभ।
(1) इस अधिनियम को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 कहा जा सकता है। (2) यह पूरे भारत में लागू होता है 1 ****: इस संहिता के अध्याय VIII, X और XI से संबंधित प्रावधानों को छोड़कर अन्य प्रावधान लागू नहीं होंगे। (क) नागालैंड राज्य को, (ख) जनजातीय क्षेत्रों को, लेकिन संबंधित राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, ऐसे प्रावधानों या उनमें से…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
(1) इस संहिता में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक” का अर्थ है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, पहचान, तलाशी और साक्ष्य की जब्ती की प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक संचार का प्रसारण और ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए तथा ऐसे अन्य साधनों द्वारा किसी भी संचार उपकरण का उपयोग, जैसा कि राज्य…
पूरा पढ़ेंधारा 2. परिभाषाएं
2. परिभाषाएं इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) "जमानतीय अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जो प्रथम अनुसूची में जमानतीय के रूप में दिखाया गया है या जो तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जमानतीय बनाया गया है; और "अजमानतीय अपराध" से कोई अन्य अपराध अभिप्रेत है; (ख) "आरोप" के अंतर्गत, जब आरोप…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
(1) इस संहिता में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक” का अर्थ है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, पहचान, तलाशी और साक्ष्य की जब्ती की प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक संचार का प्रसारण और ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए तथा ऐसे अन्य साधनों द्वारा किसी भी संचार उपकरण का उपयोग, जैसा कि राज्य…
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परिभाषाएँ।
(1) इस संहिता में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक” का अर्थ है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, पहचान, तलाशी और साक्ष्य की जब्ती की प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक संचार का प्रसारण और ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए तथा ऐसे अन्य साधनों द्वारा किसी भी संचार उपकरण का उपयोग, जैसा कि राज्य…
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परिभाषाएँ।
(1) इस संहिता में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक” का अर्थ है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, पहचान, तलाशी और साक्ष्य की जब्ती की प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक संचार का प्रसारण और ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए तथा ऐसे अन्य साधनों द्वारा किसी भी संचार उपकरण का उपयोग, जैसा कि राज्य…
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परिभाषाएँ।
(1) इस संहिता में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक” का अर्थ है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, पहचान, तलाशी और साक्ष्य की जब्ती की प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक संचार का प्रसारण और ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए तथा ऐसे अन्य साधनों द्वारा किसी भी संचार उपकरण का उपयोग, जैसा कि राज्य…
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परिभाषाएँ।
(1) इस संहिता में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक” का अर्थ है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, पहचान, तलाशी और साक्ष्य की जब्ती की प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक संचार का प्रसारण और ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए तथा ऐसे अन्य साधनों द्वारा किसी भी संचार उपकरण का उपयोग, जैसा कि राज्य…
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धारा 2. परिभाषाएं
2. परिभाषाएं इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) "जमानतीय अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जो प्रथम अनुसूची में जमानतीय के रूप में दिखाया गया है या जो तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जमानतीय बनाया गया है; और "अजमानतीय अपराध" से कोई अन्य अपराध अभिप्रेत है; (ख) "आरोप" के अंतर्गत, जब आरोप…
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धारा 2. परिभाषाएं
2. परिभाषाएं इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) "जमानतीय अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जो प्रथम अनुसूची में जमानतीय के रूप में दिखाया गया है या जो तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जमानतीय बनाया गया है; और "अजमानतीय अपराध" से कोई अन्य अपराध अभिप्रेत है; (ख) "आरोप" के अंतर्गत, जब आरोप…
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धारा 2. परिभाषाएं
2. परिभाषाएं इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,— (क) "जमानतीय अपराध" से ऐसा अपराध अभिप्रेत है जो प्रथम अनुसूची में जमानतीय के रूप में दिखाया गया है या जो तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जमानतीय बनाया गया है; और "अजमानतीय अपराध" से कोई अन्य अपराध अभिप्रेत है; (ख) "आरोप" के अंतर्गत, जब आरोप…
पूरा पढ़ेंसंदर्भों का निर्माण।
(1) जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो, किसी भी कानून में, किसी भी योग्यतावाचक शब्द के बिना, प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट या द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट के संदर्भ को, किसी क्षेत्र के संबंध में, प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा, जैसा भी मामला हो,…
पूरा पढ़ेंधारा 3. निर्देशों का अर्थ लगाना
3. निर्देशों का अर्थ लगाना (1) इस संहिता में,— (क) मजिस्ट्रेट के प्रति किसी ऐसे निर्देश का, जिसके साथ कोई विशेषक शब्द नहीं हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, कि वह निर्देश है— (i) महानगर क्षेत्र से बाहर के किसी क्षेत्र के संबंध में, न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति; (ii) महानगर क्षेत्र के…
पूरा पढ़ेंभारतीय न्याय संहिता, 2023 और अन्य कानूनों के तहत अपराधों का मुकदमा।
(1) भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत सभी अपराधों की जांच, पूछताछ, मुकदमा और अन्य प्रकार से निपटारा इसके बाद दिए गए प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। (2) किसी अन्य कानून के तहत सभी अपराधों की जांच, पूछताछ, मुकदमा और अन्य तरीके से निपटारा उसी प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा, लेकिन उस समय लागू किसी भी अधिनियम के अधीन…
पूरा पढ़ेंधारा 4. भारतीय दंड संहिता और अन्य विधियों के अधीन अपराधों का विचारण
4. भारतीय दंड संहिता और अन्य विधियों के अधीन अपराधों का विचारण (1) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अधीन सब अपराधों का अन्वेषण, जांच, विचारण और उनका अन्यथा निपटारा इसमें इसके पश्चात् अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार किया जाएगा। (2) किसी अन्य विधि के अधीन सब अपराधों का अन्वेषण, जांच, विचारण और उनका अन्यथा निपटारा उन्हीं…
पूरा पढ़ेंबचत।
इस संहिता में निहित कोई भी बात, विपरीत प्रावधान के अभाव में, उस समय लागू किसी विशेष या स्थानीय कानून, या किसी अन्य कानून द्वारा प्रदत्त किसी विशेष अधिकार क्षेत्र या शक्ति, या निर्धारित किसी विशेष प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगी।
पूरा पढ़ेंबचत।
इस संहिता में निहित कोई भी बात, विपरीत प्रावधान के अभाव में, किसी अन्य कानून द्वारा वर्तमान में लागू किसी विशेष या स्थानीय कानून, या प्रदत्त किसी विशेष अधिकार क्षेत्र या शक्ति, या निर्धारित किसी विशेष प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगी। राज्य संशोधन मणिपुर मुख्य अधिनियम की धारा 5 में,-- (i) अंकों और अल्पविरामों "396,"…
पूरा पढ़ेंआपराधिक न्यायालयों के प्रकार।
उच्च न्यायालयों और इस संहिता के अतिरिक्त किसी अन्य कानून के तहत गठित न्यायालयों के अतिरिक्त, प्रत्येक राज्य में निम्नलिखित प्रकार के आपराधिक न्यायालय होंगे, अर्थात्:— (i) सत्र न्यायालय; (ii) प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट; (iii) द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट; और (iv) कार्यकारी मजिस्ट्रेट।
पूरा पढ़ेंआपराधिक न्यायालयों के प्रकार।
उच्च न्यायालयों और इस संहिता के अलावा किसी अन्य कानून के तहत गठित न्यायालयों के अतिरिक्त, प्रत्येक राज्य में निम्नलिखित प्रकार के आपराधिक न्यायालय होंगे, अर्थात्:-- (i) सत्र न्यायालय; (ii) प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट और किसी महानगरीय क्षेत्र में, महानगरीय मजिस्ट्रेट; (iii) द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट;…
पूरा पढ़ेंक्षेत्रीय विभाजन।
(1) प्रत्येक राज्य सत्र प्रभाग होगा या सत्र प्रभागों से मिलकर बनेगा; और प्रत्येक सत्र प्रभाग, इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, जिला होगा या जिलों से मिलकर बनेगा। (2) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, ऐसे प्रभागों और जिलों की सीमाओं या संख्या में परिवर्तन कर सकती है। (3) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से…
पूरा पढ़ेंधारा 7. प्रादेशिक खंड
7. प्रादेशिक खंड (1) हर राज्य एक सेशन खंड होगा या उसमें सेशन खंड होंगे; और हर सेशन खंड, इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, एक जिला होगा या उसमें जिले होंगे: परन्तु हर महानगर क्षेत्र, उक्त प्रयोजनों के लिए, पृथक् सेशन खंड और जिला होगा। (2) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात्, ऐसे खंडों और जिलों की सीमाओं में…
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धारा 8. महानगर क्षेत्र
8. महानगर क्षेत्र (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह घोषित कर सकेगी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट तारीख से, राज्य का कोई ऐसा क्षेत्र, जिसमें ऐसा नगर या शहर है जिसकी जनसंख्या दस लाख से अधिक है, इस संहिता के प्रयोजनों के लिए महानगर क्षेत्र होगा। (2) इस संहिता के प्रारंभ से, बंबई, कलकत्ता और मद्रास के प्रेसिडेंसी नगरों…
पूरा पढ़ेंसत्र न्यायालय।
(1) राज्य सरकार प्रत्येक सत्र मंडल के लिए एक सत्र न्यायालय की स्थापना करेगी। (2) प्रत्येक सत्र न्यायालय की अध्यक्षता एक न्यायाधीश द्वारा की जाएगी, जिसकी नियुक्ति उच्च न्यायालय द्वारा की जाएगी। (3) उच्च न्यायालय सत्र न्यायालय में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों की नियुक्ति भी कर सकता है।…
पूरा पढ़ेंधारा 9. सेशन न्यायालय
9. सेशन न्यायालय (1) राज्य सरकार हर सेशन खंड के लिए एक सेशन न्यायालय स्थापित करेगी। (2) हर सेशन न्यायालय में उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किया जाने वाला न्यायाधीश पीठासीन होगा। (3) उच्च न्यायालय, सेशन न्यायालय में अधिकारिता का प्रयोग करने के लिए अपर सेशन न्यायाधीश और सहायक सेशन न्यायाधीश भी नियुक्त कर सकेगा। (4) एक…
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धारा 10. सहायक सेशन न्यायाधीशों की अधीनता
10. सहायक सेशन न्यायाधीशों की अधीनता (1) सब सहायक सेशन न्यायाधीश उस सेशन न्यायाधीश के अधीनस्थ होंगे, जिसके न्यायालय में वे अधिकारिता का प्रयोग करते हैं। (2) सेशन न्यायाधीश, समय-समय पर, ऐसे सहायक सेशन न्यायाधीशों के बीच कार्य के वितरण के बारे में इस संहिता से संगत नियम बना सकेगा। (3) सेशन न्यायाधीश यह उपबंध भी कर सकेगा…
पूरा पढ़ेंन्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय।
(1) प्रत्येक जिले में प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के उतने न्यायालय स्थापित किए जाएंगे, और ऐसे स्थानों पर, जैसा कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे: बशर्ते कि राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए, किसी…
पूरा पढ़ेंन्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय।
(1) प्रत्येक जिले में (जो महानगरीय क्षेत्र न हो) प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों के उतने न्यायालय स्थापित किए जाएंगे, और ऐसे स्थानों पर, जैसा कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे: 1. बशर्ते कि राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, किसी…
पूरा पढ़ेंमुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि।
(1) प्रत्येक जिले में, उच्च न्यायालय प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगा। (2) उच्च न्यायालय प्रथम श्रेणी के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकता है, और ऐसे मजिस्ट्रेट को इस संहिता के अधीन या उस समय लागू किसी अन्य कानून के अधीन मुख्य…
पूरा पढ़ेंधारा 12. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि
12. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि (1) हर जिले में (जो महानगर क्षेत्र नहीं है), उच्च न्यायालय प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगा। (2) उच्च न्यायालय प्रथम वर्ग के किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकेगा, और ऐसे…
पूरा पढ़ेंविशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट।
(1) यदि केंद्र या राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने का अनुरोध किया जाए, तो उच्च न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति को, जो सरकार के अधीन कोई पद धारण करता हो या कर चुका हो, किसी विशेष मामले या विशेष प्रकार के मामलों के संबंध में, किसी स्थानीय क्षेत्र में प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को इस संहिता द्वारा या इसके…
पूरा पढ़ेंधारा 13. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट
13. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (1) उच्च न्यायालय, यदि केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने के लिए अनुरोध किया जाए तो, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो सरकार के अधीन कोई पद धारण करता है या धारण कर चुका है, किसी ऐसे स्थानीय क्षेत्र में, जो महानगर क्षेत्र नहीं है, विशिष्ट मामलों या मामलों के विशिष्ट वर्गों के संबंध में, वे…
पूरा पढ़ेंन्यायिक मजिस्ट्रेटों का स्थानीय क्षेत्राधिकार।
(1) उच्च न्यायालय के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट समय-समय पर उन क्षेत्रों की स्थानीय सीमाएँ निर्धारित कर सकता है जिनके भीतर धारा 9 या धारा 11 के अंतर्गत नियुक्त मजिस्ट्रेट इस संहिता के अधीन उन्हें क्रमशः प्रदत्त सभी या कोई भी शक्तियाँ प्रयोग कर सकते हैं। बशर्ते कि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट का…
पूरा पढ़ेंधारा 14. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता
14. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता (1) उच्च न्यायालय के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, समय-समय पर, उन क्षेत्रों की स्थानीय सीमाएं परिनिश्चित कर सकेगा, जिनके भीतर धारा 11 के अधीन या धारा 13 के अधीन नियुक्त मजिस्ट्रेट उन सब या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे, जो इस संहिता के अधीन…
पूरा पढ़ेंन्यायिक मजिस्ट्रेटों की अधीनता।
(1) प्रत्येक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्र न्यायाधीश के अधीन होगा; और प्रत्येक अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्र न्यायाधीश के सामान्य नियंत्रण के अधीन रहते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधीन होगा। (2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट समय-समय पर इस संहिता के अनुरूप नियम बना सकता है या विशेष आदेश जारी कर सकता है, ताकि उसके अधीनस्थ…
पूरा पढ़ेंधारा 15. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अधीनता
15. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अधीनता (1) हर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सेशन न्यायाधीश के अधीनस्थ होगा; और हर अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायाधीश के साधारण नियंत्रण के अधीन रहते हुए, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होगा। (2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, समय-समय पर, अपने अधीनस्थ न्यायिक मजिस्ट्रेटों के बीच कार्य के…
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धारा 16. महानगर मजिस्ट्रेटों के न्यायालय
16. महानगर मजिस्ट्रेटों के न्यायालय (1) हर महानगर क्षेत्र में महानगर मजिस्ट्रेटों के उतने न्यायालय और ऐसे स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे, जितने और जैसे राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात्, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे। (2) ऐसे न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किए जाएंगे। (3)…
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धारा 17. मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट
17. मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (1) उच्च न्यायालय, अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर के हर महानगर क्षेत्र के संबंध में, किसी महानगर मजिस्ट्रेट को ऐसे महानगर क्षेत्र के लिए मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगा। (2) उच्च न्यायालय किसी महानगर मजिस्ट्रेट को अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट नियुक्त कर…
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धारा 18. विशेष महानगर मजिस्ट्रेट
18. विशेष महानगर मजिस्ट्रेट (1) उच्च न्यायालय, यदि किसी केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने के लिए अनुरोध किया जाए तो, ऐसे किसी व्यक्ति को, जो सरकार के अधीन कोई पद धारण करता है या धारण कर चुका है, अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर के किसी महानगर क्षेत्र में विशिष्ट मामलों या मामलों के विशिष्ट वर्गों के संबंध…
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धारा 19. महानगर मजिस्ट्रेटों की अधीनता
19. महानगर मजिस्ट्रेटों की अधीनता (1) मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट और हर अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट सेशन न्यायाधीश के अधीनस्थ होगा, और हर अन्य महानगर मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायाधीश के साधारण नियंत्रण के अधीन रहते हुए, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होगा। (2) उच्च न्यायालय, इस संहिता के प्रयोजनों के लिए, मुख्य महानगर…
पूरा पढ़ेंकार्यकारी मजिस्ट्रेट।
(1) प्रत्येक जिले में, राज्य सरकार जितने चाहे उतने व्यक्तियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है और उनमें से एक को जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगी। (2) राज्य सरकार किसी कार्यपालिका मजिस्ट्रेट को अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है, और ऐसे मजिस्ट्रेट को इस संहिता या उस समय लागू किसी अन्य कानून के अधीन…
पूरा पढ़ेंधारा 20. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
20. कार्यपालक मजिस्ट्रेट (1) राज्य सरकार हर जिले में और हर महानगर क्षेत्र में उतने व्यक्तियों को, जितने वह ठीक समझे, कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकेगी और उनमें से एक को जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त करेगी। (2) राज्य सरकार किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को अपर जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकेगी, और ऐसे मजिस्ट्रेट को इस संहिता…
पूरा पढ़ेंविशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट।
राज्य सरकार, उचित समझे जाने वाले कार्यकाल के लिए, कार्यवाहक मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक या समकक्ष पद से कम रैंक के किसी पुलिस अधिकारी को विशेष कार्यवाहक मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त कर सकती है, जो विशिष्ट क्षेत्रों या विशिष्ट कार्यों के निष्पादन के लिए नियुक्त किए जाएंगे, और ऐसे विशेष कार्यवाहक मजिस्ट्रेटों को वे…
पूरा पढ़ेंधारा 21. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट
21. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट राज्य सरकार, ऐसी अवधि के लिए, जो वह ठीक समझे, विशिष्ट क्षेत्रों के लिए या विशिष्ट कृत्यों के पालन के लिए, कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकेगी, जो विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के रूप में ज्ञात होंगे, और ऐसे विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को ऐसी शक्तियां प्रदान कर सकेगी, जो इस संहिता के अधीन…
पूरा पढ़ेंकार्यपालिका का स्थानीय अधिकार क्षेत्र।
(1) राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, जिला मजिस्ट्रेट समय-समय पर उन क्षेत्रों की स्थानीय सीमाएँ निर्धारित कर सकता है जिनके भीतर कार्यपालिका मजिस्ट्रेट इस संहिता के अधीन उन्हें सौंपी गई सभी या किसी भी शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं। (2) ऐसी परिभाषा द्वारा अन्यथा प्रदान किए जाने के अलावा, प्रत्येक मजिस्ट्रेट का…
पूरा पढ़ेंधारा 22. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता
22. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता (1) राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, जिला मजिस्ट्रेट, समय-समय पर, उन क्षेत्रों की स्थानीय सीमाएं परिनिश्चित कर सकेगा, जिनके भीतर कार्यपालक मजिस्ट्रेट उन सब या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे, जो इस संहिता के अधीन उनमें निहित की जाएं। (2) ऐसे परिनिश्चयन…
पूरा पढ़ेंकार्यकारी मजिस्ट्रेटों की अधीनता।
(1) सभी कार्यकारी मजिस्ट्रेट जिला मजिस्ट्रेट के अधीन होंगे, और प्रत्येक कार्यकारी मजिस्ट्रेट (उप-विभागीय मजिस्ट्रेट के अलावा) जो किसी उप-विभाग में शक्तियों का प्रयोग करता है, वह भी उप-विभागीय मजिस्ट्रेट के अधीन होगा, जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण के अधीन। (2) जिला मजिस्ट्रेट समय-समय पर इस संहिता के अनुरूप नियम…
पूरा पढ़ेंधारा 23. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की अधीनता
23. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की अधीनता (1) अपर जिला मजिस्ट्रेट से भिन्न सब कार्यपालक मजिस्ट्रेट जिला मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होंगे, और किसी उपखंड में शक्तियों का प्रयोग करने वाला हर कार्यपालक मजिस्ट्रेट (उपखंड मजिस्ट्रेट से भिन्न) उपखंड मजिस्ट्रेट के भी अधीनस्थ होगा, किन्तु यह जिला मजिस्ट्रेट के साधारण नियंत्रण के अधीन…
पूरा पढ़ेंलोक अभियोजक।
(1) प्रत्येक उच्च न्यायालय के लिए, केंद्र सरकार या राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, एक लोक अभियोजक नियुक्त करेगी और ऐसे न्यायालय में केंद्र सरकार या राज्य सरकार की ओर से किसी भी अभियोग, अपील या अन्य कार्यवाही का संचालन करने के लिए एक या एक से अधिक अतिरिक्त लोक अभियोजक भी नियुक्त कर सकती है: परंतु यह…
पूरा पढ़ेंधारा 24. लोक अभियोजक
24. लोक अभियोजक (1) हर उच्च न्यायालय के लिए, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार, उस उच्च न्यायालय से परामर्श के पश्चात्, ऐसे न्यायालय में केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार की, जैसी भी स्थिति हो, ओर से किसी अभियोजन, अपील या अन्य कार्यवाही के संचालन के लिए एक लोक अभियोजक नियुक्त करेगी और एक या अधिक अपर लोक अभियोजक भी नियुक्त कर…
पूरा पढ़ेंसहायक लोक अभियोजक।
(1) राज्य सरकार प्रत्येक जिले में मजिस्ट्रेट न्यायालयों में अभियोजन चलाने के लिए एक या एक से अधिक सहायक लोक अभियोजकों की नियुक्ति करेगी। (2) केंद्र सरकार मजिस्ट्रेट न्यायालयों में किसी मामले या मामलों के वर्ग के संचालन के उद्देश्य से एक या एक से अधिक सहायक लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकती है। (3) उपधारा (1) और (2)…
पूरा पढ़ेंधारा 25. सहायक लोक अभियोजक
25. सहायक लोक अभियोजक (1) राज्य सरकार हर जिले में मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में अभियोजनों के संचालन के लिए एक या अधिक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त करेगी। (1क) केंद्रीय सरकार मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में किसी मामले या मामलों के वर्ग के संचालन के प्रयोजन के लिए एक या अधिक सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेगी। (2) उपधारा…
पूरा पढ़ेंअभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,— (क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और (ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे। (2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,— (क)…
पूरा पढ़ेंधारा 25A. अभियोजन निदेशालय
25A. अभियोजन निदेशालय (1) राज्य सरकार एक अभियोजन निदेशालय स्थापित कर सकेगी, जो एक अभियोजन निदेशक और उतने उप अभियोजन निदेशकों से मिलकर बनेगा, जितने वह ठीक समझे। (2) कोई व्यक्ति अभियोजन निदेशक या उप अभियोजन निदेशक नियुक्त किए जाने के लिए तभी पात्र होगा, जब वह कम से कम दस वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में व्यवसाय करता रहा हो,…
पूरा पढ़ेंअभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,— (क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और (ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे। (2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,— (क)…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
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अभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,— (क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और (ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे। (2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,— (क)…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
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अभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,— (क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और (ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे। (2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,— (क)…
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अभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,— (क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और (ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे। (2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,— (क)…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
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अभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,— (क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और (ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे। (2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,— (क)…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
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अभियोजन निदेशालय।
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित की स्थापना कर सकती है,— (क) राज्य में अभियोजन निदेशालय, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और जितने चाहें उतने उप-अभियोजन निदेशक होंगे; और (ख) प्रत्येक जिले में एक जिला अभियोजन निदेशालय, जिसमें आवश्यकतानुसार उप निदेशक और सहायक अभियोजन निदेशक होंगे। (2) कोई व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र होगा,— (क)…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
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वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराधों का मुकदमा चलाया जा सकता है।
इस संहिता के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए,— (क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत किसी भी अपराध का मुकदमा निम्नलिखित द्वारा चलाया जा सकता है— (i) उच्च न्यायालय; या (ii) सत्र न्यायालय; या (iii) कोई अन्य न्यायालय जिसके द्वारा प्रथम अनुसूची में ऐसे अपराध को विचारणीय दिखाया गया है: बशर्ते कि भारतीय न्याय संहिता,…
पूरा पढ़ेंधारा 26. वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं
26. वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए,— (क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अधीन किसी अपराध का विचारण— (i) उच्च न्यायालय, या (ii) सेशन न्यायालय, या (iii) ऐसे किसी अन्य न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा, जिसके द्वारा वह अपराध प्रथम अनुसूची में विचारणीय दिखाया गया है;…
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
DELETED
धारा 27. किशोरों के मामले में अधिकारिता
27. किशोरों के मामले में अधिकारिता ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई अपराध, जो उस तारीख को, जब वह न्यायालय के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, सोलह वर्ष से कम आयु का है और जो मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय द्वारा, या बालक अधिनियम, 1960 (1960 का 60) के अधीन, अथवा…
पूरा पढ़ेंउच्च न्यायालयों और सत्र न्यायाधीशों द्वारा दी जाने वाली सजाएँ।
(1) उच्च न्यायालय विधि द्वारा अधिकृत कोई भी सजा सुना सकता है। (2) सत्र न्यायाधीश या अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कानून द्वारा अधिकृत कोई भी सजा सुना सकता है; लेकिन ऐसे किसी न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के अधीन होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 28. वे दंडादेश जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकते हैं
28. वे दंडादेश जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकते हैं (1) उच्च न्यायालय विधि द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश दे सकता है। (2) सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश विधि द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश दे सकता है; किन्तु ऐसे किसी न्यायाधीश द्वारा दिया गया मृत्यु दंडादेश उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के अधीन होगा। (3)…
पूरा पढ़ेंवे सजाएँ जो मजिस्ट्रेट सुना सकते हैं।
(1) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय कानून द्वारा अधिकृत कोई भी सजा दे सकता है, सिवाय मृत्युदंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास के। (2) प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट का न्यायालय तीन वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास, या पचास हजार रुपये से अधिक का जुर्माना, या दोनों, या सामुदायिक सेवा की सजा…
पूरा पढ़ेंधारा 29. वे दंडादेश जो मजिस्ट्रेट दे सकते हैं
29. वे दंडादेश जो मजिस्ट्रेट दे सकते हैं (1) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय, मृत्यु या आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास के दंडादेश के सिवाय, विधि द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश दे सकता है। (2) प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट का न्यायालय तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के कारावास का, या दस हजार रुपए से अनधिक…
पूरा पढ़ेंजुर्माना न भरने पर कारावास की सजा।
(1) मजिस्ट्रेट का न्यायालय जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति में ऐसी कारावास अवधि प्रदान कर सकता है जो कानून द्वारा अधिकृत हो: बशर्ते कि यह अवधि--- (क) धारा 23 के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्तियों से अधिक नहीं है; (ख) जहां कारावास को मूल सजा के भाग के रूप में प्रदान किया गया है, वहां कारावास की अवधि के एक चौथाई से अधिक…
पूरा पढ़ेंधारा 30. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश
30. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश (1) मजिस्ट्रेट का न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास की ऐसी अवधि अधिनिर्णीत कर सकेगा, जो विधि द्वारा प्राधिकृत है: परन्तु वह अवधि— (क) धारा 29 के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्तियों से अधिक न होगी; (ख) जहां कारावास मूल दंडादेश के भाग के रूप में…
पूरा पढ़ेंएक ही मुकदमे में कई अपराधों के लिए दोषी पाए जाने पर दी जाने वाली सजा।
(1) जब किसी व्यक्ति को एक ही मुकदमे में दो या दो से अधिक अपराधों का दोषी पाया जाता है, तो न्यायालय, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 9 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उसे ऐसे अपराधों के लिए उन विभिन्न दंडों से सजा दे सकता है जो ऐसे न्यायालय को देने में सक्षम हैं और न्यायालय, अपराधों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए,…
पूरा पढ़ेंधारा 31. एक ही विचारण में कई अपराधों के लिए दोषसिद्धि की दशा में दंडादेश
31. एक ही विचारण में कई अपराधों के लिए दोषसिद्धि की दशा में दंडादेश (1) जब कोई व्यक्ति एक ही विचारण में दो या अधिक अपराधों के लिए दोषसिद्ध किया जाता है, तब भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 71 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, न्यायालय उसे ऐसे अपराधों के लिए विहित पृथक्-पृथक् दंडों में से उन दंडों का दंडादेश दे सकेगा,…
पूरा पढ़ेंशक्तियां प्रदान करने की विधि।
(1) इस संहिता के अधीन शक्तियाँ प्रदान करते समय, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, आदेश द्वारा व्यक्तियों को विशेष रूप से नाम से या उनके पदों के आधार पर या अधिकारियों के वर्गों को सामान्यतः उनके आधिकारिक पदनामों द्वारा सशक्त कर सकती है। (2) ऐसा प्रत्येक आदेश उस तिथि से प्रभावी होगा जिस तिथि को वह इस…
पूरा पढ़ेंधारा 32. शक्तियां प्रदान करने की रीति
32. शक्तियां प्रदान करने की रीति (1) इस संहिता के अधीन शक्तियां प्रदान करने में, यथास्थिति, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, आदेश द्वारा, व्यक्तियों को विशेष रूप से नाम से या उनके पदों के आधार पर, अथवा अधिकारियों के वर्गों को साधारणतया उनके पदीय अभिधानों द्वारा सशक्त कर सकेगी। (2) ऐसा प्रत्येक आदेश उस तारीख से प्रभावी…
पूरा पढ़ेंनियुक्त अधिकारियों की शक्तियां।
जब भी कोई व्यक्ति जो सरकार की सेवा में कोई पद धारण करता है और जिसे उच्च न्यायालय या राज्य सरकार द्वारा इस संहिता के तहत किसी स्थानीय क्षेत्र में कोई शक्तियां प्रदान की गई हैं, उसी राज्य सरकार के अधीन उसी स्थानीय क्षेत्र में समान प्रकृति के किसी उच्च पद पर नियुक्त किया जाता है, तो जब तक उच्च न्यायालय या राज्य सरकार,…
पूरा पढ़ेंधारा 33. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां
33. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां जब कभी सरकार की सेवा में कोई पद धारण करने वाला ऐसा कोई व्यक्ति, जिसे उच्च न्यायालय या राज्य सरकार द्वारा किसी स्थानीय क्षेत्र भर में इस संहिता के अधीन कोई शक्तियां प्रदान की गई हैं, उसी प्रकार के समान या उच्चतर पद पर, उसी राज्य सरकार के अधीन वैसे ही स्थानीय क्षेत्र में, नियुक्त किया…
पूरा पढ़ेंशक्तियों की वापसी।
(1) उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, इस संहिता के अधीन किसी व्यक्ति या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को प्रदत्त सभी या कोई भी शक्तियाँ वापस ले सकती है। (2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदत्त कोई भी शक्तियाँ उस संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा वापस ली जा सकती हैं, जिसने ऐसी शक्तियाँ प्रदत्त…
पूरा पढ़ेंधारा 34. शक्तियों का वापस लिया जाना
34. शक्तियों का वापस लिया जाना (1) यथास्थिति, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, इस संहिता के अधीन अपने द्वारा किसी व्यक्ति को प्रदान की गई या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा प्रदान की गई सभी या कोई शक्तियां वापस ले सकेगी। (2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदान की गई कोई शक्तियां उस संबंधित…
पूरा पढ़ेंन्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियां उनके उत्तराधिकारियों द्वारा प्रयोग की जा सकती हैं।
(1) इस संहिता के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की शक्तियों एवं कर्तव्यों का प्रयोग या निष्पादन उसके उत्तराधिकारी द्वारा किया जा सकता है। (2) जब इस बात को लेकर कोई संदेह हो कि पद का उत्तराधिकारी कौन है, तो सत्र न्यायाधीश लिखित आदेश द्वारा उस न्यायाधीश का निर्धारण करेगा जिसे इस संहिता या इसके…
पूरा पढ़ेंधारा 35. न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियों का उनके पद-उत्तरवर्तियों द्वारा प्रयोक्तव्य होना
35. न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियों का उनके पद-उत्तरवर्तियों द्वारा प्रयोक्तव्य होना (1) इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग या पालन उसके पद-उत्तरवर्ती द्वारा किया जा सकेगा। (2) जब इस बारे में कोई संदेह हो कि किसी अपर या सहायक सेशन…
पूरा पढ़ें- BNSS §1CRPC §1
संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार और प्रारंभ।
- BNSS §2CRPC §2बदलाव हुआ
परिभाषाएँ।
धारा 2. परिभाषाएं
- BNSS §2.(1(a))CRPC §New Sub-Section
परिभाषाएँ।
नई उपधारा
BNSS §2.(1(a))CRPC §New Sub-Section - BNSS §2.(1(b))CRPC §New Sub-Section
परिभाषाएँ।
नई उपधारा
BNSS §2.(1(b))CRPC §New Sub-Section - BNSS §2.(1(d))CRPC §New Sub-Section
परिभाषाएँ।
नई उपधारा
BNSS §2.(1(d))CRPC §New Sub-Section - BNSS §2.(1(e))CRPC §New Sub-Section
परिभाषाएँ।
नई उपधारा
BNSS §2.(1(e))CRPC §New Sub-Section - BNSS §2.(1(i))CRPC §New Sub-Section
परिभाषाएँ।
नई उपधारा
BNSS §2.(1(i))CRPC §New Sub-Section - BNSS §DELETEDCRPC §2
हटाई गई धारा
धारा 2. परिभाषाएं
BNSS §DELETEDCRPC §2 - BNSS §DELETEDCRPC §2
हटाई गई धारा
धारा 2. परिभाषाएं
BNSS §DELETEDCRPC §2 - BNSS §DELETEDCRPC §2
हटाई गई धारा
धारा 2. परिभाषाएं
BNSS §DELETEDCRPC §2 - BNSS §3CRPC §3
संदर्भों का निर्माण।
धारा 3. निर्देशों का अर्थ लगाना
- BNSS §4CRPC §4
भारतीय न्याय संहिता, 2023 और अन्य कानूनों के तहत अपराधों का मुकदमा।
धारा 4. भारतीय दंड संहिता और अन्य विधियों के अधीन अपराधों का विचारण
- BNSS §5CRPC §5
बचत।
- BNSS §6CRPC §6
आपराधिक न्यायालयों के प्रकार।
- BNSS §7CRPC §7
क्षेत्रीय विभाजन।
धारा 7. प्रादेशिक खंड
- BNSS §DELETEDCRPC §8
हटाई गई धारा
धारा 8. महानगर क्षेत्र
BNSS §DELETEDCRPC §8 - BNSS §8CRPC §9बदलाव हुआ
सत्र न्यायालय।
धारा 9. सेशन न्यायालय
- BNSS §DELETEDCRPC §10
हटाई गई धारा
धारा 10. सहायक सेशन न्यायाधीशों की अधीनता
BNSS §DELETEDCRPC §10 - BNSS §9CRPC §11
न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय।
- BNSS §10CRPC §12
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि।
धारा 12. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आदि
- BNSS §11CRPC §13बदलाव हुआ
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट।
धारा 13. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट
- BNSS §12CRPC §14
न्यायिक मजिस्ट्रेटों का स्थानीय क्षेत्राधिकार।
धारा 14. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता
- BNSS §13CRPC §15
न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अधीनता।
धारा 15. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अधीनता
- BNSS §DELETEDCRPC §16
हटाई गई धारा
धारा 16. महानगर मजिस्ट्रेटों के न्यायालय
BNSS §DELETEDCRPC §16 - BNSS §DELETEDCRPC §17
हटाई गई धारा
धारा 17. मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट
BNSS §DELETEDCRPC §17 - BNSS §DELETEDCRPC §18
हटाई गई धारा
धारा 18. विशेष महानगर मजिस्ट्रेट
BNSS §DELETEDCRPC §18 - BNSS §DELETEDCRPC §19
हटाई गई धारा
धारा 19. महानगर मजिस्ट्रेटों की अधीनता
BNSS §DELETEDCRPC §19 - BNSS §14CRPC §20बदलाव हुआ
कार्यकारी मजिस्ट्रेट।
धारा 20. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
- BNSS §15CRPC §21बदलाव हुआ
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट।
धारा 21. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट
- BNSS §16CRPC §22
कार्यपालिका का स्थानीय अधिकार क्षेत्र।
धारा 22. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता
- BNSS §17CRPC §23
कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की अधीनता।
धारा 23. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की अधीनता
- BNSS §18CRPC §24बदलाव हुआ
लोक अभियोजक।
धारा 24. लोक अभियोजक
- BNSS §19CRPC §25बदलाव हुआ
सहायक लोक अभियोजक।
धारा 25. सहायक लोक अभियोजक
- BNSS §20CRPC §25Aबदलाव हुआ
अभियोजन निदेशालय।
धारा 25A. अभियोजन निदेशालय
- BNSS §20.(1(b))CRPC §New Sub-Section
अभियोजन निदेशालय।
नई उपधारा
BNSS §20.(1(b))CRPC §New Sub-Section - BNSS §20.(2(b))CRPC §New Sub-Section
अभियोजन निदेशालय।
नई उपधारा
BNSS §20.(2(b))CRPC §New Sub-Section - BNSS §20(7)CRPC §New Sub-Section
अभियोजन निदेशालय।
नई उपधारा
BNSS §20(7)CRPC §New Sub-Section - BNSS §20(8)CRPC §New Sub-Section
अभियोजन निदेशालय।
नई उपधारा
BNSS §20(8)CRPC §New Sub-Section - BNSS §20(9)CRPC §New Sub-Section
अभियोजन निदेशालय।
नई उपधारा
BNSS §20(9)CRPC §New Sub-Section - BNSS §20(10)CRPC §New Sub-Section
अभियोजन निदेशालय।
नई उपधारा
BNSS §20(10)CRPC §New Sub-Section - BNSS §21CRPC §26
वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराधों का मुकदमा चलाया जा सकता है।
धारा 26. वे न्यायालय जिनके द्वारा अपराध विचारणीय हैं
- BNSS §DELETEDCRPC §27
हटाई गई धारा
धारा 27. किशोरों के मामले में अधिकारिता
BNSS §DELETEDCRPC §27 - BNSS §22CRPC §28
उच्च न्यायालयों और सत्र न्यायाधीशों द्वारा दी जाने वाली सजाएँ।
धारा 28. वे दंडादेश जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकते हैं
- BNSS §23CRPC §29बदलाव हुआ
वे सजाएँ जो मजिस्ट्रेट सुना सकते हैं।
धारा 29. वे दंडादेश जो मजिस्ट्रेट दे सकते हैं
- BNSS §24CRPC §30
जुर्माना न भरने पर कारावास की सजा।
धारा 30. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश
- BNSS §25CRPC §31बदलाव हुआ
एक ही मुकदमे में कई अपराधों के लिए दोषी पाए जाने पर दी जाने वाली सजा।
धारा 31. एक ही विचारण में कई अपराधों के लिए दोषसिद्धि की दशा में दंडादेश
- BNSS §26CRPC §32
शक्तियां प्रदान करने की विधि।
धारा 32. शक्तियां प्रदान करने की रीति
- BNSS §27CRPC §33
नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां।
धारा 33. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां
- BNSS §28CRPC §34
शक्तियों की वापसी।
धारा 34. शक्तियों का वापस लिया जाना
- BNSS §29CRPC §35बदलाव हुआ
न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियां उनके उत्तराधिकारियों द्वारा प्रयोग की जा सकती हैं।
धारा 35. न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियों का उनके पद-उत्तरवर्तियों द्वारा प्रयोक्तव्य होना
