BNS ने इसकी जगह लीIPCकेंद्रीय कानून1860
भारतीय दंड संहिता, 1860
It is expedient to provide a general Penal Code forindia
1860 का अधिनियम संख्या 45
- धाराएँ
- 574
- अध्याय
- 26
- वर्गीकृत अपराध
- 370
- संशोधन
- 248
- इसकी जगह
- BNS, 2023
विषय-सूची
IIntroduction§ 1–55 धाराएँ
- 1संहिता का शीर्षक और संचालन का दायरा।
- 2भारत के भीतर किए गए अपराधों के लिए दंड।
- 3उन अपराधों के लिए दंड जो भारत की सीमा से बाहर किए गए हों, लेकिन जिनका कानून के अनुसार भारत के भीतर मुकदमा चलाया जा सकता हो।
- 4संहिता का विस्तार क्षेत्र से बाहर के अपराधों पर भी किया गया है।
- 5कुछ कानूनों पर इस अधिनियम का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
IIGeneral Explanations§ 6–52A49 धाराएँ3 निरस्त
- 6संहिता में दी गई परिभाषाओं को अपवादों के अधीन समझा जाना चाहिए।
- 7अभिव्यक्ति की भावना को एक बार समझा दिया गया।
- 8लिंग।
- 9संख्या।
- 10पुरुष। महिला।
- 11व्यक्ति''।
- 12जनता''।
- 13[हटा दिया गया]।(निरस्त)
- 14सरकार का सेवक।
- 15[निरस्त](निरस्त)
- 16[निरस्त](निरस्त)
- 17सरकार''।
- 18भारत''।
- 19न्यायाधीश''।
- 20न्याय न्यायालय।
- 21लोक सेवक''।
- 22चल संपत्ति।
- 23अवैध लाभ।
- 24बेईमानी से''।
- 25धोखाधड़ी से।
- 26धारा 26 - “विश्वास करने का कारण”
- 27धारा 27 - “पत्नी, लिपिक या सेवक के कब्जे में सम्पत्ति”
- 28धारा 28 - “कूटकरण”
- 29धारा 29 - “दस्तावेज”
- 29Aधारा 29A - “इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख”
- 30धारा 30 - “मूल्यवान प्रतिभूति”
- 31धारा 31 - “बिल”
- 32धारा 32 - कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप आता है
- 33धारा 33 - “कार्य”
- 34धारा 34 - सामान्य आशय को अग्रसर करने में कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्य
- 35धारा 35 - जबकि ऐसा कार्य इस कारण आपराधिक है कि वह आपराधिक ज्ञान या आशय से किया गया है
- 36धारा 36 - अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम
- 37धारा 37 - किसी अपराध को गठित करने वाले कई कार्यों में से किसी एक को करके सहयोग करना
- 38धारा 38 - आपराधिक कार्य में संपॄक्त व्यक्ति विभिन्न अपराधों के दोषी हो सकेंगे
- 39धारा 39 - “स्वेच्छया”
- 40धारा 40 - “अपराध”
- 41धारा 41 - “विशेष विधि”
- 42धारा 42 - “स्थानीय विधि”
- 43धारा 43 - “अवैध”
- 44धारा 44 - “क्षति”
- 45धारा 45 - “जीवन”
- 46धारा 46 - “मॄत्यु”
- 47धारा 47 - “जीवजन्तु”
- 48धारा 48 - “जलयान”
- 49धारा 49 - “वर्ष” या “मास”
- 50धारा 50 - “धारा”
- 51धारा 51 - “शपथ”
- 52धारा 52 - “सद्भावपूर्वक”
- 52Aधारा 52A - “संश्रय”
IIIOf Punishments§ 53–7525 धाराएँ5 निरस्त
- 53दंड।
- 53Aपरिवहन के संदर्भ में निर्माण।
- 54मृत्युदंड की सजा में कमी।
- 55आजीवन कारावास की सजा में कमी।
- 55A"उपयुक्त सरकार" की परिभाषा।
- 56[निरस्त](निरस्त)
- 57सजा की अवधि के अंश।
- 58[निरस्त](निरस्त)
- 59[निरस्त](निरस्त)
- 60कारावास के कुछ मामलों में सजा पूरी तरह या आंशिक रूप से कठोर या साधारण हो सकती है।
- 61[निरस्त](निरस्त)
- 62[निरस्त](निरस्त)
- 63जुर्माने की राशि।
- 64जुर्माना न भरने पर कारावास की सजा।
- 65जब कारावास और जुर्माना दोनों दिए जा सकते हों, तो जुर्माने का भुगतान न करने पर कारावास की सीमा निर्धारित करना।
- 66जुर्माना न भरने पर कारावास का विवरण।
- 67जुर्माना न भरने पर कारावास, जब अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय हो।
- 68जुर्माना अदा करने पर कारावास समाप्त हो जाएगा।
- 69जुर्माने के आनुपातिक हिस्से के भुगतान पर कारावास की समाप्ति।
- 70छह साल के भीतर या कारावास की अवधि के दौरान जुर्माना लगाया जा सकता है। मृत्यु से संपत्ति दायित्व से मुक्त नहीं होती।
- 71धारा 71 - कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
- 72धारा 72 - कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिए दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है
- 73धारा 73 - एकांत परिरोध
- 74धारा 74 - एकांत परिरोध की अवधि
- 75धारा 75 - पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड
IVGeneral Exceptions§ 76–10631 धाराएँ
- 76धारा 76 - विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
- 77धारा 77 - न्यायिकतः कार्य करते हुए न्यायाधीश का कार्य
- 78धारा 78 - न्यायलय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य
- 79धारा 79 - विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
- 80धारा 80 - विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना
- 81धारा 81 - कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है
- 82धारा 82 - सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य
- 83धारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
- 84धारा 84 - विकॄतचित व्यक्ति का कार्य
- 85धारा 85 - ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्ता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है
- 86धारा 86 - किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्ता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है
- 87धारा 87 - सम्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो
- 88धारा 88 - किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य जिससे मृत्यु कारित करने का आशय नहीं है
- 89धारा 89 - संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
- 90धारा 90 - सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है
- 91धारा 91 - ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
- 92धारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
- 93धारा 93 - सद्भावपूरवक दी गई संसूचना
- 94धारा 94 - वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है
- 95मामूली नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य।
- 96धारा 96 - प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें
- 97धारा 97 - शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
- 98धारा 98 - ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो
- 99धारा 99 - कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
- 100धारा 100 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है
- 101धारा 101 - कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है
- 102धारा 102 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
- 103धारा 103 - कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
- 104धारा 104 - ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का कब होता है
- 105धारा 105 - संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
- 106धारा 106 - घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है
VOf Abetment§ 107–12015 धाराएँ
- 107किसी कार्य में सहायता करना।
- 108धारा 108 - दुष्प्रेरक
- 108Aधारा 108A - भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण
- 109धारा 109 - दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है
- 110धारा 110 - दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है
- 111धारा 111 - दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है
- 112धारा 112 - दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है
- 113धारा 113 - दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
- 114धारा 114 - अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति
- 115धारा 115 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध नहीं किया जाता
- 116धारा 116 - कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध न किया जाए
- 117धारा 117 - लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण
- 118धारा 118 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
- 119धारा 119 - किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है
- 120धारा 120 - कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
VACriminal Conspiracy§ 120A–120B2 धाराएँ
VIOf Offences Against the State§ 121–13012 धाराएँ
- 121धारा 121 - भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना
- 121Aधारा 121A - धारा 121 द्वारा दंडनीय अपराधों को करने का षडयंत्र
- 122धारा 122 - भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के आशय से आयुध आदि संग्रह करना
- 123धारा 123 - युद्ध करने की परिकल्पना को सुकर बनाने के आशय से छिपाना
- 124धारा 124 - किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना
- 124Aधारा 124A - राज्यद्रोह
- 125धारा 125 - भारत सरकार से मैत्री संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरुद्ध युद्ध करना
- 126धारा 126 - भारत सरकार के साथ शांति का संबंध रखने वाली शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करना
- 127धारा 127 - धारा 125 और 126 में वर्णित युद्ध या लूटपाट द्वारा ली गई समपत्ति प्राप्त करना
- 128धारा 128 - लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देना
- 129धारा 129 - उपेक्षा से लोक सेवक का ऐसे कैदी का निकल भागना सहन करना
- 130धारा 130 - ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना
VIIOf Offences Relating to the Army, Navyand Air Force§ 131–14011 धाराएँ1 निरस्त
- 131धारा 131 - विद्रोह का दुष्प्रेरण, या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना
- 132धारा 132 - विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए
- 133धारा 133 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद-निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण
- 134धारा 134 - ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए
- 135धारा 135 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण
- 136धारा 136 - अभित्याजक को संश्रय देना
- 137धारा 137 - मास्टर की उपेक्षा से किसी वाणिज्यिक जलयान पर छुपा हुआ अभित्याजक
- 138धारा 138 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण
- 138Aधारा 138A - पूर्वोक्त धाराओं का भारतीय सामुद्रीक सेवा को लागू होना(निरस्त)
- 139धारा 139 - कुछ अधिनियमों के अध्यधीन व्यक्ति
- 140धारा 140 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक पहनना या टोकन धारण करना
VIIIOf Offences Against the Public Tranquillity§ 141–16023 धाराएँ
- 141धारा 141 - विधिविरुद्ध जमाव
- 142धारा 142 - विधिविरुद्ध जमाव का सदस्य होना
- 143धारा 143 - दंड
- 144धारा 144 - घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित होना
- 145धारा 145 - किसी विधिविरुद्ध जमाव में यह जानते हुए कि उसके बिखर जाने का समादेश दे दिया गया है, सम्मिलित होना या उसमें बने रहना
- 146धारा 146 - बल्वा करना
- 147धारा 147 - बल्वा करने के लिए दंड
- 148धारा 148 - घातक आयुध से सज्जित होकर बल्वा करना
- 149धारा 149 - विधिविरुद्ध जमाव का हर सदस्य, सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में किए गए अपराध का दोषी
- 150धारा 150 - विधिविरुद्ध जमाव में सम्मिलित करने के लिए व्यक्तियों का भाड़े पर लेना या भाड़े पर लेने के प्रति मौनानुकूलता
- 151धारा 151 - पांच या अधिक व्यक्तियों के जमाव को बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् उसमें जानते हुए सम्मिलित होना या बने रहना
- 152धारा 152 - लोक सेवक जब बल्वे इत्यादि को दबा रहा हो, तब उस पर हमला करना या उसे बाधित करना
- 153धारा 153 - बल्वा कराने के आशय से स्वैरिता से प्रकोपन देना
- 153Aधारा 153A - धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना
- 153AAधारा 153AA - किसी जुलूस में जानते हुए आयुध ले जाने या आयुधों के साथ किसी सामूहिक ड्रिल या सामूहिक प्रशिक्षण का आयोजन करने, उसे संचालित करने या उसमें भाग लेने के लिए दंड
- 153Bधारा 153B - राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान
- 154धारा 154 - उस भूमि का स्वामी या अधिभोगी, जिस पर विधिविरुद्ध जमाव किया जाता है
- 155धारा 155 - उस व्यक्ति का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है
- 156धारा 156 - उस स्वामी या अधिभोगी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए बल्वा किया जाता है
- 157धारा 157 - विधिविरुद्ध जमाव के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना
- 158धारा 158 - विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना
- 159धारा 159 - दंगा
- 160धारा 160 - दंगा करने के लिए दंड
IXOf Offencesby or Relating to Public Servants§ 161–17113 धाराएँ5 निरस्त
- 161धारा 161 to 165A - लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराधों के विषय में(निरस्त)
- 162[Repealed.].(निरस्त)
- 163[Repealed.].(निरस्त)
- 164[Repealed.].(निरस्त)
- 165A[Repealed.].(निरस्त)
- 166धारा 166 - लोक सेवक, जो किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करता है
- 166Aधारा 166A - कानून के तहत महीने दिशा अवहेलना लोक सेवक
- 166Bधारा 166B - अस्पताल द्वारा शिकार की गैर उपचार
- 167धारा 167 - लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है
- 168धारा 168 - लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है
- 169धारा 169 - लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से संपत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है
- 170धारा 170 - लोक सेवक का प्रतिरूपण
- 171धारा 171 - कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या टोकन को धारण करना
IXAOf Offencesrelating to Elections§ 171-I–171H9 धाराएँ
- 171-Iधारा 171I - निर्वाचन लेखा रखने में असफलता
- 171Aधारा 171A - “अभ्यर्थी”, “निर्वाचन अधिकार” परिभाषित
- 171Bधारा 171B - रिश्वत
- 171Cधारा 171C - निर्वाचनों में असम्यक असर डालना
- 171Dधारा 171D - निर्वाचनों में प्रतिरूपण
- 171Eधारा 171E - रिश्वत के लिए दण्ड
- 171Fधारा 171F - निर्वाचनों में असम्यक असर डालने या प्रतिरूपण के लिए दण्ड
- 171Gधारा 171G - निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन
- 171Hधारा 171H - निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय
XOf Contempts of the Lawful Authority of Public Servants§ 172–19020 धाराएँ
- 172धारा 172 - समनों की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना
- 173धारा 173 - समन की तामील का या अन्य कार्यवाही का या उसके प्रकाशन का निवारण करना
- 174धारा 174 - लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना
- 174Aधारा 174A - 1974 के अधिनियम 2 की धारा 82 के अधीन उद्घोषणा के उत्तर में गैर-हाजिरी
- 175धारा 175 - दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने का लोप
- 176धारा 176 - सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप
- 177धारा 177 - मिथ्या इत्तिला देना
- 178धारा 178 - शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए
- 179धारा 179 - प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक का उत्तर देने से इंकार करना
- 180धारा 180 - कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार
- 181धारा 181 - शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन
- 182धारा 182 - इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे
- 183धारा 183 - लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लिए जाने का प्रतिरोध
- 184धारा 184 - लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना
- 185धारा 185 - लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति का अवैध क्रय या उसके लिए अवैध बोली लगाना
- 186धारा 186 - लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में बाधा डालना
- 187धारा 187 - लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो
- 188धारा 188 - लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा
- 189धारा 189 - लोक सेवक को क्षति करने की धमकी
- 190धारा 190 - लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी
XIOf False Evidence and Offences Against Public Justice§ 191–229A46 धाराएँ
- 191झूठी गवाही देना।
- 192धारा 192 - मिथ्या साक्ष्य गढ़ना
- 193धारा 193 - मिथ्या साक्ष्य के लिए दण्ड
- 194धारा 194 - मॄत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना
- 195धारा 195 - आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना
- 195Aधारा 195A - किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना
- 196धारा 196 - उस साक्ष्य को काम में लाना जिसका मिथ्या होना ज्ञात है
- 197धारा 197 - मिथ्या प्रमाणपत्र जारी करना या हस्ताक्षरित करना
- 198धारा 198 - प्रमाणपत्र को जिसका मिथ्या होना ज्ञात है, सच्चे के रूप में काम में लाना
- 199धारा 199 - ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन
- 200धारा 200 - ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में काम में लाना
- 201धारा 201 - अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देना
- 202धारा 202 - इत्तिला देने के लिए आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप
- 203धारा 203 - किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना
- 204धारा 204 - साक्ष्य के रूप में किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख का पेश किया जाना निवारित करने के लिए उसको नष्ट करना
- 205धारा 205 - वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण
- 206धारा 206 - संपत्ति को समपहरण किए जाने में या निष्पादन में अभिगॄहीत किए जाने से निवारित करने के लिए उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना
- 207धारा 207 - संपत्ति पर उसके समपहरण किए जाने में या निष्पादन में अभिगॄहीत किए जाने से निवारित करने के लिए कपटपूर्वक दावा
- 208धारा 208 - ऐसी राशि के लिए जो शोध्य न हो कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना
- 209धारा 209 - बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना
- 210धारा 210 - ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना
- 211धारा 211 - क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
- 212धारा 212 - अपराधी को संश्रय देना
- 213धारा 213 - अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना
- 214धारा 214 - अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन
- 215धारा 215 - चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना
- 216धारा 216 - ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है
- 216Aधारा 216A - लुटेरों या डाकुओं को संश्रय देने के लिए शास्ति
- 216Bधारा 216B - धारा 212, धारा 216 और धारा 216क में “संश्रय” की परिभाषा
- 217धारा 217 - लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा
- 218धारा 218 - किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना
- 219धारा 219 - न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा भ्रष्टतापूर्वक किया जाना
- 220धारा 220 - प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी
- 221धारा 221 - पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
- 222धारा 222 - दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
- 223धारा 223 - लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना
- 224धारा 224 - किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
- 225धारा 225 - किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
- 225Aधारा 225A - उन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना
- 225Bधारा 225B - अन्यथा अनुपबंधित दशाओं में विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना
- 226धारा 226 - निर्वासन से विधिविरुद्ध वापसी
- 227धारा 227 - दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण
- 228धारा 228 - न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न
- 228Aधारा 228A - कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
- 229धारा 229 - जूरी सदस्य या असेसर का प्रतिरूपण
- 229Aधारा 229A - जमानत या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता
XIIOf Offences Relating to Coin and Government Stamps§ 230–263A35 धाराएँ
- 230धारा 230 - “सिक्का” की परिभाषा
- 231धारा 231 - सिक्के का कूटकरण
- 232धारा 232 - भारतीय सिक्के का कूटकरण
- 233धारा 233 - सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
- 234धारा 234 - भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
- 235धारा 235 - सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री उपयोग में लाने के प्रयोजन से उसे कब्जे में रखना
- 236धारा 236 - भारत से बाहर सिक्के के कूटकरण का भारत में दुष्प्रेरण
- 237धारा 237 - कूटकॄत सिक्के का आयात या निर्यात
- 238धारा 238 - भारतीय सिक्के की कूटकॄतियों का आयात या निर्यात
- 239धारा 239 - सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था
- 240धारा 240 - उस भारतीय सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था
- 241धारा 241 - किसी सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान, जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था, कूटकॄत होना नहीं जानता था
- 242धारा 242 - कूटकॄत सिक्के पर ऐसे व्यक्ति का कब्जा जो उस समय उसका कूटकॄत होना जानता था जब वह उसके कब्जे में आया था
- 243धारा 243 - भारतीय सिक्के पर ऐसे व्यक्ति का कब्जा जो उसका कूटकॄत होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया था
- 244धारा 244 - टकसाल में नियोजित व्यक्ति द्वारा सिक्के को उस वजन या मिश्रण से भिन्न कारित किया जाना जो विधि द्वारा नियत है
- 245धारा 245 - टकसाल से सिक्का बनाने का उपकरण विधिविरुद्ध रूप से लेना
- 246धारा 246 - कपटपूर्वक या बेईमानी से सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना
- 247धारा 247 - कपटपूर्वक या बेईमानी से भारतीय सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना
- 248धारा 248 - इस आशय से किसी सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए
- 249धारा 249 - इस आशय से भारतीय सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए
- 250धारा 250 - ऐसे सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है
- 251धारा 251 - भारतीय सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है
- 252धारा 252 - ऐसे व्यक्ति द्वारा सिक्के पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया
- 253धारा 253 - ऐसे व्यक्ति द्वारा भारतीय सिक्के पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया
- 254धारा 254 - सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था, परिवर्तित होना नहीं जानता था
- 255धारा 255 - सरकारी स्टाम्प का कूटकरण
- 256धारा 256 - सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री कब्जे में रखना
- 257धारा 257 - सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
- 258धारा 258 - कूटकृत सरकारी स्टाम्प का विक्रय
- 259धारा 259 - सरकारी कूटकॄत स्टाम्प को कब्जे में रखना
- 260धारा 260 - किसी सरकारी स्टाम्प को, कूटकॄत जानते हुए उसे असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाना
- 261धारा 261 - इस आशय से कि सरकार को हानि कारित हो, उस पदार्थ पर से, जिस पर सरकारी स्टाम्प लगा हुआ है, लेख मिटाना या दस्तावेज से वह स्टाम्प हटाना जो उसके लिए उपयोग में लाया गया है
- 262धारा 262 - ऐसे सरकारी स्टाम्प का उपयोग जिसके बारे में ज्ञात है कि उसका पहले उपयोग हो चुका है
- 263धारा 263 - स्टाम्प के उपयोग किए जा चुकने के द्योतक चिन्ह का छीलकर मिटाना
- 263Aधारा 263A - बनावटी स्टाम्पों का प्रतिषेघ
XIIIOf Offences Relating to Weights and Measures§ 264–2674 धाराएँ
XIVOf Offences Affecting the Public Health, Safety, Convenience, Decencyand Morals§ 268–294A28 धाराएँ
- 268धारा 268 - लोक न्यूसेन्स
- 269धारा 269 - उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो
- 270धारा 270 - परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो
- 271धारा 271 - करन्तीन के नियम की अवज्ञा
- 272धारा 272 - विक्रय के लिए आशयित खाद्य या पेय का अपमिश्रण
- 273धारा 273 - अपायकर खाद्य या पेय का विक्रय
- 274धारा 274 - औषधियों का अपमिश्रण
- 275धारा 275 - अपमिश्रित ओषधियों का विक्रय
- 276धारा 276 - ओषधि का भिन्न औषधि या निर्मिति के तौर पर विक्रय
- 277धारा 277 - लोक जल-स्रोत या जलाशय का जल कलुषित करना
- 278धारा 278 - वायुमण्डल को स्वास्थ्य के लिए अपायकर बनाना
- 279धारा 279 - लोक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना या हांकना
- 280धारा 280 - जलयान का उतावलेपन से चलाना
- 281धारा 281 - भ्रामक प्रकाश, चिन्ह या बोये का प्रदर्शन
- 282धारा 282 - अक्षमकर या अति लदे हुए जलयान में भाड़े के लिए जलमार्ग से किसी व्यक्ति का प्रवहण
- 283धारा 283 - लोक मार्ग या नौपरिवहन पथ में संकट या बाधा
- 284धारा 284 - विषैले पदार्थ के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
- 285धारा 285 - अग्नि या ज्वलनशील पदार्थ के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण
- 286धारा 286 - विस्फोटक पदार्थ के बारे में उपेक्षापूर्ण आचरण
- 287धारा 287 - मशीनरी के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण
- 288धारा 288 - किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
- 289धारा 289 - जीवजन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
- 290धारा 290 - अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक न्यूसेन्स के लिए दण्ड
- 291धारा 291 - न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना
- 292धारा 292 - अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि
- 293धारा 293 - तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओ का विक्रय आदि
- 294धारा 294 - अश्लील कार्य और गाने
- 294Aधारा 294A - लाटरी कार्यालय रखना
XVOf Offencesrelating to Religion§ 295–2985 धाराएँ
- 295धारा 295 - किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना
- 295Aधारा 295A - विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों
- 296धारा 296 - धार्मिक जमाव में विघ्न करना
- 297धारा 297 - कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना
- 298धारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
XVIOf offences affecting life · Of the causing of Miscarriage, of Injuries to unborn Children, of the Exposure of Infants, and of the concealment of Births · Of Hurt · Of wrongful restraint and wrongful confinement · Of Criminal Force and Assault · Of Kidnapping, Abduction, Slavery and Forced Labour · Sexual offences · Of Unnatural offences§ 299–377100 धाराएँ
Of offences affecting life
- 299गैर इरादतन हत्या।
- 300हत्या।
- 301किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनकर गैर इरादतन हत्या करना, जिसकी मृत्यु का इरादा नहीं था।
- 302हत्या का दंड।
- 303आजीवन कारावास की सजा पाए व्यक्ति द्वारा हत्या का दंड।
- 304हत्या न करने के अपराध में गैर इरादतन हत्या के लिए सजा।
- 304Aलापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
- 304Bदहेज हत्या।
- 305किसी बच्चे या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना।
- 306आत्महत्या के लिए उकसाना।
- 307हत्या का प्रयास।
- 308गैर इरादतन हत्या का प्रयास।
- 309धारा 309 - आत्महत्या करने का प्रयत्न
- 310धारा 310 - ठग
- 311धारा 311 - दण्ड
Of the causing of Miscarriage, of Injuries to unborn Children, of the Exposure of Infants, and of the concealment of Births
- 312धारा 312 - गर्भपात कारित करना
- 313धारा 313 - स्त्री की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना
- 314धारा 314 - गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मॄत्यु
- 315धारा 315 - शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मॄत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य
- 316गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु का कारण बनना, जो कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
- 317धारा 317 - शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग
- 318धारा 318 - मॄत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना
Of Hurt
- 319धारा 319 - उपहति
- 320धारा 320 - घोर उपहति
- 321धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 322धारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 323जानबूझकर चोट पहुंचाने पर मिलने वाली सजा।
- 324धारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 325धारा 325 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्ड
- 326धारा 326 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 326Aधारा 326A - एसिड हमले
- 326Bधारा 326B - एसिड हमला करने का प्रयास
- 327धारा 327 - संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 328धारा 328 - अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा उपहति कारित करना
- 329धारा 329 - सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 330धारा 330 - संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 331धारा 331 - संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 332धारा 332 - लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 333धारा 333 - लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 334धारा 334 - प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति करना
- 335धारा 335 - प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- 336धारा 336 - कार्य जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो
- 337धारा 337 - ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
- 338धारा 338 - ऐसे कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
Of wrongful restraint and wrongful confinement
- 339गलत तरीके से रोकना।
- 340अवैध कारावास।
- 341गलत तरीके से रोकने पर दंड।
- 342धारा 342 - सदोष परिरोध के लिए दण्ड
- 343धारा 343 - तीन या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध
- 344धारा 344 - दस या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध
- 345धारा 345 - ऐसे व्यक्ति का सदोष परिरोध जिसके छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है
- 346धारा 346 - गुप्त स्थान में सदोष परिरोध
- 347धारा 347 - सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करने के लिए सदोष परिरोध
- 348धारा 348 - संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन करने के लिए सदोष परिरोध
Of Criminal Force and Assault
- 349धारा 349 - बल
- 350धारा 350 - आपराधिक बल
- 351धारा 351 - हमला
- 352धारा 352 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड
- 353लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- 354धारा 354 - स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 354Aधारा 354A - यौन उत्पीड़न
- 354Bधारा 354B - एक औरत नंगा करने के इरादे के साथ कार्य
- 354Cधारा 354C - छिप कर देखना
- 354Dधारा 354D - पीछा
- 355धारा 355 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 356किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जा रही संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- 357धारा 357 - किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- 358धारा 358 - गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
Of Kidnapping, Abduction, Slavery and Forced Labour
- 359धारा 359 - व्यपहरण
- 360धारा 360 - भारत में से व्यपहरण
- 361धारा 361 - विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण
- 362धारा 362 - अपहरण
- 363धारा 363 - व्यपहरण के लिए दण्ड
- 363Aधारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
- 364धारा 364 - हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण
- 364Aधारा 364A - फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण
- 365धारा 365 - किसी व्यक्ति का गुप्त रीति से और सदोष परिरोध करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण
- 366धारा 366 - विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना
- 366Aधारा 366A - अप्राप्तवय लड़की का उपापन
- 366Bधारा 366B - विदेश से लड़की का आयात करना
- 367धारा 367 - व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण
- 368धारा 368 - व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाना या परिरोध में रखना
- 369धारा 369 - दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
- 370मानव तस्करी।
- 370Aधारा 370A - दुर्व्यापार किए गए व्यक्ति का शोषण
- 371धारा 371 - दासों का आभ्यासिक व्यौहार करना
- 372धारा 372 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना
- 373धारा 373 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना
- 374धारा 374 - विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम
Sexual offences
- 375बलात्कार।
- 376धारा 376 - बलात्संग के लिए दण्ड
- 376Aधारा 376A - पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र
- 376ABधारा 376AB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दंड
- 376Bधारा 376B - लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग
- 376Cधारा 376C - जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग
- 376Dधारा 376D - अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग
- 376DAधारा 376DA - सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
- 376DBधारा 376DB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
- 376Eधारा 376E - पुनरावृत्ति करने वाले अपराधियों के लिए दंड
Of Unnatural offences
XVIIOf Theft · Of Extortion · Of Robbery and Dacoity · Of Criminal Misappropriation of Property · Of Criminal Breach of Trust · Of the Receiving of Stolen Property · Of Cheating · Of Fraudulent Deeds and Dispositions of Property · Of Mischief · Of Criminal Trespass§ 378–46285 धाराएँ
Of Theft
Of Extortion
- 383धारा 383 - उद्दापन
- 384धारा 384 - उद्दापन के लिए दंड
- 385धारा 385 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को क्षति के भय में डालना
- 386धारा 386 - किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन
- 387धारा 387 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालना
- 388धारा 388 - मॄत्यु या आजीवन कारावास, आदि से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने की धमकी देकर उद्दापन
- 389धारा 389 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का अभियोग लगाने के भय में डालना
Of Robbery and Dacoity
- 390धारा 390 - लूट
- 391धारा 391 - डकैती
- 392धारा 392 - लूट के लिए दण्ड
- 393धारा 393 - लूट करने का प्रयत्न
- 394धारा 394 - लूट करने में स्वेच्छया उपहति कारित करना
- 395डकैती के लिए सजा।
- 396हत्या सहित डकैती।
- 397धारा 397 - मॄत्यु या घोर उपहति कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती
- 398धारा 398 - घातक आयुध से सज्जित होकर लूट या डकैती करने का प्रयत्न
- 399धारा 399 - डकैती करने के लिए तैयारी करना
- 400धारा 400 - डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड
- 401धारा 401 - चोरों की टोली का होने के लिए दण्ड
- 402धारा 402 - डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना
Of Criminal Misappropriation of Property
Of Criminal Breach of Trust
Of the Receiving of Stolen Property
Of Cheating
- 415धारा 415 - छल
- 416धारा 416 - प्रतिरूपण द्वारा छल
- 417धारा 417 - छल के लिए दंड
- 418धारा 418 - इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध है
- 419धारा 419 - प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दंड
- 420धारा 420 - छल करना और संपत्ति परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करना
Of Fraudulent Deeds and Dispositions of Property
- 421धारा 421 - लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना
- 422धारा 422 - त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
- 423धारा 423 - अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन
- 424धारा 424 - सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना
Of Mischief
- 425धारा 425 - रिष्टि
- 426धारा 426 - रिष्टि के लिए दण्ड
- 427धारा 427 - रिष्टि जिससे पचास रुपए का नुकसान होता है
- 428धारा 428 - दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
- 429धारा 429 - किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
- 430धारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
- 431धारा 431 - लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि
- 432धारा 432 - लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि
- 433धारा 433 - किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि
- 434धारा 434 - लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि
- 435धारा 435 - सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
- 436धारा 436 - गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि
- 437धारा 437 - तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि
- 438धारा 438 - धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिए दंड
- 439धारा 439 - चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दंड
- 440धारा 440 - मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि
Of Criminal Trespass
- 441धारा 441 - आपराधिक अतिचार
- 442धारा 442 - गॄह-अतिचार
- 443धारा 443 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
- 444धारा 444 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
- 445धारा 445 - गॄह-भेदन
- 446धारा 446 - रात्रौ गॄह-भेदन
- 447धारा 447 - आपराधिक अतिचार के लिए दंड
- 448धारा 448 - गॄह-अतिचार के लिए दंड
- 449धारा 449 - मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार
- 450धारा 450 - अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
- 451धारा 451 - कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
- 452धारा 452 - उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गॄह-अतिचार
- 453धारा 453 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड
- 454धारा 454 - कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
- 455धारा 455 - उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
- 456धारा 456 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन के लिए दंड
- 457धारा 457 - कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन
- 458धारा 458 - उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
- 459धारा 459 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो
- 460धारा 460 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो
- 461धारा 461 - ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना
- 462धारा 462 - उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है
XVIIIOf Offences Relating to Documents and to Property Marks§ 463–489E33 धाराएँ
- 463धारा 463 - कूटरचना
- 464जाली दस्तावेज बनाना।
- 465धारा 465 - कूटरचना के लिए दण्ड
- 466धारा 466 - न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
- 467धारा 467 - मूल्यवान प्रतिभूति, विल, इत्यादि की कूटरचना
- 468धारा 468 - छल के प्रयोजन से कूटरचना
- 469धारा 469 - ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न
- 470धारा 470 - कूटरचित दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेखट
- 471धारा 471 - कूटरचित दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग में लाना
- 472धारा 472 - धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना
- 473धारा 473 - अन्यथा दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना
- 474धारा 474 - धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना
- 475धारा 475 - धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना
- 476धारा 476 - धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना
- 477धारा 477 - विल, दत्तकग्रहण प्राधिकार-पत्र या मूल्यवान प्रतिभूति को कपटपूर्वक रदद्, नष्ट, आदि करना
- 477Aधारा 477A - लेखा का मिथ्याकरण
- 478धारा 478 - व्यापार चिह्न
- 479धारा 479 - सम्पत्ति-चिह्न
- 480धारा 480 - मिथ्या व्यापार चिह्न का प्रयोग किया जाना
- 481धारा 481 - मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना
- 482धारा 482 - मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग करने के लिए दण्ड
- 483धारा 483 - अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का कूटकरण
- 484धारा 484 - लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए चिह्न का कूटकरण
- 485धारा 485 - सम्पत्ति-चिह्न के कूटकरण के लिए कोई उपकरण बनाना या उस पर कब्जा
- 486धारा 486 - कूटकॄत सम्पत्ति-चिह्न से चिन्हित माल का विक्रय
- 487धारा 487 - किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है
- 488धारा 488 - किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड
- 489धारा 489 - क्षति कारित करने के आशय से सम्पत्ति-चिह्न को बिगाड़ना
- 489Aधारा 489A - करेन्सी नोटों या बैंक नोटों का कूटकरण
- 489Bधारा 489B - कूटरचित या कूटकॄत करेंसी नोटों या बैंक नोटों को असली के रूप में उपयोग में लाना
- 489Cधारा 489C - कूटरचित या कूटकॄत करेन्सी नोटों या बैंक नोटों को कब्जे में रखना
- 489Dधारा 489D - करेन्सी नोटों या बैंक नोटों की कूटरचना या कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री बनाना या कब्जे में रखना
- 489Eधारा 489E - करेन्सी नोटों या बैंक नोटों से सदृश दस्तावेजों की रचना या उपयोग
XIXOf the Criminal Breach of Contracts of Service§ 490–4923 धाराएँ2 निरस्त
XXOf Offences Relatingto Marriage§ 493–4986 धाराएँ
- 493किसी पुरुष द्वारा धोखे से वैध विवाह का विश्वास दिलाकर सहवास करना।
- 494पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दोबारा शादी करना।
- 495धारा 495 - वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर जिसके साथ पश्चात्वर्ती विवाह किया जाता है
- 496धारा 496 - विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना
- 497व्यभिचार।
- 498किसी विवाहित महिला को आपराधिक इरादे से बहला-फुसलाकर ले जाना या हिरासत में लेना।
XXAOf Cruelty by Husband or Relatives of Husband§ 498A1 धाराएँ
XXIIOr Criminal Intimidation, Insultand Annoyance§ 503–5108 धाराएँ
- 503धारा 503 - आपराधिक अभित्रास
- 504जानबूझकर अपमान करना और शांति भंग करने के इरादे से ऐसा करना।
- 505धारा 505 - लोक रिष्टिकारक वक्तव्य
- 506धारा 506 - आपराधिक अभित्रास के लिए दण्ड
- 507धारा 507 - अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास
- 508धारा 508 - व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा कराया गया कार्य
- 509धारा 509 - शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है
- 510धारा 510 - मत्त व्यक्ति द्वारा लोक स्थान में अवचार
XXIIIOf Attempts of Commit Offences§ 5111 धाराएँ
इसकी जगह BNS
1 जुलाई 2024 से BNS ने IPC की जगह ली।
- IPC 302BNS 103
- IPC 307BNS 109
- IPC 376BNS 64
- IPC 420BNS 318(4)
- IPC 498ABNS 85
