धारा 100 · धारा 100 - शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है
शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, पूर्वतित अंतिम धारा में वर्णित निर्बन्धनो के अधीन रहते हुए, हमलावर की स्वेच्छाया मृत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक है, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात : -
पहला - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम मृत्यु होगा ।
दूसरा - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम घोर उपहति होगा ;
तीसरा - बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला ;
चौथा - प्रकृति-विरुद्ध काम-तॄषणा की तृप्ति के आशय से किया गया हमला ;
पांचवां - व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला ;
छठा - इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाए, जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकार्यो की सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगा ।
शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, पूर्वतित अंतिम धारा में वर्णित निर्बन्धनो के अधीन रहते हुए, हमलावर की स्वेच्छाया मृत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक है, यदि वह अपराध, जिसके कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, एतस्मिनपश्चात प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात : -
पहला - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम मृत्यु होगा ।
दूसरा - ऐसा हमला जिससे युक्तियुक्त रूप से आशंका कारित हो कि अन्यथा ऐसे हमले का परिणाम घोर उपहति होगा ;
तीसरा - बलात्संग करने के आशय से किया गया हमला ;
चौथा - प्रकृति-विरुद्ध काम-तॄषणा की तृप्ति के आशय से किया गया हमला ;
पांचवां - व्यपहरण या अपहरण करने के आशय से किया गया हमला ;
छठा - इस आशय से किया गया हमला कि किसी व्यक्ति का ऐसी परिस्थितियों में सदोष परिरोध किया जाए, जिनसे उसे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि वह अपने को छुड़वाने के लिए लोक प्राधिकार्यो की सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगा ।
नए कानून में
IPC 100BNS 38
38. When right of private defence of body extends to causing death.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
इस धारा में हुए बदलाव
कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।
- 2013जोड़ा गयाप्रभावी तिथि:
किस उपबंध से: Act 13 of 2013
With effect from 3-2-2013.
अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।
