IPC 313अध्याय XVI · Of the causing of Miscarriage, of Injuries to unborn Children, of the Exposure of Infants, and of the concealment of Birthsअब BNS 89
धारा 313 · धारा 313 - स्त्री की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
स्त्री की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना
जो कोई उस स्त्री की सम्मति के बिना, चाहे वह स्त्री स्पन्दनगर्भा हो या नहीं, पूर्ववर्ती अन्तिम धारा में परिभाषित अपराध करेगा, वह 2[आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
जो कोई उस स्त्री की सम्मति के बिना, चाहे वह स्त्री स्पन्दनगर्भा हो या नहीं, पूर्ववर्ती अन्तिम धारा में परिभाषित अपराध करेगा, वह 2[आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
नए कानून में
IPC 313BNS 89
89. Causing miscarriage without woman’s consent.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
इस धारा में हुए बदलाव
कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।
- 1955प्रतिस्थापितप्रभावी तिथि:
किस उपबंध से: Act 26 of 1955, sec. 117 and Sch
With effect from 1-1-1956.
पहले यह पाठ था
transportation for life
अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।
