धारा 133 · धारा 133 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद-निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद-निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण
जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह अपने पद के निष्पादन में हो, हमला किया जाना दुष्प्रेरित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह अपने पद के निष्पादन में हो, हमला किया जाना दुष्प्रेरित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 3 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
नए कानून में
IPC 133BNS 161
161. Abetment of assault by soldier, sailor or airman on his superior officer, when in execution of his office.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
इस धारा में हुए बदलाव
कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।
- 1927प्रतिस्थापित
किस उपबंध से: Act 10 of 1927
पहले यह पाठ था
or sailor
- 1950प्रतिस्थापित
किस उपबंध से: the A. O. 1950
पहले यह पाठ था
Queen
अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।
