IPC 377अध्याय XVI · Of Unnatural offencesअब BNS DELETED

धारा 377 · धारा 377 - प्रकॄति विरुद्ध अपराध

यह धारा सीमित कर दी गई है

नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018) में उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को सीमित किया, रद्द नहीं। दो वयस्कों के बीच सहमति से बने संबंध अब इस धारा के अधीन अपराध नहीं हैं। धारा अब भी लागू होती है जहाँ सहमति न हो, तथा नाबालिग या पशु से जुड़े कृत्यों पर।

अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से

अपराध एक नज़र में

अधिकतम दंड
आजीवन कारावास
जुर्माना
जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
संज्ञेय
संज्ञेय
जमानतीय
अजमानतीय
समझौता योग्य
समझौता योग्य नहीं
विचारण न्यायालय
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
  • संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
  • अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है

प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से

नए कानून में

IPC 377BNS DELETED

DELETED

दोनों पाठों की तुलना करें →

इस धारा पर आपका निजी नोट

यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

इस धारा में हुए बदलाव

कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।

  1. 1955प्रतिस्थापितप्रभावी तिथि:

    किस उपबंध से: Act 26 of 1955

    With effect from 1-1-1956.

    पहले यह पाठ था

    transportation for life

अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।