धारा 498A · किसी महिला के साथ क्रूरता करने वाले उसके पति या पति के रिश्तेदार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1. जो कोई भी किसी स्त्री का पति या पति का रिश्तेदार होकर उस स्त्री पर क्रूरता करता है, उसे तीन वर्ष तक के कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
स्पष्टीकरण. —इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "क्रूरता का अर्थ है"—
(क) कोई भी जानबूझकर किया गया ऐसा आचरण जो इस प्रकार का हो कि वह महिला को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करे या महिला के जीवन, अंग या स्वास्थ्य (मानसिक या शारीरिक) को गंभीर चोट या खतरा पहुंचाए; या
(ख) महिला का उत्पीड़न, यदि ऐसा उत्पीड़न उसे या उसके किसी रिश्तेदार को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी गैरकानूनी मांग को पूरा करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से किया जाता है, या उसके द्वारा या उसके किसी रिश्तेदार द्वारा ऐसी मांग को पूरा करने में विफलता के कारण किया जाता है।]
स्पष्टीकरण. —इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "क्रूरता का अर्थ है"—
(क) कोई भी जानबूझकर किया गया ऐसा आचरण जो इस प्रकार का हो कि वह महिला को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करे या महिला के जीवन, अंग या स्वास्थ्य (मानसिक या शारीरिक) को गंभीर चोट या खतरा पहुंचाए; या
(ख) महिला का उत्पीड़न, यदि ऐसा उत्पीड़न उसे या उसके किसी रिश्तेदार को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी गैरकानूनी मांग को पूरा करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से किया जाता है, या उसके द्वारा या उसके किसी रिश्तेदार द्वारा ऐसी मांग को पूरा करने में विफलता के कारण किया जाता है।]
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 3 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता; IPC अपराधों के लिए दंड प्रक्रिया संहिता) से
नए कानून में
IPC 498ABNS 85
85. Husband or relative of husband of a woman subjecting her to cruelty.
दोनों पाठों की तुलना करें →इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
इस धारा में हुए बदलाव
कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।
- 1983जोड़ा गया
किस उपबंध से: Act 46 of 1983
अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।
