IPC 195अध्याय XI · Of False Evidence and Offences Against Public Justiceअब BNS 231

धारा 195 · धारा 195 - आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना

अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से

अपराध एक नज़र में

अधिकतम दंड
आजीवन कारावास
जुर्माना
जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
संज्ञेय
संज्ञेय
जमानतीय
अजमानतीय
समझौता योग्य
समझौता योग्य नहीं
विचारण न्यायालय
सत्र न्यायालय
  • संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
  • अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है

इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।

प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं

नए कानून में

IPC 195BNS 231

231. Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of offence punishable with imprisonment for life or imprisonment.

दोनों पाठों की तुलना करें →

इस धारा पर आपका निजी नोट

यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।

इस धारा में हुए बदलाव

कौन-सा कानून लागू होगा, यह अपराध की तारीख से तय होता है — इसलिए यह समयरेखा मायने रखती है।

  1. 1955प्रतिस्थापितप्रभावी तिथि:

    किस उपबंध से: Act 26 of 1955

    With effect from 1-1-1956.

    पहले यह पाठ था

    transportation for life

  2. 1956प्रभावी तिथि:

    Substituted (1956)

    By s. 117 and the Sch., ibid ., for “such transportation” (w.e.f. 1-1-1956). With effect from 1-1-1956. The amending act is cited as "ibid." in the source and is not recoverable from this section alone.

    पहले यह पाठ था

    such transportation

  3. 2006जोड़ा गयाप्रभावी तिथि:

    किस उपबंध से: Act 2 of 2006

    With effect from 16-4-2006.

अपराध की तारीख पर जो पाठ लागू था, वही लागू होगा — बाद का संशोधन पिछले अपराध पर लागू नहीं होता।