धारा 86 · धारा 86 - किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्ता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है
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किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्ता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है
उन दशाओं में, जहां कि कोई किया गया कार्य अपराध नहीं होता जब तक कि वह किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से न किया गया हो, कोई व्यक्ति, जो वह कार्य मत्ता की हालत में करता है, इस प्रकार बरते जाने के दायित्व के अधीन होगा मानो उसे वही ज्ञान था जो उसे होता यदि वह मत्ता में न होता जब तक कि वह चीज, जिससे उसे मत्ता हुई थी, उसे उसके ज्ञान के बिना या उसकी इच्छा के विरुद्ध न दी गई हो ।
उन दशाओं में, जहां कि कोई किया गया कार्य अपराध नहीं होता जब तक कि वह किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से न किया गया हो, कोई व्यक्ति, जो वह कार्य मत्ता की हालत में करता है, इस प्रकार बरते जाने के दायित्व के अधीन होगा मानो उसे वही ज्ञान था जो उसे होता यदि वह मत्ता में न होता जब तक कि वह चीज, जिससे उसे मत्ता हुई थी, उसे उसके ज्ञान के बिना या उसकी इच्छा के विरुद्ध न दी गई हो ।
नए कानून में
IPC 86BNS 24
24. Offence requiring a particular intent or knowledge committed by one who is intoxicated.
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