धारा 30 · धारा 30 - “मूल्यवान प्रतिभूति”
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“मूल्यवान प्रतिभूति”
“मूल्यवान प्रतिभूति” शब्द उस दस्तावेज के द्योतक हैं, जो ऐसी दस्तावेज है, या होनी तात्पर्यित है, जिसके द्वारा कोई विधिक अधिकार सॄजित, विस्तॄत, अन्तरित, निर्बन्धित, निर्वापित किया जाए, छोड़ा जाए या जिसके द्वारा कोई व्यक्ति यह अभिस्वीकार करता है कि वह विधिक दायित्व के अधीन है, या अमुक विधिक अधिकार नहीं रखता है ।
दृष्टांत :
क - एक विनिमयपत्र की पीठ पर अपना नाम लिख देता है । इस पॄष्ठांकन का प्रभाव किसी व्यक्ति को, जो उसका विधिपूर्ण धारक हो जाए, उस विनिमयपत्र पर का अधिकार अन्तरित किया जाता है, इसलिए यह पॄष्ठांकन “मूल्यवान प्रतिभूति” है ।
“मूल्यवान प्रतिभूति” शब्द उस दस्तावेज के द्योतक हैं, जो ऐसी दस्तावेज है, या होनी तात्पर्यित है, जिसके द्वारा कोई विधिक अधिकार सॄजित, विस्तॄत, अन्तरित, निर्बन्धित, निर्वापित किया जाए, छोड़ा जाए या जिसके द्वारा कोई व्यक्ति यह अभिस्वीकार करता है कि वह विधिक दायित्व के अधीन है, या अमुक विधिक अधिकार नहीं रखता है ।
दृष्टांत :
क - एक विनिमयपत्र की पीठ पर अपना नाम लिख देता है । इस पॄष्ठांकन का प्रभाव किसी व्यक्ति को, जो उसका विधिपूर्ण धारक हो जाए, उस विनिमयपत्र पर का अधिकार अन्तरित किया जाता है, इसलिए यह पॄष्ठांकन “मूल्यवान प्रतिभूति” है ।
नए कानून में
IPC 30BNS 2(31)
2(31)
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