धारा 443 · धारा 443 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
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प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
जो कोई यह पूर्वावधानी बरतने के पश्चात् गॄह-अतिचार करता है कि ऐसे गॄह-अतिचार को किसी ऐसे व्यक्ति से छिपाया जाए जिसे उस निर्माण, तम्बू या जलयान में से, जो अतिचार का विषय है, अतिचारी को अपवर्जित करने या बाहर कर देने का अधिकार है, वह “प्रच्छन्न गॄह-अतिचार” करता है, यह कहा जाता है ।
जो कोई यह पूर्वावधानी बरतने के पश्चात् गॄह-अतिचार करता है कि ऐसे गॄह-अतिचार को किसी ऐसे व्यक्ति से छिपाया जाए जिसे उस निर्माण, तम्बू या जलयान में से, जो अतिचार का विषय है, अतिचारी को अपवर्जित करने या बाहर कर देने का अधिकार है, वह “प्रच्छन्न गॄह-अतिचार” करता है, यह कहा जाता है ।
नए कानून में
IPC 443BNS 330(1)
330(1)
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