धारा 85 · धारा 85 - ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्ता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है
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ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्ता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है
कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय मत्ता के कारण उस कार्य की प्रकृति, या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, जानने में असमर्थ है, परंतु यह तब जब कि वह चीज, जिससे उसकी मत्ता हुई थी, उसके अपने ज्ञान के बिना या इच्छा के बिना या इच्छा के विरुद्ध दी गई थी ।
कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय मत्ता के कारण उस कार्य की प्रकृति, या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, जानने में असमर्थ है, परंतु यह तब जब कि वह चीज, जिससे उसकी मत्ता हुई थी, उसके अपने ज्ञान के बिना या इच्छा के बिना या इच्छा के विरुद्ध दी गई थी ।
नए कानून में
IPC 85BNS 23
23. Act of a person incapable of judgment by reason of intoxication caused against his will.
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