अनुच्छेद 200 · विधेयकों पर अनुमति
जब किसी राज्य की विधान सभा द्वारा कोई विधेयक पारित हो जाता है या, यदि किसी राज्य में विधान परिषद है, तो राज्य के विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा विधेयक पारित हो जाता है, तो उसे राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और राज्यपाल या तो विधेयक पर अपनी सहमति की घोषणा करेंगे या उस पर अपनी सहमति रोकेंगे या विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखेंगे।
बशर्ते कि राज्यपाल, विधेयक को स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किए जाने के बाद यथाशीघ्र, यदि वह धन विधेयक न हो, तो उसे एक संदेश के साथ लौटा सकते हैं, जिसमें सदन या सदनों से विधेयक या उसके किसी विशिष्ट प्रावधान पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया हो, और विशेष रूप से, अपने संदेश में अनुशंसित किसी भी संशोधन को शामिल करने की उपयुक्तता पर विचार करने का अनुरोध किया गया हो। जब विधेयक इस प्रकार लौटाया जाता है, तो सदन या सदन तदनुसार विधेयक पर पुनर्विचार करेंगे, और यदि विधेयक सदन या सदनों द्वारा संशोधन सहित या बिना संशोधन के पुनः पारित कर राज्यपाल को स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल उस पर स्वीकृति देने से इनकार नहीं करेंगे। इसके अतिरिक्त, बशर्ते कि राज्यपाल किसी ऐसे विधेयक पर स्वीकृति नहीं देंगे, बल्कि उसे राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखेंगे, जो राज्यपाल की राय में, यदि वह कानून बन जाता है, तो उच्च न्यायालय की शक्तियों को इस प्रकार कम कर देगा कि उस न्यायालय की उस स्थिति को खतरे में डाल देगा जिसके लिए इस संविधान द्वारा उसे नियुक्त किया गया है।
