अनुच्छेद 279 · “निवल आगम” आदि का परिकलन
(1) इस अध्याय के पूर्वगामी प्रावधानों में, किसी कर या शुल्क के संबंध में “शुद्ध आय” से तात्पर्य उसकी वसूली लागत घटाने के बाद प्राप्त आय से है, और उन प्रावधानों के प्रयोजनों के लिए, किसी कर या शुल्क की, या किसी कर या शुल्क के किसी भाग की, किसी क्षेत्र में या उससे संबंधित शुद्ध आय का निर्धारण एवं प्रमाणन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा किया जाएगा, जिसका प्रमाण पत्र अंतिम होगा।
(2) उपर्युक्त के अधीन रहते हुए, और इस अध्याय के किसी अन्य स्पष्ट प्रावधान के अधीन रहते हुए, संसद द्वारा निर्मित कानून या राष्ट्रपति के आदेश द्वारा, किसी भी ऐसे मामले में जहां इस भाग के अधीन किसी शुल्क या कर की आय किसी राज्य को सौंपी गई है या सौंपी जा सकती है, आय की गणना करने के तरीके, भुगतान किए जाने के समय या समय तथा भुगतान करने के तरीके, एक वित्तीय वर्ष और दूसरे वित्तीय वर्ष के बीच समायोजन करने और किसी अन्य आकस्मिक या सहायक मामलों के लिए प्रावधान किया जा सकता है।
