NDMC Act 380अध्याय XX · Magistrates and proceedings before magistrates
धारा 380 · उपद्रव संबंधी शिकायतों के संबंध में मजिस्ट्रेट द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 379 के तहत कोई शिकायत प्राप्त होने पर, मजिस्ट्रेट, ऐसी जाँच करने के बाद, जैसा वह आवश्यक समझे, लिखित आदेश द्वारा उपद्रव के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या उस भूमि या भवन के स्वामी को, जिस पर उपद्रव हुआ है, ऐसे उपाय करने का निर्देश दे सकता है, जैसा कि मजिस्ट्रेट को व्यावहारिक और उचित लगे, और ऐसे उपद्रव को कम करने, रोकने, हटाने या उसका निवारण करने के लिए आदेश में निर्दिष्ट अवधि के भीतर, और अध्यक्ष को इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए किसी उपनियम के किसी प्रावधान को लागू करने का निर्देश दे सकता है।
(2) मजिस्ट्रेट उपद्रव के लिए जिम्मेदार पाए गए व्यक्ति को शिकायतकर्ता को उक्त शिकायत से संबंधित उचित लागतों का भुगतान करने का निर्देश दे सकता है, जिसमें शिकायतकर्ता को ऐसी शिकायत की पैरवी करने में हुए समय की हानि के लिए मुआवजा भी शामिल है।
(3) जहाँ मजिस्ट्रेट की राय में उपद्रव को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो, तो वह उपधारा (1) के अनुसार आवश्यक जाँच से छूट दे सकता है और ऐसा आदेश दे सकता है जिसे वह तुरंत आवश्यक समझे।
(4) यदि उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत आदेश द्वारा कार्रवाई करने के लिए निर्देशित व्यक्ति आदेश में निर्दिष्ट अवधि के भीतर ऐसा करने में विफल रहता है, तो अध्यक्ष उक्त अवधि की समाप्ति पर आदेश में निर्देशित अनुसार कार्रवाई कर सकता है या उपद्रव को कम करने, रोकने, दूर करने या उसका निवारण करने के लिए ऐसे अन्य उपाय कर सकता है जिन्हें वह आवश्यक समझता है, और इस संबंध में किए गए सभी व्यय उस व्यक्ति से वसूल किए जा सकते हैं जिसके विरुद्ध मजिस्ट्रेट ने इस अधिनियम के तहत कर के बकाया के रूप में आदेश दिया है।
(2) मजिस्ट्रेट उपद्रव के लिए जिम्मेदार पाए गए व्यक्ति को शिकायतकर्ता को उक्त शिकायत से संबंधित उचित लागतों का भुगतान करने का निर्देश दे सकता है, जिसमें शिकायतकर्ता को ऐसी शिकायत की पैरवी करने में हुए समय की हानि के लिए मुआवजा भी शामिल है।
(3) जहाँ मजिस्ट्रेट की राय में उपद्रव को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो, तो वह उपधारा (1) के अनुसार आवश्यक जाँच से छूट दे सकता है और ऐसा आदेश दे सकता है जिसे वह तुरंत आवश्यक समझे।
(4) यदि उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत आदेश द्वारा कार्रवाई करने के लिए निर्देशित व्यक्ति आदेश में निर्दिष्ट अवधि के भीतर ऐसा करने में विफल रहता है, तो अध्यक्ष उक्त अवधि की समाप्ति पर आदेश में निर्देशित अनुसार कार्रवाई कर सकता है या उपद्रव को कम करने, रोकने, दूर करने या उसका निवारण करने के लिए ऐसे अन्य उपाय कर सकता है जिन्हें वह आवश्यक समझता है, और इस संबंध में किए गए सभी व्यय उस व्यक्ति से वसूल किए जा सकते हैं जिसके विरुद्ध मजिस्ट्रेट ने इस अधिनियम के तहत कर के बकाया के रूप में आदेश दिया है।
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