NDMC Act 364अध्याय XX · Obstruction of owner by occupier
धारा 364 · कब्जेदार द्वारा बाधा उत्पन्न होने की स्थिति में मालिक को जिला न्यायाधीश के न्यायालय में आवेदन करने का अधिकार है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी भूमि या भवन का स्वामी उस पर कब्जा करने वाले व्यक्ति द्वारा अनुपालन करने से रोका जाता है, तो वह—
(क) धारा 221, धारा 229, धारा 247, धारा 248, धारा 249, या धारा 252, या उसके अधीन निर्मित किसी उपनियम, या ऐसे किसी प्रावधान के तहत जारी किसी नोटिस या आदेश के प्रावधान अपीलीय न्यायाधिकरण पर लागू होते हैं; और
(ख) किसी अन्य प्रावधान या उसके अंतर्गत बनाए गए किसी उपनियम या ऐसे प्रावधान के अंतर्गत जारी किसी सूचना, आदेश या मांग के संबंध में दिल्ली के जिला न्यायाधीश के न्यायालय में आवेदन किया जा सकता है, और यदि ऐसा आवेदन किसी ऐसे प्रावधान या सूचना, आदेश या मांग के अनुपालन के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाता है, तो स्वामी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रावधान, सूचना, आदेश या मांग का अनुपालन करने में अपनी विफलता के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
(2) अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय, जैसा भी मामला हो, ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर, भूमि या भवन के अधिभोगी को उक्त प्रावधान या नोटिस, आदेश या मांग का अनुपालन करने के लिए स्वामी को सभी उचित सुविधाएं प्रदान करने का लिखित आदेश दे सकता है और यदि वह उचित समझे तो यह भी निर्देश दे सकता है कि ऐसे आवेदन और आदेश की लागत अधिभोगी द्वारा वहन की जाए।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट आदेश की तिथि से आठ दिनों के बाद, अधिभोगी मालिक को उपर्युक्त प्रयोजन के लिए वे सभी उचित सुविधाएँ प्रदान करेगा जो आदेश में निर्दिष्ट की गई हों; और यदि वह ऐसा करने से लगातार इनकार करता है, तो इनकार की अवधि के दौरान मालिक किसी भी दायित्व से मुक्त हो जाएगा जो उक्त प्रावधान या सूचना, आदेश या मांग का पालन न करने के कारण उत्पन्न हुआ हो।
(क) धारा 221, धारा 229, धारा 247, धारा 248, धारा 249, या धारा 252, या उसके अधीन निर्मित किसी उपनियम, या ऐसे किसी प्रावधान के तहत जारी किसी नोटिस या आदेश के प्रावधान अपीलीय न्यायाधिकरण पर लागू होते हैं; और
(ख) किसी अन्य प्रावधान या उसके अंतर्गत बनाए गए किसी उपनियम या ऐसे प्रावधान के अंतर्गत जारी किसी सूचना, आदेश या मांग के संबंध में दिल्ली के जिला न्यायाधीश के न्यायालय में आवेदन किया जा सकता है, और यदि ऐसा आवेदन किसी ऐसे प्रावधान या सूचना, आदेश या मांग के अनुपालन के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाता है, तो स्वामी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रावधान, सूचना, आदेश या मांग का अनुपालन करने में अपनी विफलता के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
(2) अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय, जैसा भी मामला हो, ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर, भूमि या भवन के अधिभोगी को उक्त प्रावधान या नोटिस, आदेश या मांग का अनुपालन करने के लिए स्वामी को सभी उचित सुविधाएं प्रदान करने का लिखित आदेश दे सकता है और यदि वह उचित समझे तो यह भी निर्देश दे सकता है कि ऐसे आवेदन और आदेश की लागत अधिभोगी द्वारा वहन की जाए।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट आदेश की तिथि से आठ दिनों के बाद, अधिभोगी मालिक को उपर्युक्त प्रयोजन के लिए वे सभी उचित सुविधाएँ प्रदान करेगा जो आदेश में निर्दिष्ट की गई हों; और यदि वह ऐसा करने से लगातार इनकार करता है, तो इनकार की अवधि के दौरान मालिक किसी भी दायित्व से मुक्त हो जाएगा जो उक्त प्रावधान या सूचना, आदेश या मांग का पालन न करने के कारण उत्पन्न हुआ हो।
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