NDMC Act 215अध्याय XIII · Construction, maintenance and improvement of streets
धारा 215 · कुछ मामलों में इमारतों आदि के निर्माण में देरी या विस्तार के लिए मुआवजा दिया जाएगा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 210, 211 और 212 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक सड़क के लिए अधिग्रहित किसी भवन या भूमि के स्वामी को अध्यक्ष द्वारा ऐसे भवन या भूमि के अधिग्रहण के परिणामस्वरूप होने वाली किसी भी हानि और अध्यक्ष द्वारा दिए गए किसी भी आदेश के परिणामस्वरूप ऐसे स्वामी द्वारा किए गए किसी भी व्यय के लिए मुआवजा दिया जाएगा।
उसे उपलब्ध कराया--
(क) उस संपत्ति के शेष भाग के मूल्य में कोई भी वृद्धि या कमी, जिसका अधिग्रहित भवन या भूमि हिस्सा है, जो सड़क की नियमित रेखा तक वापस स्थापित करने से होने की संभावना है, ऐसे मुआवजे की राशि निर्धारित करने में ध्यान में रखी जाएगी और उसे ध्यान में रखा जाएगा;
(ख) यदि मूल्य में ऐसी कोई वृद्धि स्वामी द्वारा हुई हानि या व्यय की राशि से अधिक हो जाती है, तो अध्यक्ष उससे ऐसी अतिरिक्त राशि का आधा भाग सुधार शुल्क के रूप में वसूल कर सकता है।
(2) यदि अध्यक्ष द्वारा किसी भवन को आगे बढ़ाने के आदेश के परिणामस्वरूप ऐसे भवन के स्वामी को कोई हानि या क्षति होती है, तो अध्यक्ष द्वारा उसे ऐसी हानि या क्षति के लिए मुआवजा दिया जाएगा, जिसमें आगे बढ़ाने से होने वाली संभावित मूल्य वृद्धि को ध्यान में रखा जाएगा।
(3) यदि अतिरिक्त भूमि, जिसे उपधारा (2) के तहत किसी व्यक्ति के परिसर में भवन निर्माण हेतु शामिल किया जाएगा, परिषद की है, तो भवन निर्माण हेतु अध्यक्ष का आदेश या अनुमति उक्त भूमि के स्वामी को पर्याप्त हस्तांतरण माना जाएगा; और ऐसी अतिरिक्त भूमि के लिए स्वामी द्वारा परिषद को देय मूल्य तथा हस्तांतरण की अन्य शर्तें और नियम आदेश या अनुमति में निर्धारित किए जाएंगे।
(4) यदि अध्यक्ष द्वारा किसी भवन को अधिसूचित करने का आदेश दिए जाने पर भवन का स्वामी परिषद को देय निर्धारित मूल्य या हस्तांतरण की किसी भी शर्त या नियम से असंतुष्ट हो, तो अध्यक्ष उक्त शर्तों और नियमों की सूचना प्राप्त होने के पंद्रह दिनों के भीतर स्वामी के आवेदन पर मामले को दिल्ली के जिला न्यायाधीश के न्यायालय के निर्णय हेतु भेज देगा, जिसका निर्णय अंतिम होगा।
उसे उपलब्ध कराया--
(क) उस संपत्ति के शेष भाग के मूल्य में कोई भी वृद्धि या कमी, जिसका अधिग्रहित भवन या भूमि हिस्सा है, जो सड़क की नियमित रेखा तक वापस स्थापित करने से होने की संभावना है, ऐसे मुआवजे की राशि निर्धारित करने में ध्यान में रखी जाएगी और उसे ध्यान में रखा जाएगा;
(ख) यदि मूल्य में ऐसी कोई वृद्धि स्वामी द्वारा हुई हानि या व्यय की राशि से अधिक हो जाती है, तो अध्यक्ष उससे ऐसी अतिरिक्त राशि का आधा भाग सुधार शुल्क के रूप में वसूल कर सकता है।
(2) यदि अध्यक्ष द्वारा किसी भवन को आगे बढ़ाने के आदेश के परिणामस्वरूप ऐसे भवन के स्वामी को कोई हानि या क्षति होती है, तो अध्यक्ष द्वारा उसे ऐसी हानि या क्षति के लिए मुआवजा दिया जाएगा, जिसमें आगे बढ़ाने से होने वाली संभावित मूल्य वृद्धि को ध्यान में रखा जाएगा।
(3) यदि अतिरिक्त भूमि, जिसे उपधारा (2) के तहत किसी व्यक्ति के परिसर में भवन निर्माण हेतु शामिल किया जाएगा, परिषद की है, तो भवन निर्माण हेतु अध्यक्ष का आदेश या अनुमति उक्त भूमि के स्वामी को पर्याप्त हस्तांतरण माना जाएगा; और ऐसी अतिरिक्त भूमि के लिए स्वामी द्वारा परिषद को देय मूल्य तथा हस्तांतरण की अन्य शर्तें और नियम आदेश या अनुमति में निर्धारित किए जाएंगे।
(4) यदि अध्यक्ष द्वारा किसी भवन को अधिसूचित करने का आदेश दिए जाने पर भवन का स्वामी परिषद को देय निर्धारित मूल्य या हस्तांतरण की किसी भी शर्त या नियम से असंतुष्ट हो, तो अध्यक्ष उक्त शर्तों और नियमों की सूचना प्राप्त होने के पंद्रह दिनों के भीतर स्वामी के आवेदन पर मामले को दिल्ली के जिला न्यायाधीश के न्यायालय के निर्णय हेतु भेज देगा, जिसका निर्णय अंतिम होगा।
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