NDMC Act 28अध्याय V · Transaction of business by the Council
धारा 28 · परिषद और उसकी समितियों आदि की बैठकों में भाग लेने का अधिकार और सदस्यों को नई दिल्ली की नगरपालिका सरकार से संबंधित प्रश्न पूछने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) अध्यक्ष द्वारा इस संबंध में अधिकृत कोई भी नगरपालिका अधिकारी परिषद या उसकी किसी भी समिति की बैठक में उपस्थित हो सकता है, बोल सकता है या अन्यथा कार्यवाही में भाग ले सकता है, लेकिन इस उपधारा के आधार पर इसमें निर्दिष्ट कोई भी व्यक्ति ऐसी किसी भी बैठक में मतदान करने का हकदार नहीं होगा।
(2) कोई सदस्य, उपधारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, परिषद की किसी बैठक में अध्यक्ष से नई दिल्ली की नगर पालिका सरकार या इस अधिनियम के प्रशासन से संबंधित किसी भी मामले पर प्रश्न पूछ सकता है।
(3) प्रश्न पूछने का अधिकार निम्नलिखित शर्तों द्वारा नियंत्रित होगा, अर्थात्:--
(क) प्रश्न को स्पष्ट रूप से बताते हुए सचिव को लिखित में कम से कम सात स्पष्ट दिनों का नोटिस दिया जाएगा;
(ख) कोई प्रश्न नहीं पूछा जाएगा--
(i) प्रश्न को समझने योग्य बनाने के लिए आवश्यक न होने पर भी कोई नाम या कथन प्रस्तुत करना,
(ii) जिनमें तर्क, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्तियाँ, आरोप, अपशब्द या मानहानिकारक कथन शामिल हों,
(iii) राय की अभिव्यक्ति या किसी काल्पनिक प्रस्ताव के समाधान के लिए पूछना,
(iv) किसी व्यक्ति के चरित्र या आचरण के बारे में उसके आधिकारिक या सार्वजनिक पद के अलावा किसी अन्य पद पर पूछताछ करना।
(v) ऐसे मामले से संबंधित हो जो मुख्य रूप से परिषद के कार्यक्षेत्र में नहीं आता हो।
(vi) व्यक्तिगत प्रकृति का आरोप लगाना या उसका संकेत देना,
(vii) नीतिगत प्रश्न उठाना जो इतने बड़े हों कि किसी प्रश्न के उत्तर की सीमाओं के भीतर उनका समाधान न किया जा सके।
(viii) उन प्रश्नों को सार रूप में दोहराना जिनका उत्तर पहले ही दिया जा चुका है या जिनका उत्तर देने से इनकार किया जा चुका है,
(ix) तुच्छ मामलों पर जानकारी मांगना,
(x) सामान्यतः अतीत के इतिहास से संबंधित मामलों पर जानकारी मांगना,
(xi) सुलभ दस्तावेजों या सामान्य संदर्भ ग्रंथों में दी गई जानकारी मांगना,
(xii) उन निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण में आने वाले मामलों को उठाना जो प्राथमिक रूप से परिषद के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं,
(xiii) किसी ऐसे मामले पर कोई जानकारी मांगना जो किसी न्यायालय द्वारा विचाराधीन हो।
(4) अध्यक्ष किसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं होगा यदि वह प्रश्न ऐसी जानकारी मांगता है जो उसे गोपनीय रूप से दी गई हो या यदि अध्यक्ष की राय में सार्वजनिक हित या परिषद के हित के प्रतिकूल उत्तर देना संभव न हो।
(5) परिषद अपनी बैठकों में कामकाज के संचालन के लिए नियम बना सकती है:
बशर्ते कि धारा 4 के तहत परिषद के गठन के बाद पहली बैठक का समय, स्थान और प्रक्रिया प्रशासक द्वारा निर्धारित की जाएगी।
(2) कोई सदस्य, उपधारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, परिषद की किसी बैठक में अध्यक्ष से नई दिल्ली की नगर पालिका सरकार या इस अधिनियम के प्रशासन से संबंधित किसी भी मामले पर प्रश्न पूछ सकता है।
(3) प्रश्न पूछने का अधिकार निम्नलिखित शर्तों द्वारा नियंत्रित होगा, अर्थात्:--
(क) प्रश्न को स्पष्ट रूप से बताते हुए सचिव को लिखित में कम से कम सात स्पष्ट दिनों का नोटिस दिया जाएगा;
(ख) कोई प्रश्न नहीं पूछा जाएगा--
(i) प्रश्न को समझने योग्य बनाने के लिए आवश्यक न होने पर भी कोई नाम या कथन प्रस्तुत करना,
(ii) जिनमें तर्क, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्तियाँ, आरोप, अपशब्द या मानहानिकारक कथन शामिल हों,
(iii) राय की अभिव्यक्ति या किसी काल्पनिक प्रस्ताव के समाधान के लिए पूछना,
(iv) किसी व्यक्ति के चरित्र या आचरण के बारे में उसके आधिकारिक या सार्वजनिक पद के अलावा किसी अन्य पद पर पूछताछ करना।
(v) ऐसे मामले से संबंधित हो जो मुख्य रूप से परिषद के कार्यक्षेत्र में नहीं आता हो।
(vi) व्यक्तिगत प्रकृति का आरोप लगाना या उसका संकेत देना,
(vii) नीतिगत प्रश्न उठाना जो इतने बड़े हों कि किसी प्रश्न के उत्तर की सीमाओं के भीतर उनका समाधान न किया जा सके।
(viii) उन प्रश्नों को सार रूप में दोहराना जिनका उत्तर पहले ही दिया जा चुका है या जिनका उत्तर देने से इनकार किया जा चुका है,
(ix) तुच्छ मामलों पर जानकारी मांगना,
(x) सामान्यतः अतीत के इतिहास से संबंधित मामलों पर जानकारी मांगना,
(xi) सुलभ दस्तावेजों या सामान्य संदर्भ ग्रंथों में दी गई जानकारी मांगना,
(xii) उन निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण में आने वाले मामलों को उठाना जो प्राथमिक रूप से परिषद के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं,
(xiii) किसी ऐसे मामले पर कोई जानकारी मांगना जो किसी न्यायालय द्वारा विचाराधीन हो।
(4) अध्यक्ष किसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं होगा यदि वह प्रश्न ऐसी जानकारी मांगता है जो उसे गोपनीय रूप से दी गई हो या यदि अध्यक्ष की राय में सार्वजनिक हित या परिषद के हित के प्रतिकूल उत्तर देना संभव न हो।
(5) परिषद अपनी बैठकों में कामकाज के संचालन के लिए नियम बना सकती है:
बशर्ते कि धारा 4 के तहत परिषद के गठन के बाद पहली बैठक का समय, स्थान और प्रक्रिया प्रशासक द्वारा निर्धारित की जाएगी।
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