NDMC Act 247अध्याय XIV · Building Regulations
धारा 247 · कुछ मामलों में भवनों या कार्यों को ध्वस्त करने और रोकने का आदेश और अपील करने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ किसी भवन का निर्माण या किसी कार्य का निष्पादन धारा 241 में निर्दिष्ट स्वीकृति के बिना या उसके विपरीत, या ऐसी स्वीकृति प्रदान करने की किसी शर्त के उल्लंघन में, या इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए उपनियमों के किसी प्रावधान के उल्लंघन में प्रारंभ किया गया हो, या किया जा रहा हो, या पूरा किया गया हो, तो अध्यक्ष, इस अधिनियम के अंतर्गत की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई के अतिरिक्त, यह आदेश दे सकता है कि जिस व्यक्ति के कहने पर निर्माण या कार्य प्रारंभ किया गया हो, या किया जा रहा हो, या पूरा किया गया हो, वह उस निर्माण या कार्य को ऐसी अवधि के भीतर (विध्वंस आदेश की एक प्रति, जिसमें कारणों का संक्षिप्त विवरण हो, उस व्यक्ति को सौंपे जाने की तिथि से पाँच दिन से कम और पंद्रह दिन से अधिक नहीं) ध्वस्त कर दे, जैसा कि विध्वंस आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है:
बशर्ते कि विध्वंस का कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि संबंधित व्यक्ति को अध्यक्ष द्वारा उचित समझे जाने वाले तरीके से नोटिस भेजकर यह बताने का उचित अवसर न दिया गया हो कि ऐसा आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए:
इसके अलावा, यदि निर्माण या कार्य पूरा नहीं हुआ है, तो अध्यक्ष उसी आदेश द्वारा या अलग आदेश द्वारा, चाहे प्रथम परंतुक के तहत नोटिस जारी करने के समय या किसी अन्य समय पर, संबंधित व्यक्ति को निर्माण या कार्य रोकने का निर्देश दे सकता है, जब तक कि विध्वंस के आदेश के विरुद्ध अपील की अवधि समाप्त न हो जाए, यदि ऐसा आदेश दिया गया हो, तो उपधारा (2) के तहत अपील की जा सकती है।
(2) उपधारा (1) के अधीन अध्यक्ष द्वारा दिए गए किसी आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति उस आदेश के विरुद्ध अपील न्यायाधिकरण में उस अवधि के भीतर अपील कर सकता है, जो आदेश में संबंधित निर्माण या कार्य को ध्वस्त करने के लिए निर्दिष्ट है।
(3) जहां विध्वंस के आदेश के विरुद्ध उपधारा (2) के अंतर्गत अपील की जाती है, वहां अपीलीय न्यायाधिकरण, धारा 255 की उपधारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उस आदेश के प्रवर्तन को ऐसी शर्तों पर, यदि कोई हो, और ऐसी अवधि के लिए स्थगित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे:
बशर्ते कि यदि विध्वंस का आदेश जारी होने के समय किसी भवन का निर्माण या किसी कार्य का निष्पादन पूरा नहीं हुआ है, तो अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा विध्वंस के आदेश के प्रवर्तन पर रोक लगाने का कोई आदेश तब तक जारी नहीं किया जाएगा, जब तक कि उक्त न्यायाधिकरण की राय में अपीलकर्ता द्वारा अपील के निपटारे तक ऐसे निर्माण या कार्य को आगे न बढ़ाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान न की गई हो।
(4) कोई भी न्यायालय अध्यक्ष को इस धारा के प्रावधानों के अनुसरण में कोई भी कार्रवाई करने या कोई आदेश देने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा या अन्य राहत हेतु कोई भी मुकदमा, आवेदन या आदेश कार्यवाही पर विचार नहीं करेगा।
(5) धारा 256 के तहत अपील पर प्रशासक द्वारा दिए गए आदेश के अधीन, इस धारा के तहत अपील पर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश के अधीन, और प्रशासक और अपीलीय न्यायाधिकरण के अपील पर दिए गए आदेशों के अधीन, अध्यक्ष द्वारा दिया गया विध्वंस आदेश अंतिम और निर्णायक होगा।
(6) जहां अध्यक्ष द्वारा उपधारा (1) के तहत दिए गए विध्वंस आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं की गई है, या जहां अध्यक्ष द्वारा उस उपधारा के तहत दिए गए विध्वंस आदेश की अपील पर, अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा, परिवर्तन सहित या बिना परिवर्तन के, पुष्टि की गई है, और यदि अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील की गई है, तो प्रशासक द्वारा पुष्टि की गई है, तो जिस व्यक्ति के विरुद्ध आदेश दिया गया है, वह उसमें निर्दिष्ट अवधि के भीतर, या जैसा भी मामला हो, अपीलीय न्यायाधिकरण या प्रशासक द्वारा अपील पर निर्धारित अवधि के भीतर, आदेश का पालन करेगा। यदि वह व्यक्ति ऐसी अवधि के भीतर आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो अध्यक्ष स्वयं उस निर्माण या कार्य को ध्वस्त करवा सकता है जिससे आदेश संबंधित है, और ऐसे विध्वंस का व्यय इस अधिनियम के तहत कर के बकाया के रूप में उस व्यक्ति से वसूल किया जाएगा।
बशर्ते कि विध्वंस का कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि संबंधित व्यक्ति को अध्यक्ष द्वारा उचित समझे जाने वाले तरीके से नोटिस भेजकर यह बताने का उचित अवसर न दिया गया हो कि ऐसा आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए:
इसके अलावा, यदि निर्माण या कार्य पूरा नहीं हुआ है, तो अध्यक्ष उसी आदेश द्वारा या अलग आदेश द्वारा, चाहे प्रथम परंतुक के तहत नोटिस जारी करने के समय या किसी अन्य समय पर, संबंधित व्यक्ति को निर्माण या कार्य रोकने का निर्देश दे सकता है, जब तक कि विध्वंस के आदेश के विरुद्ध अपील की अवधि समाप्त न हो जाए, यदि ऐसा आदेश दिया गया हो, तो उपधारा (2) के तहत अपील की जा सकती है।
(2) उपधारा (1) के अधीन अध्यक्ष द्वारा दिए गए किसी आदेश से पीड़ित कोई व्यक्ति उस आदेश के विरुद्ध अपील न्यायाधिकरण में उस अवधि के भीतर अपील कर सकता है, जो आदेश में संबंधित निर्माण या कार्य को ध्वस्त करने के लिए निर्दिष्ट है।
(3) जहां विध्वंस के आदेश के विरुद्ध उपधारा (2) के अंतर्गत अपील की जाती है, वहां अपीलीय न्यायाधिकरण, धारा 255 की उपधारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उस आदेश के प्रवर्तन को ऐसी शर्तों पर, यदि कोई हो, और ऐसी अवधि के लिए स्थगित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे:
बशर्ते कि यदि विध्वंस का आदेश जारी होने के समय किसी भवन का निर्माण या किसी कार्य का निष्पादन पूरा नहीं हुआ है, तो अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा विध्वंस के आदेश के प्रवर्तन पर रोक लगाने का कोई आदेश तब तक जारी नहीं किया जाएगा, जब तक कि उक्त न्यायाधिकरण की राय में अपीलकर्ता द्वारा अपील के निपटारे तक ऐसे निर्माण या कार्य को आगे न बढ़ाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान न की गई हो।
(4) कोई भी न्यायालय अध्यक्ष को इस धारा के प्रावधानों के अनुसरण में कोई भी कार्रवाई करने या कोई आदेश देने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा या अन्य राहत हेतु कोई भी मुकदमा, आवेदन या आदेश कार्यवाही पर विचार नहीं करेगा।
(5) धारा 256 के तहत अपील पर प्रशासक द्वारा दिए गए आदेश के अधीन, इस धारा के तहत अपील पर अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश के अधीन, और प्रशासक और अपीलीय न्यायाधिकरण के अपील पर दिए गए आदेशों के अधीन, अध्यक्ष द्वारा दिया गया विध्वंस आदेश अंतिम और निर्णायक होगा।
(6) जहां अध्यक्ष द्वारा उपधारा (1) के तहत दिए गए विध्वंस आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं की गई है, या जहां अध्यक्ष द्वारा उस उपधारा के तहत दिए गए विध्वंस आदेश की अपील पर, अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा, परिवर्तन सहित या बिना परिवर्तन के, पुष्टि की गई है, और यदि अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील की गई है, तो प्रशासक द्वारा पुष्टि की गई है, तो जिस व्यक्ति के विरुद्ध आदेश दिया गया है, वह उसमें निर्दिष्ट अवधि के भीतर, या जैसा भी मामला हो, अपीलीय न्यायाधिकरण या प्रशासक द्वारा अपील पर निर्धारित अवधि के भीतर, आदेश का पालन करेगा। यदि वह व्यक्ति ऐसी अवधि के भीतर आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो अध्यक्ष स्वयं उस निर्माण या कार्य को ध्वस्त करवा सकता है जिससे आदेश संबंधित है, और ऐसे विध्वंस का व्यय इस अधिनियम के तहत कर के बकाया के रूप में उस व्यक्ति से वसूल किया जाएगा।
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