CGST Act 98अध्याय XVII · Advance Ruling
धारा 98 · आवेदन प्राप्त होने पर प्रक्रिया।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आवेदन प्राप्त होने पर, प्राधिकरण उसकी एक प्रति संबंधित अधिकारी को अग्रेषित करवाएगा और यदि आवश्यक हो, तो उसे प्रासंगिक अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए कहेगा:
बशर्ते कि यदि किसी भी मामले में प्राधिकरण द्वारा कोई अभिलेख मंगवाया गया हो, तो ऐसे अभिलेख यथाशीघ्र संबंधित अधिकारी को लौटा दिए जाएंगे।
(2) प्राधिकरण आवेदन और मंगवाए गए अभिलेखों की जांच करने के बाद और आवेदक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि तथा संबंधित अधिकारी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि की सुनवाई करने के बाद, आदेश द्वारा आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है:
बशर्ते कि प्राधिकरण उस आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा जहां आवेदन में उठाया गया प्रश्न इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान के तहत आवेदक के मामले में किसी भी कार्यवाही में पहले से ही लंबित है या तय किया जा चुका है:
इसके अलावा, इस उपधारा के अंतर्गत किसी भी आवेदन को तब तक अस्वीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, यदि आवेदन अस्वीकृत किया जाता है, तो अस्वीकृति के कारणों को आदेश में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा।
(3) उपधारा (2) के तहत दिए गए प्रत्येक आदेश की एक प्रति आवेदक और संबंधित अधिकारी को भेजी जाएगी।
(4) जहां उपधारा (2) के तहत आवेदन स्वीकार किया जाता है, वहां प्राधिकरण आवेदक द्वारा उसके समक्ष रखी गई या प्राधिकरण द्वारा प्राप्त की गई अतिरिक्त सामग्री की जांच करने के बाद और आवेदक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के साथ-साथ संबंधित अधिकारी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, आवेदन में निर्दिष्ट प्रश्न पर अपना अग्रिम निर्णय सुनाएगा।
(5) जहां प्राधिकरण के सदस्य किसी ऐसे प्रश्न पर असहमत हों जिस पर अग्रिम निर्णय मांगा गया हो, तो वे उन बिंदुओं को बताएंगे जिन पर वे असहमत हैं और ऐसे प्रश्न पर सुनवाई और निर्णय के लिए अपीलीय प्राधिकरण को संदर्भित करेंगे।
(6) प्राधिकरण आवेदन प्राप्त होने की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर लिखित में अपना अग्रिम निर्णय सुनाएगा।
(7) प्राधिकरण द्वारा सदस्यों द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित और निर्धारित तरीके से प्रमाणित अग्रिम निर्णय की एक प्रति, ऐसे निर्णय के बाद आवेदक, संबंधित अधिकारी और क्षेत्राधिकार अधिकारी को भेजी जाएगी।
बशर्ते कि यदि किसी भी मामले में प्राधिकरण द्वारा कोई अभिलेख मंगवाया गया हो, तो ऐसे अभिलेख यथाशीघ्र संबंधित अधिकारी को लौटा दिए जाएंगे।
(2) प्राधिकरण आवेदन और मंगवाए गए अभिलेखों की जांच करने के बाद और आवेदक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि तथा संबंधित अधिकारी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि की सुनवाई करने के बाद, आदेश द्वारा आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है:
बशर्ते कि प्राधिकरण उस आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा जहां आवेदन में उठाया गया प्रश्न इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान के तहत आवेदक के मामले में किसी भी कार्यवाही में पहले से ही लंबित है या तय किया जा चुका है:
इसके अलावा, इस उपधारा के अंतर्गत किसी भी आवेदन को तब तक अस्वीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का अवसर न दिया गया हो:
इसके अलावा, यदि आवेदन अस्वीकृत किया जाता है, तो अस्वीकृति के कारणों को आदेश में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा।
(3) उपधारा (2) के तहत दिए गए प्रत्येक आदेश की एक प्रति आवेदक और संबंधित अधिकारी को भेजी जाएगी।
(4) जहां उपधारा (2) के तहत आवेदन स्वीकार किया जाता है, वहां प्राधिकरण आवेदक द्वारा उसके समक्ष रखी गई या प्राधिकरण द्वारा प्राप्त की गई अतिरिक्त सामग्री की जांच करने के बाद और आवेदक या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के साथ-साथ संबंधित अधिकारी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, आवेदन में निर्दिष्ट प्रश्न पर अपना अग्रिम निर्णय सुनाएगा।
(5) जहां प्राधिकरण के सदस्य किसी ऐसे प्रश्न पर असहमत हों जिस पर अग्रिम निर्णय मांगा गया हो, तो वे उन बिंदुओं को बताएंगे जिन पर वे असहमत हैं और ऐसे प्रश्न पर सुनवाई और निर्णय के लिए अपीलीय प्राधिकरण को संदर्भित करेंगे।
(6) प्राधिकरण आवेदन प्राप्त होने की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर लिखित में अपना अग्रिम निर्णय सुनाएगा।
(7) प्राधिकरण द्वारा सदस्यों द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित और निर्धारित तरीके से प्रमाणित अग्रिम निर्णय की एक प्रति, ऐसे निर्णय के बाद आवेदक, संबंधित अधिकारी और क्षेत्राधिकार अधिकारी को भेजी जाएगी।
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