CGST Act 35अध्याय VIII · Accounts and Records
धारा 35 · खाते और अन्य अभिलेख।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक पंजीकृत व्यक्ति अपने मुख्य व्यवसाय स्थल पर, जैसा कि पंजीकरण प्रमाण पत्र में उल्लेख किया गया है, एक सही और सटीक खाता रखेगा और उसका रखरखाव करेगा---
(क) वस्तुओं का उत्पादन या निर्माण;
(ख) वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक आपूर्ति;
(ग) माल का भंडार;
(घ) इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया गया;
(ई) देय और भुगतान किया गया उत्पादन कर; और
(f) ऐसे अन्य विवरण जो निर्धारित किए जा सकते हैं:
बशर्ते कि यदि पंजीकरण प्रमाण पत्र में एक से अधिक व्यावसायिक स्थान निर्दिष्ट हैं, तो प्रत्येक व्यावसायिक स्थान से संबंधित खाते उन व्यावसायिक स्थानों पर ही रखे जाएंगे:
इसके अलावा, पंजीकृत व्यक्ति ऐसे खाते और अन्य विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप में निर्धारित तरीके से रख सकता है और उनका रखरखाव कर सकता है।
(2) गोदाम या माल के भंडारण के लिए प्रयुक्त किसी अन्य स्थान का प्रत्येक स्वामी या संचालक तथा प्रत्येक ट्रांसपोर्टर, चाहे वह पंजीकृत व्यक्ति हो या नहीं, माल भेजने वाले, माल प्राप्त करने वाले तथा माल के अन्य प्रासंगिक विवरणों का रिकॉर्ड निर्धारित तरीके से रखेगा।
(3) आयुक्त कर योग्य व्यक्तियों के एक वर्ग को ऐसे प्रयोजन के लिए अतिरिक्त खाते या दस्तावेज बनाए रखने के लिए अधिसूचित कर सकता है जैसा कि उसमें निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(4) जहाँ आयुक्त को यह प्रतीत होता है कि कर योग्य व्यक्तियों का कोई वर्ग इस धारा के प्रावधानों के अनुसार खाते रखने और बनाए रखने की स्थिति में नहीं है, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर कर योग्य व्यक्तियों के ऐसे वर्ग को खाते इस प्रकार रखने की अनुमति दे सकता है जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
1 * * * * *
2. बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात केंद्र सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के किसी विभाग पर लागू नहीं होगी, जिसके लेखा-पुस्तकों का लेखा-जोखा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या किसी कानून के तहत स्थानीय प्राधिकरणों के खातों का लेखा-जोखा करने के लिए नियुक्त लेखा परीक्षक द्वारा किया जाता है।
(6) धारा 17 की उपधारा (5) के खंड (h) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, यदि पंजीकृत व्यक्ति उपधारा (1) के प्रावधानों के अनुसार माल या सेवाओं या दोनों का हिसाब देने में विफल रहता है, तो उचित अधिकारी उन माल या सेवाओं या दोनों पर देय कर की राशि का निर्धारण इस प्रकार करेगा, मानो ऐसे माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति उस व्यक्ति द्वारा की गई हो, और धारा 73 या धारा 74 [या धारा 74ए] के प्रावधान, जैसा भी मामला हो, ऐसे कर के निर्धारण के लिए यथावश्यक परिवर्तनों के साथ लागू होंगे।
(क) वस्तुओं का उत्पादन या निर्माण;
(ख) वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक आपूर्ति;
(ग) माल का भंडार;
(घ) इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया गया;
(ई) देय और भुगतान किया गया उत्पादन कर; और
(f) ऐसे अन्य विवरण जो निर्धारित किए जा सकते हैं:
बशर्ते कि यदि पंजीकरण प्रमाण पत्र में एक से अधिक व्यावसायिक स्थान निर्दिष्ट हैं, तो प्रत्येक व्यावसायिक स्थान से संबंधित खाते उन व्यावसायिक स्थानों पर ही रखे जाएंगे:
इसके अलावा, पंजीकृत व्यक्ति ऐसे खाते और अन्य विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप में निर्धारित तरीके से रख सकता है और उनका रखरखाव कर सकता है।
(2) गोदाम या माल के भंडारण के लिए प्रयुक्त किसी अन्य स्थान का प्रत्येक स्वामी या संचालक तथा प्रत्येक ट्रांसपोर्टर, चाहे वह पंजीकृत व्यक्ति हो या नहीं, माल भेजने वाले, माल प्राप्त करने वाले तथा माल के अन्य प्रासंगिक विवरणों का रिकॉर्ड निर्धारित तरीके से रखेगा।
(3) आयुक्त कर योग्य व्यक्तियों के एक वर्ग को ऐसे प्रयोजन के लिए अतिरिक्त खाते या दस्तावेज बनाए रखने के लिए अधिसूचित कर सकता है जैसा कि उसमें निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(4) जहाँ आयुक्त को यह प्रतीत होता है कि कर योग्य व्यक्तियों का कोई वर्ग इस धारा के प्रावधानों के अनुसार खाते रखने और बनाए रखने की स्थिति में नहीं है, तो वह लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर कर योग्य व्यक्तियों के ऐसे वर्ग को खाते इस प्रकार रखने की अनुमति दे सकता है जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
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2. बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात केंद्र सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के किसी विभाग पर लागू नहीं होगी, जिसके लेखा-पुस्तकों का लेखा-जोखा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या किसी कानून के तहत स्थानीय प्राधिकरणों के खातों का लेखा-जोखा करने के लिए नियुक्त लेखा परीक्षक द्वारा किया जाता है।
(6) धारा 17 की उपधारा (5) के खंड (h) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, यदि पंजीकृत व्यक्ति उपधारा (1) के प्रावधानों के अनुसार माल या सेवाओं या दोनों का हिसाब देने में विफल रहता है, तो उचित अधिकारी उन माल या सेवाओं या दोनों पर देय कर की राशि का निर्धारण इस प्रकार करेगा, मानो ऐसे माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति उस व्यक्ति द्वारा की गई हो, और धारा 73 या धारा 74 [या धारा 74ए] के प्रावधान, जैसा भी मामला हो, ऐसे कर के निर्धारण के लिए यथावश्यक परिवर्तनों के साथ लागू होंगे।
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