CGST Act 79अध्याय XV · Demands and Recovery
धारा 79 · कर की वसूली।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के किसी प्रावधान के अधीन सरकार को देय कोई राशि अदा नहीं की जाती है, तो उचित अधिकारी निम्नलिखित में से एक या अधिक तरीकों से राशि की वसूली के लिए कार्यवाही करेगा, अर्थात्:---
(क) उचित अधिकारी, ऐसे व्यक्ति को देय किसी भी धन में से, जो उचित अधिकारी या ऐसे अन्य निर्दिष्ट अधिकारी के नियंत्रण में हो, देय राशि काट सकता है या किसी अन्य निर्दिष्ट अधिकारी से ऐसी राशि काटने का आदेश दे सकता है;
(ख) उचित अधिकारी ऐसे व्यक्ति से संबंधित किसी भी माल को, जो उचित अधिकारी या ऐसे अन्य निर्दिष्ट अधिकारी के नियंत्रण में हो, को रोककर और बेचकर देय राशि की वसूली कर सकता है या किसी अन्य निर्दिष्ट अधिकारी को वसूली करने का निर्देश दे सकता है;
(ग) (i) उचित अधिकारी, लिखित नोटिस द्वारा, किसी अन्य व्यक्ति से, जिससे ऐसे व्यक्ति को धन देय है या देय हो सकता है, या जो ऐसे व्यक्ति के लिए या उसके खाते में धन रखता है या बाद में रख सकता है, सरकार को धन देय होने या रखे जाने पर तुरंत, या नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर, जो धन देय होने या रखे जाने से पहले नहीं होगा, उतना धन भुगतान करने की मांग कर सकता है जितना ऐसे व्यक्ति से देय राशि का भुगतान करने के लिए पर्याप्त हो, या संपूर्ण धन का भुगतान करने की मांग कर सकता है जब वह उस राशि के बराबर या उससे कम हो;
(ii) उपखंड (i) के अंतर्गत जिस व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाता है, वह ऐसे नोटिस का पालन करने के लिए बाध्य होगा, और विशेष रूप से, यदि ऐसा कोई नोटिस डाकघर, बैंकिंग कंपनी या बीमाकर्ता को जारी किया जाता है, तो भुगतान करने से पहले किसी प्रविष्टि, पृष्ठांकन आदि के लिए कोई पासबुक, जमा रसीद, पॉलिसी या कोई अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा, भले ही इसके विपरीत कोई नियम, प्रथा या आवश्यकता हो;
(iii) यदि उपखंड (i) के अंतर्गत नोटिस प्राप्त व्यक्ति सरकार को उसके अनुसार भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे नोटिस में निर्दिष्ट राशि के संबंध में चूककर्ता माना जाएगा और इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के सभी परिणाम उस पर लागू होंगे;
(iv) उप-खंड (i) के तहत नोटिस जारी करने वाला अधिकारी किसी भी समय ऐसे नोटिस में संशोधन कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है या नोटिस के अनुसरण में कोई भुगतान करने के लिए समय बढ़ा सकता है;
(v) उप-खंड (i) के तहत जारी नोटिस के अनुपालन में कोई भी भुगतान करने वाला व्यक्ति चूक करने वाले व्यक्ति के अधिकार के तहत भुगतान किया हुआ माना जाएगा और सरकार के खाते में जमा किया गया ऐसा भुगतान रसीद में निर्दिष्ट राशि की सीमा तक चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति ऐसे व्यक्ति के दायित्व का अच्छा और पर्याप्त निर्वहन माना जाएगा;
(vi) उप-खंड (i) के तहत जारी नोटिस की तामील होने के बाद चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी दायित्व का निर्वहन करने वाला कोई भी व्यक्ति, कर, ब्याज और जुर्माने के लिए सरकार के प्रति निर्वहन किए गए दायित्व की सीमा तक या चूक करने वाले व्यक्ति के दायित्व की सीमा तक, जो भी कम हो, व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा;
(vii) जहाँ उप-खंड (i) के अंतर्गत जिस व्यक्ति को नोटिस तामील किया गया है, वह नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को यह सिद्ध कर दे कि माँगी गई धनराशि या उसका कोई भाग चूककर्ता व्यक्ति को देय नहीं था, या नोटिस तामील किए जाने के समय उसके पास चूककर्ता व्यक्ति के लिए या उसके खाते में कोई धनराशि नहीं थी, और न ही माँगी गई धनराशि या उसका कोई भाग उक्त व्यक्ति को देय होने की संभावना है, या ऐसे व्यक्ति के लिए या उसके खाते में होने की संभावना है, तो इस धारा में निहित कोई भी बात उस व्यक्ति को, जिसे नोटिस तामील किया गया है, सरकार को ऐसी कोई धनराशि या उसका भाग भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं करेगी;
(घ) उचित अधिकारी, इस संबंध में बनाए जाने वाले नियमों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति की चल या अचल संपत्ति को कुर्क कर सकता है और देय राशि का भुगतान होने तक उसे अपने पास रख सकता है; और यदि उक्त देय राशि का कोई भाग या कुर्की या संपत्ति को अपने पास रखने का खर्च ऐसी कुर्की के बाद तीस दिनों तक बकाया रहता है, तो वह उक्त संपत्ति को बेच सकता है और ऐसी बिक्री से प्राप्त राशि से बकाया देय राशि और बिक्री खर्च सहित शेष खर्चों की पूर्ति कर सकता है और यदि कोई अधिशेष राशि बचती है, तो उसे ऐसे व्यक्ति को लौटा सकता है;
(ई) उचित अधिकारी अपने हस्ताक्षरों से एक प्रमाण पत्र तैयार कर सकता है जिसमें ऐसे व्यक्ति से देय राशि निर्दिष्ट हो और उसे उस जिले के कलेक्टर को भेज सकता है जिसमें ऐसा व्यक्ति कोई संपत्ति रखता हो या निवास करता हो या अपना व्यवसाय करता हो या सरकार द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी को भेज सकता है और उक्त कलेक्टर या उक्त अधिकारी, ऐसे प्रमाण पत्र की प्राप्ति पर, ऐसे व्यक्ति से उसमें निर्दिष्ट राशि की वसूली इस प्रकार करेगा मानो वह भू-राजस्व का बकाया हो;
(f) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में किसी बात के होते हुए भी, उचित अधिकारी उपयुक्त मजिस्ट्रेट को आवेदन प्रस्तुत कर सकता है और ऐसा मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से उसमें निर्दिष्ट राशि की वसूली करेगा मानो वह उसके द्वारा लगाया गया जुर्माना हो।
(2) जहाँ इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए किसी नियम या विनियमों के तहत निष्पादित किसी बांड या अन्य दस्तावेज की शर्तों में यह प्रावधान हो कि ऐसे दस्तावेज के तहत देय कोई राशि उप-धारा (1) में निर्धारित तरीके से वसूल की जा सकती है, तो वसूली के किसी अन्य तरीके पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उस राशि को उस उप-धारा के प्रावधानों के अनुसार वसूल किया जा सकता है।
(3) यदि किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के किसी प्रावधान के अधीन सरकार को कर, ब्याज या जुर्माना देय हो और वह बकाया राशि अदा न की गई हो, तो राज्य कर या केंद्र शासित प्रदेश कर का उचित अधिकारी उक्त कर बकाया की वसूली के दौरान उस राशि को उक्त व्यक्ति से इस प्रकार वसूल कर सकता है मानो वह राज्य कर या केंद्र शासित प्रदेश कर का बकाया हो और इस प्रकार वसूल की गई राशि को सरकार के खाते में जमा कर सकता है।
(4) जहां उपधारा (3) के तहत वसूल की गई राशि केंद्र सरकार और राज्य सरकार को देय राशि से कम है, तो संबंधित सरकारों के खाते में जमा की जाने वाली राशि प्रत्येक ऐसी सरकार को देय राशि के अनुपात में होगी।
1 [ स्पष्टीकरण .--- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, 'व्यक्ति' शब्द में धारा 25 की उपधारा (4) या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (5) में संदर्भित "अलग-अलग व्यक्ति" शामिल होंगे।]
(क) उचित अधिकारी, ऐसे व्यक्ति को देय किसी भी धन में से, जो उचित अधिकारी या ऐसे अन्य निर्दिष्ट अधिकारी के नियंत्रण में हो, देय राशि काट सकता है या किसी अन्य निर्दिष्ट अधिकारी से ऐसी राशि काटने का आदेश दे सकता है;
(ख) उचित अधिकारी ऐसे व्यक्ति से संबंधित किसी भी माल को, जो उचित अधिकारी या ऐसे अन्य निर्दिष्ट अधिकारी के नियंत्रण में हो, को रोककर और बेचकर देय राशि की वसूली कर सकता है या किसी अन्य निर्दिष्ट अधिकारी को वसूली करने का निर्देश दे सकता है;
(ग) (i) उचित अधिकारी, लिखित नोटिस द्वारा, किसी अन्य व्यक्ति से, जिससे ऐसे व्यक्ति को धन देय है या देय हो सकता है, या जो ऐसे व्यक्ति के लिए या उसके खाते में धन रखता है या बाद में रख सकता है, सरकार को धन देय होने या रखे जाने पर तुरंत, या नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर, जो धन देय होने या रखे जाने से पहले नहीं होगा, उतना धन भुगतान करने की मांग कर सकता है जितना ऐसे व्यक्ति से देय राशि का भुगतान करने के लिए पर्याप्त हो, या संपूर्ण धन का भुगतान करने की मांग कर सकता है जब वह उस राशि के बराबर या उससे कम हो;
(ii) उपखंड (i) के अंतर्गत जिस व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाता है, वह ऐसे नोटिस का पालन करने के लिए बाध्य होगा, और विशेष रूप से, यदि ऐसा कोई नोटिस डाकघर, बैंकिंग कंपनी या बीमाकर्ता को जारी किया जाता है, तो भुगतान करने से पहले किसी प्रविष्टि, पृष्ठांकन आदि के लिए कोई पासबुक, जमा रसीद, पॉलिसी या कोई अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा, भले ही इसके विपरीत कोई नियम, प्रथा या आवश्यकता हो;
(iii) यदि उपखंड (i) के अंतर्गत नोटिस प्राप्त व्यक्ति सरकार को उसके अनुसार भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे नोटिस में निर्दिष्ट राशि के संबंध में चूककर्ता माना जाएगा और इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के सभी परिणाम उस पर लागू होंगे;
(iv) उप-खंड (i) के तहत नोटिस जारी करने वाला अधिकारी किसी भी समय ऐसे नोटिस में संशोधन कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है या नोटिस के अनुसरण में कोई भुगतान करने के लिए समय बढ़ा सकता है;
(v) उप-खंड (i) के तहत जारी नोटिस के अनुपालन में कोई भी भुगतान करने वाला व्यक्ति चूक करने वाले व्यक्ति के अधिकार के तहत भुगतान किया हुआ माना जाएगा और सरकार के खाते में जमा किया गया ऐसा भुगतान रसीद में निर्दिष्ट राशि की सीमा तक चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति ऐसे व्यक्ति के दायित्व का अच्छा और पर्याप्त निर्वहन माना जाएगा;
(vi) उप-खंड (i) के तहत जारी नोटिस की तामील होने के बाद चूक करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी दायित्व का निर्वहन करने वाला कोई भी व्यक्ति, कर, ब्याज और जुर्माने के लिए सरकार के प्रति निर्वहन किए गए दायित्व की सीमा तक या चूक करने वाले व्यक्ति के दायित्व की सीमा तक, जो भी कम हो, व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा;
(vii) जहाँ उप-खंड (i) के अंतर्गत जिस व्यक्ति को नोटिस तामील किया गया है, वह नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को यह सिद्ध कर दे कि माँगी गई धनराशि या उसका कोई भाग चूककर्ता व्यक्ति को देय नहीं था, या नोटिस तामील किए जाने के समय उसके पास चूककर्ता व्यक्ति के लिए या उसके खाते में कोई धनराशि नहीं थी, और न ही माँगी गई धनराशि या उसका कोई भाग उक्त व्यक्ति को देय होने की संभावना है, या ऐसे व्यक्ति के लिए या उसके खाते में होने की संभावना है, तो इस धारा में निहित कोई भी बात उस व्यक्ति को, जिसे नोटिस तामील किया गया है, सरकार को ऐसी कोई धनराशि या उसका भाग भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं करेगी;
(घ) उचित अधिकारी, इस संबंध में बनाए जाने वाले नियमों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति की चल या अचल संपत्ति को कुर्क कर सकता है और देय राशि का भुगतान होने तक उसे अपने पास रख सकता है; और यदि उक्त देय राशि का कोई भाग या कुर्की या संपत्ति को अपने पास रखने का खर्च ऐसी कुर्की के बाद तीस दिनों तक बकाया रहता है, तो वह उक्त संपत्ति को बेच सकता है और ऐसी बिक्री से प्राप्त राशि से बकाया देय राशि और बिक्री खर्च सहित शेष खर्चों की पूर्ति कर सकता है और यदि कोई अधिशेष राशि बचती है, तो उसे ऐसे व्यक्ति को लौटा सकता है;
(ई) उचित अधिकारी अपने हस्ताक्षरों से एक प्रमाण पत्र तैयार कर सकता है जिसमें ऐसे व्यक्ति से देय राशि निर्दिष्ट हो और उसे उस जिले के कलेक्टर को भेज सकता है जिसमें ऐसा व्यक्ति कोई संपत्ति रखता हो या निवास करता हो या अपना व्यवसाय करता हो या सरकार द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी को भेज सकता है और उक्त कलेक्टर या उक्त अधिकारी, ऐसे प्रमाण पत्र की प्राप्ति पर, ऐसे व्यक्ति से उसमें निर्दिष्ट राशि की वसूली इस प्रकार करेगा मानो वह भू-राजस्व का बकाया हो;
(f) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में किसी बात के होते हुए भी, उचित अधिकारी उपयुक्त मजिस्ट्रेट को आवेदन प्रस्तुत कर सकता है और ऐसा मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से उसमें निर्दिष्ट राशि की वसूली करेगा मानो वह उसके द्वारा लगाया गया जुर्माना हो।
(2) जहाँ इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए किसी नियम या विनियमों के तहत निष्पादित किसी बांड या अन्य दस्तावेज की शर्तों में यह प्रावधान हो कि ऐसे दस्तावेज के तहत देय कोई राशि उप-धारा (1) में निर्धारित तरीके से वसूल की जा सकती है, तो वसूली के किसी अन्य तरीके पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उस राशि को उस उप-धारा के प्रावधानों के अनुसार वसूल किया जा सकता है।
(3) यदि किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के किसी प्रावधान के अधीन सरकार को कर, ब्याज या जुर्माना देय हो और वह बकाया राशि अदा न की गई हो, तो राज्य कर या केंद्र शासित प्रदेश कर का उचित अधिकारी उक्त कर बकाया की वसूली के दौरान उस राशि को उक्त व्यक्ति से इस प्रकार वसूल कर सकता है मानो वह राज्य कर या केंद्र शासित प्रदेश कर का बकाया हो और इस प्रकार वसूल की गई राशि को सरकार के खाते में जमा कर सकता है।
(4) जहां उपधारा (3) के तहत वसूल की गई राशि केंद्र सरकार और राज्य सरकार को देय राशि से कम है, तो संबंधित सरकारों के खाते में जमा की जाने वाली राशि प्रत्येक ऐसी सरकार को देय राशि के अनुपात में होगी।
1 [ स्पष्टीकरण .--- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, 'व्यक्ति' शब्द में धारा 25 की उपधारा (4) या, जैसा भी मामला हो, उपधारा (5) में संदर्भित "अलग-अलग व्यक्ति" शामिल होंगे।]
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