CGST Act 150अध्याय XXI · Miscellaneous
धारा 150 · सूचना प्रस्तुत करने का दायित्व।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति, जो--
(क) कर योग्य व्यक्ति; या
(ख) स्थानीय प्राधिकरण या अन्य सार्वजनिक निकाय या संघ; या
(ग) राज्य सरकार का कोई प्राधिकरण जो मूल्य वर्धित कर या बिक्री कर या राज्य उत्पाद शुल्क वसूलने के लिए उत्तरदायी हो या केंद्र सरकार का कोई प्राधिकरण जो उत्पाद शुल्क या सीमा शुल्क वसूलने के लिए उत्तरदायी हो; या
(घ) आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) के प्रावधानों के तहत नियुक्त आयकर प्राधिकरण; या
(ई) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की धारा 45ए के खंड (ए) के अर्थ में एक बैंकिंग कंपनी; या
(f) राज्य विद्युत बोर्ड या विद्युत अधिनियम, 2003 (36 ऑफ 2003) के तहत विद्युत वितरण या पारेषण लाइसेंसधारी, या केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसे कार्यों के लिए नियुक्त कोई अन्य इकाई; या
(जी) पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 ऑफ 1908) की धारा 6 के तहत नियुक्त रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार; या
(h) कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) के अर्थ में रजिस्ट्रार; या
(i) मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के तहत मोटर वाहनों को पंजीकृत करने के लिए अधिकृत पंजीकरण प्राधिकारी; या
(j) भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम, 2013 (30 ऑफ 2013) की धारा 3 के खंड (c) में निर्दिष्ट कलेक्टर; या
(k) प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (42 ऑफ 1956) की धारा 2 के खंड (f) में निर्दिष्ट मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज; या
(l) डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 (22 ऑफ 1996) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ई) में निर्दिष्ट डिपॉजिटरी; या
(m) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की धारा 3 के तहत गठित भारतीय रिज़र्व बैंक का कोई अधिकारी; या
(n) वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क, कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) के तहत पंजीकृत कंपनी; या
(ओ) वह व्यक्ति जिसे धारा 25 की उपधारा (9) के अधीन विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की गई है; या
(p) कोई अन्य व्यक्ति जिसे परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है,
जो भी व्यक्ति पंजीकरण का रिकॉर्ड रखने, खातों का विवरण रखने, या किसी आवधिक रिटर्न या कर भुगतान का विवरण तथा वस्तुओं या सेवाओं या दोनों के लेन-देन का विवरण, या बैंक खाते से संबंधित लेन-देन, या बिजली की खपत, या वस्तुओं या संपत्ति की खरीद, बिक्री या विनिमय, या किसी संपत्ति में अधिकार या हित से संबंधित लेन-देन का रिकॉर्ड रखने के लिए उत्तरदायी है, वह निर्धारित अवधियों के लिए, निर्धारित समय के भीतर, निर्धारित प्रपत्र और तरीके से तथा निर्धारित प्राधिकारी या एजेंसी को इसकी सूचना प्रस्तुत करेगा।
(2) यदि आयुक्त या इस संबंध में उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि सूचना प्रतिलेख में दी गई जानकारी त्रुटिपूर्ण है, तो वह सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को त्रुटि की सूचना दे सकता है और उसे सूचना की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर त्रुटि को सुधारने का अवसर दे सकता है, जो इस संबंध में किए गए आवेदन पर उक्त प्राधिकारी द्वारा अनुमत हो। यदि त्रुटि उक्त तीस दिनों की अवधि या अनुमत अतिरिक्त अवधि के भीतर नहीं सुधारी जाती है, तो इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत नहीं की गई मानी जाएगी और इस अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।
(3) जहाँ कोई व्यक्ति जिसे सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करना आवश्यक है, उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट समय के भीतर उसे प्रस्तुत नहीं करता है, तो उक्त प्राधिकारी उसे सूचना प्रतिलेख की तामील कर सकता है जिसमें उसे सूचना प्रतिलेख की तामील की तिथि से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर ऐसी सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी और ऐसा व्यक्ति सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करेगा।
(क) कर योग्य व्यक्ति; या
(ख) स्थानीय प्राधिकरण या अन्य सार्वजनिक निकाय या संघ; या
(ग) राज्य सरकार का कोई प्राधिकरण जो मूल्य वर्धित कर या बिक्री कर या राज्य उत्पाद शुल्क वसूलने के लिए उत्तरदायी हो या केंद्र सरकार का कोई प्राधिकरण जो उत्पाद शुल्क या सीमा शुल्क वसूलने के लिए उत्तरदायी हो; या
(घ) आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) के प्रावधानों के तहत नियुक्त आयकर प्राधिकरण; या
(ई) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की धारा 45ए के खंड (ए) के अर्थ में एक बैंकिंग कंपनी; या
(f) राज्य विद्युत बोर्ड या विद्युत अधिनियम, 2003 (36 ऑफ 2003) के तहत विद्युत वितरण या पारेषण लाइसेंसधारी, या केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसे कार्यों के लिए नियुक्त कोई अन्य इकाई; या
(जी) पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 ऑफ 1908) की धारा 6 के तहत नियुक्त रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार; या
(h) कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) के अर्थ में रजिस्ट्रार; या
(i) मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के तहत मोटर वाहनों को पंजीकृत करने के लिए अधिकृत पंजीकरण प्राधिकारी; या
(j) भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम, 2013 (30 ऑफ 2013) की धारा 3 के खंड (c) में निर्दिष्ट कलेक्टर; या
(k) प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (42 ऑफ 1956) की धारा 2 के खंड (f) में निर्दिष्ट मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज; या
(l) डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 (22 ऑफ 1996) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ई) में निर्दिष्ट डिपॉजिटरी; या
(m) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की धारा 3 के तहत गठित भारतीय रिज़र्व बैंक का कोई अधिकारी; या
(n) वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क, कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) के तहत पंजीकृत कंपनी; या
(ओ) वह व्यक्ति जिसे धारा 25 की उपधारा (9) के अधीन विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की गई है; या
(p) कोई अन्य व्यक्ति जिसे परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है,
जो भी व्यक्ति पंजीकरण का रिकॉर्ड रखने, खातों का विवरण रखने, या किसी आवधिक रिटर्न या कर भुगतान का विवरण तथा वस्तुओं या सेवाओं या दोनों के लेन-देन का विवरण, या बैंक खाते से संबंधित लेन-देन, या बिजली की खपत, या वस्तुओं या संपत्ति की खरीद, बिक्री या विनिमय, या किसी संपत्ति में अधिकार या हित से संबंधित लेन-देन का रिकॉर्ड रखने के लिए उत्तरदायी है, वह निर्धारित अवधियों के लिए, निर्धारित समय के भीतर, निर्धारित प्रपत्र और तरीके से तथा निर्धारित प्राधिकारी या एजेंसी को इसकी सूचना प्रस्तुत करेगा।
(2) यदि आयुक्त या इस संबंध में उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि सूचना प्रतिलेख में दी गई जानकारी त्रुटिपूर्ण है, तो वह सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को त्रुटि की सूचना दे सकता है और उसे सूचना की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर त्रुटि को सुधारने का अवसर दे सकता है, जो इस संबंध में किए गए आवेदन पर उक्त प्राधिकारी द्वारा अनुमत हो। यदि त्रुटि उक्त तीस दिनों की अवधि या अनुमत अतिरिक्त अवधि के भीतर नहीं सुधारी जाती है, तो इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत नहीं की गई मानी जाएगी और इस अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।
(3) जहाँ कोई व्यक्ति जिसे सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करना आवश्यक है, उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट समय के भीतर उसे प्रस्तुत नहीं करता है, तो उक्त प्राधिकारी उसे सूचना प्रतिलेख की तामील कर सकता है जिसमें उसे सूचना प्रतिलेख की तामील की तिथि से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर ऐसी सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी और ऐसा व्यक्ति सूचना प्रतिलेख प्रस्तुत करेगा।
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