CGST Act 113अध्याय XVIII · Appeals and Revision
धारा 113 · अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश।
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(1) अपीलीय न्यायाधिकरण, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकता है जैसा वह उचित समझे, अपील के विरुद्ध दिए गए निर्णय या आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त कर सकता है, या मामले को अपीलीय प्राधिकारी, पुनरीक्षण प्राधिकारी या मूल निर्णय प्राधिकारी को ऐसे निर्देशों के साथ वापस भेज सकता है जैसा वह उचित समझे, ताकि यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त साक्ष्य लेने के बाद नए सिरे से निर्णय लिया जा सके।
(2) अपीलीय न्यायाधिकरण, यदि पर्याप्त कारण बताया जाए, तो अपील की सुनवाई के किसी भी चरण में, पक्षकारों या उनमें से किसी को समय दे सकता है और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से अपील की सुनवाई स्थगित कर सकता है:
बशर्ते कि अपील की सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष को तीन बार से अधिक स्थगन नहीं दिया जाएगा।
(3) अपीलीय न्यायाधिकरण उप-धारा (1) के तहत पारित किसी भी आदेश में संशोधन कर सकता है ताकि अभिलेख में स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली किसी भी त्रुटि को सुधारा जा सके, यदि ऐसी त्रुटि उसे स्वयं ही पता चल जाए, या आयुक्त या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त या अपील के दूसरे पक्ष द्वारा आदेश की तिथि से तीन माह की अवधि के भीतर उसके संज्ञान में लाई जाए।
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत ऐसा कोई संशोधन नहीं किया जाएगा जिससे मूल्यांकन में वृद्धि हो, रिफंड या इनपुट टैक्स क्रेडिट में कमी हो, या अन्यथा दूसरे पक्ष की देनदारी में वृद्धि हो, जब तक कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर न दिया गया हो।
(4) अपीलीय न्यायाधिकरण, जहाँ तक संभव हो, प्रत्येक अपील को उसके दाखिल होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर सुनेगा और निर्णय करेगा।
(5) अपीलीय न्यायाधिकरण इस धारा के अंतर्गत पारित प्रत्येक आदेश की एक प्रति अपीलीय प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी, या मूल निर्णय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, अपीलकर्ता और क्षेत्राधिकार आयुक्त या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त को भेजेगा।
(6) धारा 117 या धारा 118 में दिए गए प्रावधानों के अलावा, अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा अपील पर पारित आदेश अंतिम और पक्षों पर बाध्यकारी होंगे।
(2) अपीलीय न्यायाधिकरण, यदि पर्याप्त कारण बताया जाए, तो अपील की सुनवाई के किसी भी चरण में, पक्षकारों या उनमें से किसी को समय दे सकता है और लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से अपील की सुनवाई स्थगित कर सकता है:
बशर्ते कि अपील की सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष को तीन बार से अधिक स्थगन नहीं दिया जाएगा।
(3) अपीलीय न्यायाधिकरण उप-धारा (1) के तहत पारित किसी भी आदेश में संशोधन कर सकता है ताकि अभिलेख में स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली किसी भी त्रुटि को सुधारा जा सके, यदि ऐसी त्रुटि उसे स्वयं ही पता चल जाए, या आयुक्त या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त या अपील के दूसरे पक्ष द्वारा आदेश की तिथि से तीन माह की अवधि के भीतर उसके संज्ञान में लाई जाए।
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत ऐसा कोई संशोधन नहीं किया जाएगा जिससे मूल्यांकन में वृद्धि हो, रिफंड या इनपुट टैक्स क्रेडिट में कमी हो, या अन्यथा दूसरे पक्ष की देनदारी में वृद्धि हो, जब तक कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर न दिया गया हो।
(4) अपीलीय न्यायाधिकरण, जहाँ तक संभव हो, प्रत्येक अपील को उसके दाखिल होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर सुनेगा और निर्णय करेगा।
(5) अपीलीय न्यायाधिकरण इस धारा के अंतर्गत पारित प्रत्येक आदेश की एक प्रति अपीलीय प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी, या मूल निर्णय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, अपीलकर्ता और क्षेत्राधिकार आयुक्त या राज्य कर आयुक्त या केंद्र शासित प्रदेश कर आयुक्त को भेजेगा।
(6) धारा 117 या धारा 118 में दिए गए प्रावधानों के अलावा, अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा अपील पर पारित आदेश अंतिम और पक्षों पर बाध्यकारी होंगे।
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