CGST Act 117अध्याय XVIII · Appeals and Revision
धारा 117 · उच्च न्यायालय में अपील।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) अपीलीय न्यायाधिकरण की [ राज्य पीठों] या क्षेत्रीय पीठों द्वारा पारित किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है और उच्च न्यायालय ऐसी अपील स्वीकार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट है कि मामले में विधि का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत अपील उस आदेश की प्राप्ति की तिथि से एक सौ अस्सी दिनों के भीतर दाखिल की जाएगी जिसके विरुद्ध अपील की गई है, और यह ऐसे प्रपत्र में होगी, और ऐसे तरीके से सत्यापित की जाएगी जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि उच्च न्यायालय उक्त अवधि की समाप्ति के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है यदि वह संतुष्ट हो कि उक्त अवधि के भीतर अपील दायर न करने का पर्याप्त कारण था।
(3) जहाँ उच्च न्यायालय संतुष्ट हो कि किसी मामले में विधि का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है, तो वह उस प्रश्न को सूत्रबद्ध करेगा और अपील की सुनवाई केवल सूत्रबद्ध प्रश्न पर ही की जाएगी और अपील की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों को यह तर्क देने की अनुमति दी जाएगी कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल नहीं है।
बशर्ते कि इस उपधारा में कुछ भी न्यायालय की उस शक्ति को छीनने या कम करने वाला नहीं माना जाएगा जिसके तहत वह कारणों को दर्ज करते हुए, किसी अन्य महत्वपूर्ण विधि प्रश्न पर अपील की सुनवाई कर सकता है, जिसे न्यायालय ने तैयार नहीं किया है, यदि वह संतुष्ट है कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल है।
(4) उच्च न्यायालय इस प्रकार तैयार किए गए विधि के प्रश्न का निर्णय करेगा तथा उस पर ऐसा निर्णय देगा जिसमें ऐसे निर्णय के आधार शामिल होंगे तथा वह उचित समझे जाने वाला ऐसा खर्च प्रदान कर सकता है।
(5) उच्च न्यायालय किसी भी ऐसे मुद्दे का निर्धारण कर सकता है जो---
(क) राज्य पीठों या क्षेत्रीय पीठों द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है; या
(ख) उपधारा (3) में संदर्भित विधि के ऐसे प्रश्न पर निर्णय के कारण 1 [राज्य पीठों] या क्षेत्रीय पीठों द्वारा गलत तरीके से निर्धारित किया गया है।
(6) जहाँ उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर की गई है, वहाँ उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा इसकी सुनवाई की जाएगी और ऐसे न्यायाधीशों की राय या ऐसे न्यायाधीशों के बहुमत, यदि कोई हो, के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
(7) जहाँ ऐसा बहुमत न हो, वहाँ न्यायाधीश उस विधि के बिंदु को बताएँगे जिस पर वे असहमत हैं और फिर उस बिंदु पर ही उच्च न्यायालय के एक या अधिक अन्य न्यायाधीशों द्वारा मामले की सुनवाई की जाएगी और ऐसे बिंदु का निर्णय उन न्यायाधीशों के बहुमत की राय के अनुसार किया जाएगा जिन्होंने मामले की सुनवाई की है, जिनमें वे न्यायाधीश भी शामिल हैं जिन्होंने पहली बार सुनवाई की थी।
(8) जहां उच्च न्यायालय इस धारा के अंतर्गत उसके समक्ष दायर अपील में निर्णय देता है, वहां किसी भी पक्ष द्वारा निर्णय की प्रमाणित प्रति के आधार पर ऐसे निर्णय को प्रभावी किया जाएगा।
(9) इस अधिनियम में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के प्रावधान, जो उच्च न्यायालय में अपील से संबंधित हैं, इस धारा के अंतर्गत अपील के मामले में यथासंभव लागू होंगे।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत अपील उस आदेश की प्राप्ति की तिथि से एक सौ अस्सी दिनों के भीतर दाखिल की जाएगी जिसके विरुद्ध अपील की गई है, और यह ऐसे प्रपत्र में होगी, और ऐसे तरीके से सत्यापित की जाएगी जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि उच्च न्यायालय उक्त अवधि की समाप्ति के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है यदि वह संतुष्ट हो कि उक्त अवधि के भीतर अपील दायर न करने का पर्याप्त कारण था।
(3) जहाँ उच्च न्यायालय संतुष्ट हो कि किसी मामले में विधि का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल है, तो वह उस प्रश्न को सूत्रबद्ध करेगा और अपील की सुनवाई केवल सूत्रबद्ध प्रश्न पर ही की जाएगी और अपील की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों को यह तर्क देने की अनुमति दी जाएगी कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल नहीं है।
बशर्ते कि इस उपधारा में कुछ भी न्यायालय की उस शक्ति को छीनने या कम करने वाला नहीं माना जाएगा जिसके तहत वह कारणों को दर्ज करते हुए, किसी अन्य महत्वपूर्ण विधि प्रश्न पर अपील की सुनवाई कर सकता है, जिसे न्यायालय ने तैयार नहीं किया है, यदि वह संतुष्ट है कि मामले में ऐसा प्रश्न शामिल है।
(4) उच्च न्यायालय इस प्रकार तैयार किए गए विधि के प्रश्न का निर्णय करेगा तथा उस पर ऐसा निर्णय देगा जिसमें ऐसे निर्णय के आधार शामिल होंगे तथा वह उचित समझे जाने वाला ऐसा खर्च प्रदान कर सकता है।
(5) उच्च न्यायालय किसी भी ऐसे मुद्दे का निर्धारण कर सकता है जो---
(क) राज्य पीठों या क्षेत्रीय पीठों द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है; या
(ख) उपधारा (3) में संदर्भित विधि के ऐसे प्रश्न पर निर्णय के कारण 1 [राज्य पीठों] या क्षेत्रीय पीठों द्वारा गलत तरीके से निर्धारित किया गया है।
(6) जहाँ उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर की गई है, वहाँ उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा इसकी सुनवाई की जाएगी और ऐसे न्यायाधीशों की राय या ऐसे न्यायाधीशों के बहुमत, यदि कोई हो, के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
(7) जहाँ ऐसा बहुमत न हो, वहाँ न्यायाधीश उस विधि के बिंदु को बताएँगे जिस पर वे असहमत हैं और फिर उस बिंदु पर ही उच्च न्यायालय के एक या अधिक अन्य न्यायाधीशों द्वारा मामले की सुनवाई की जाएगी और ऐसे बिंदु का निर्णय उन न्यायाधीशों के बहुमत की राय के अनुसार किया जाएगा जिन्होंने मामले की सुनवाई की है, जिनमें वे न्यायाधीश भी शामिल हैं जिन्होंने पहली बार सुनवाई की थी।
(8) जहां उच्च न्यायालय इस धारा के अंतर्गत उसके समक्ष दायर अपील में निर्णय देता है, वहां किसी भी पक्ष द्वारा निर्णय की प्रमाणित प्रति के आधार पर ऐसे निर्णय को प्रभावी किया जाएगा।
(9) इस अधिनियम में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के प्रावधान, जो उच्च न्यायालय में अपील से संबंधित हैं, इस धारा के अंतर्गत अपील के मामले में यथासंभव लागू होंगे।
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