CGST Act 116अध्याय XVIII · Appeals and Revision
धारा 116 · अधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत नियुक्त अधिकारी, या अपीलीय प्राधिकारी, या अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष इस अधिनियम के तहत किसी कार्यवाही के संबंध में उपस्थित होने का हकदार है या उसे उपस्थित होना आवश्यक है, वह इस अधिनियम के तहत शपथ या प्रतिज्ञान पर व्यक्तिगत रूप से परीक्षा के लिए उपस्थित होने के अलावा, इस धारा के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित हो सकता है।
(2) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, "अधिकृत प्रतिनिधि" अभिव्यक्ति का अर्थ उप-धारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा उसकी ओर से उपस्थित होने के लिए अधिकृत व्यक्ति होगा, जो कि--
(क) उसका रिश्तेदार या नियमित कर्मचारी; या
(ख) ऐसा अधिवक्ता जो भारत के किसी भी न्यायालय में वकालत करने का हकदार हो और जिसे भारत के किसी भी न्यायालय में वकालत करने से प्रतिबंधित न किया गया हो; या
(ग) कोई भी चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट अकाउंटेंट या कंपनी सेक्रेटरी, जिसके पास प्रैक्टिस का सर्टिफिकेट हो और जिसे प्रैक्टिस करने से प्रतिबंधित न किया गया हो; या
(घ) किसी राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग या बोर्ड का कोई सेवानिवृत्त अधिकारी, जिसने सरकार के अधीन अपनी सेवा के दौरान कम से कम दो वर्ष की अवधि के लिए ग्रुप-बी राजपत्रित अधिकारी के पद से नीचे के पद पर कार्य किया हो:
बशर्ते कि ऐसा अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति या त्यागपत्र की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही में उपस्थित होने का हकदार नहीं होगा; या
(ई) कोई भी व्यक्ति जिसे संबंधित पंजीकृत व्यक्ति की ओर से माल एवं सेवा कर व्यवसायी के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया हो।
(3) कोई भी व्यक्ति,--
(क) जिसे सरकारी सेवा से बर्खास्त या हटाया गया हो; या
(ख) जो इस अधिनियम, राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत किसी कार्यवाही से संबंधित अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, या मौजूदा कानून के अंतर्गत या किसी राज्य विधानमंडल द्वारा वस्तुओं की बिक्री या वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति पर कर लगाने से संबंधित किसी अधिनियम के अंतर्गत दोषी ठहराया गया हो; या
(ग) जिसे निर्धारित प्राधिकारी द्वारा कदाचार का दोषी पाया गया हो; या
(घ) जिसे दिवालिया घोषित किया गया हो,
उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करने के लिए योग्य होगा--
(i) खंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के मामले में सभी समयों के लिए; और
(ii) खंड (d) में निर्दिष्ट व्यक्ति के मामले में दिवालियापन जारी रहने की अवधि के लिए।
(4) राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के प्रावधानों के तहत अयोग्य घोषित किया गया कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के तहत भी अयोग्य माना जाएगा।
(2) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, "अधिकृत प्रतिनिधि" अभिव्यक्ति का अर्थ उप-धारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा उसकी ओर से उपस्थित होने के लिए अधिकृत व्यक्ति होगा, जो कि--
(क) उसका रिश्तेदार या नियमित कर्मचारी; या
(ख) ऐसा अधिवक्ता जो भारत के किसी भी न्यायालय में वकालत करने का हकदार हो और जिसे भारत के किसी भी न्यायालय में वकालत करने से प्रतिबंधित न किया गया हो; या
(ग) कोई भी चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट अकाउंटेंट या कंपनी सेक्रेटरी, जिसके पास प्रैक्टिस का सर्टिफिकेट हो और जिसे प्रैक्टिस करने से प्रतिबंधित न किया गया हो; या
(घ) किसी राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग या बोर्ड का कोई सेवानिवृत्त अधिकारी, जिसने सरकार के अधीन अपनी सेवा के दौरान कम से कम दो वर्ष की अवधि के लिए ग्रुप-बी राजपत्रित अधिकारी के पद से नीचे के पद पर कार्य किया हो:
बशर्ते कि ऐसा अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति या त्यागपत्र की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही में उपस्थित होने का हकदार नहीं होगा; या
(ई) कोई भी व्यक्ति जिसे संबंधित पंजीकृत व्यक्ति की ओर से माल एवं सेवा कर व्यवसायी के रूप में कार्य करने के लिए अधिकृत किया गया हो।
(3) कोई भी व्यक्ति,--
(क) जिसे सरकारी सेवा से बर्खास्त या हटाया गया हो; या
(ख) जो इस अधिनियम, राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत किसी कार्यवाही से संबंधित अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, या मौजूदा कानून के अंतर्गत या किसी राज्य विधानमंडल द्वारा वस्तुओं की बिक्री या वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति पर कर लगाने से संबंधित किसी अधिनियम के अंतर्गत दोषी ठहराया गया हो; या
(ग) जिसे निर्धारित प्राधिकारी द्वारा कदाचार का दोषी पाया गया हो; या
(घ) जिसे दिवालिया घोषित किया गया हो,
उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करने के लिए योग्य होगा--
(i) खंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के मामले में सभी समयों के लिए; और
(ii) खंड (d) में निर्दिष्ट व्यक्ति के मामले में दिवालियापन जारी रहने की अवधि के लिए।
(4) राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के प्रावधानों के तहत अयोग्य घोषित किया गया कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के तहत भी अयोग्य माना जाएगा।
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