CGST Act 104अध्याय XVII · Advance Ruling
धारा 104 · कुछ परिस्थितियों में अग्रिम निर्णय अमान्य हो सकता है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ प्राधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी 1 [या राष्ट्रीय अपीलीय प्राधिकारी] यह पाता है कि धारा 98 की उपधारा (4) या धारा 101 की उपधारा (1) 1 [या धारा 101सी] के तहत उसके द्वारा दिया गया अग्रिम निर्णय आवेदक या अपीलकर्ता द्वारा धोखाधड़ी या महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाने या तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के द्वारा प्राप्त किया गया है, तो वह आदेश द्वारा ऐसे निर्णय को प्रारंभ से ही शून्य घोषित कर सकता है और इसके बाद इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के सभी प्रावधान आवेदक या अपीलकर्ता पर इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसा अग्रिम निर्णय कभी दिया ही न गया हो:
इस उपधारा के अंतर्गत कोई भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक या अपीलकर्ता को सुनवाई का अवसर न दिया गया हो।
स्पष्टीकरण. --- इस उपधारा के तहत आदेश की तिथि से अग्रिम निर्णय की तिथि से प्रारंभ होने वाली अवधि को धारा 73 की उपधारा (2) और (10) या धारा 74 की उपधारा (2) और (10) [या धारा 74 ए की उपधारा (2) और (7) ] में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय बाहर रखा जाएगा।
(2) उपधारा (1) के तहत दिए गए आदेश की एक प्रति आवेदक, संबंधित अधिकारी और अधिकार क्षेत्र अधिकारी को भेजी जाएगी।
इस उपधारा के अंतर्गत कोई भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक या अपीलकर्ता को सुनवाई का अवसर न दिया गया हो।
स्पष्टीकरण. --- इस उपधारा के तहत आदेश की तिथि से अग्रिम निर्णय की तिथि से प्रारंभ होने वाली अवधि को धारा 73 की उपधारा (2) और (10) या धारा 74 की उपधारा (2) और (10) [या धारा 74 ए की उपधारा (2) और (7) ] में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय बाहर रखा जाएगा।
(2) उपधारा (1) के तहत दिए गए आदेश की एक प्रति आवेदक, संबंधित अधिकारी और अधिकार क्षेत्र अधिकारी को भेजी जाएगी।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
