CGST Act 94अध्याय XVI · Liability to Pay in Certain Cases
धारा 94 · अन्य मामलों में दायित्व।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां कोई कर योग्य व्यक्ति कोई फर्म या व्यक्तियों का संघ या कोई हिंदू अविभाजित परिवार है और ऐसी फर्म, संघ या परिवार ने अपना व्यवसाय बंद कर दिया है---
(क) इस अधिनियम के तहत ऐसी फर्म, संघ या परिवार द्वारा ऐसे समापन की तिथि तक देय कर, ब्याज या जुर्माना इस प्रकार निर्धारित किया जा सकता है मानो ऐसा कोई समापन हुआ ही न हो; और
(ख) ऐसा कोई भी व्यक्ति जो ऐसे विघटन के समय ऐसी फर्म का साझेदार या ऐसे संघ या परिवार का सदस्य था, ऐसे विघटन के बावजूद, संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से, ऐसी फर्म, संघ या परिवार द्वारा निर्धारित कर और ब्याज तथा लगाए गए और देय जुर्माने के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा, चाहे ऐसा कर और ब्याज या जुर्माना ऐसे विघटन से पहले या बाद में निर्धारित किया गया हो, और उपर्युक्त के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसा प्रत्येक व्यक्ति या साझेदार या सदस्य स्वयं एक कर योग्य व्यक्ति हो।
(2) जहाँ किसी फर्म या व्यक्तियों के संघ के संविधान में परिवर्तन हुआ हो, तो फर्म के साझेदार या संघ के सदस्य, पुनर्गठन से पहले और पुनर्गठन के बाद, धारा 90 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, संयुक्त रूप से और अलग-अलग, पुनर्गठन से पहले की किसी भी अवधि के लिए ऐसी फर्म या संघ से देय कर, ब्याज या जुर्माना अदा करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
(3) उपधारा (1) के प्रावधान, जहाँ तक संभव हो, वहाँ लागू होंगे जहाँ कर योग्य व्यक्ति, जो कि फर्म या व्यक्तियों का संघ है, भंग हो गया हो या जहाँ कर योग्य व्यक्ति, जो कि हिंदू अविभाजित परिवार है, ने अपने द्वारा चलाए जा रहे व्यवसाय के संबंध में विभाजन किया हो, और तदनुसार उस उपधारा में व्यवसाय बंद करने के संदर्भों को विघटन या विभाजन के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण .--- इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,---
(i) सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) के प्रावधानों के तहत गठित और पंजीकृत "सीमित देयता भागीदारी" को भी फर्म माना जाएगा;
(ii) "न्यायालय" से तात्पर्य जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय से है।
(क) इस अधिनियम के तहत ऐसी फर्म, संघ या परिवार द्वारा ऐसे समापन की तिथि तक देय कर, ब्याज या जुर्माना इस प्रकार निर्धारित किया जा सकता है मानो ऐसा कोई समापन हुआ ही न हो; और
(ख) ऐसा कोई भी व्यक्ति जो ऐसे विघटन के समय ऐसी फर्म का साझेदार या ऐसे संघ या परिवार का सदस्य था, ऐसे विघटन के बावजूद, संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से, ऐसी फर्म, संघ या परिवार द्वारा निर्धारित कर और ब्याज तथा लगाए गए और देय जुर्माने के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा, चाहे ऐसा कर और ब्याज या जुर्माना ऐसे विघटन से पहले या बाद में निर्धारित किया गया हो, और उपर्युक्त के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रावधान, जहां तक संभव हो, इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसा प्रत्येक व्यक्ति या साझेदार या सदस्य स्वयं एक कर योग्य व्यक्ति हो।
(2) जहाँ किसी फर्म या व्यक्तियों के संघ के संविधान में परिवर्तन हुआ हो, तो फर्म के साझेदार या संघ के सदस्य, पुनर्गठन से पहले और पुनर्गठन के बाद, धारा 90 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, संयुक्त रूप से और अलग-अलग, पुनर्गठन से पहले की किसी भी अवधि के लिए ऐसी फर्म या संघ से देय कर, ब्याज या जुर्माना अदा करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
(3) उपधारा (1) के प्रावधान, जहाँ तक संभव हो, वहाँ लागू होंगे जहाँ कर योग्य व्यक्ति, जो कि फर्म या व्यक्तियों का संघ है, भंग हो गया हो या जहाँ कर योग्य व्यक्ति, जो कि हिंदू अविभाजित परिवार है, ने अपने द्वारा चलाए जा रहे व्यवसाय के संबंध में विभाजन किया हो, और तदनुसार उस उपधारा में व्यवसाय बंद करने के संदर्भों को विघटन या विभाजन के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण .--- इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,---
(i) सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) के प्रावधानों के तहत गठित और पंजीकृत "सीमित देयता भागीदारी" को भी फर्म माना जाएगा;
(ii) "न्यायालय" से तात्पर्य जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय से है।
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