CGST Act 56अध्याय XI · Refunds
धारा 56 · विलंबित धनवापसी पर ब्याज।
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यदि धारा 54 की उपधारा (5) के अंतर्गत किसी आवेदक को कर वापसी का आदेश दिया गया हो और वह कर उस धारा की उपधारा (1) के अंतर्गत आवेदन प्राप्त होने की तिथि से साठ दिनों के भीतर वापस न किया जाए, तो ऐसी वापसी पर छह प्रतिशत से अधिक की दर से ब्याज देय होगा, जैसा कि परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में निर्दिष्ट किया जा सकता है । [ऐसे आवेदन की प्राप्ति की तिथि से कर वापसी की तिथि तक साठ दिनों से अधिक की विलंब अवधि के लिए, ब्याज की गणना ऐसे तरीके से और ऐसी शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन की जाएगी जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है]।
बशर्ते कि यदि किसी निर्णय प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय द्वारा पारित किसी ऐसे आदेश से धन वापसी का दावा उत्पन्न होता है जो अंतिम हो चुका है और ऐसे आदेश के परिणामस्वरूप दाखिल किए गए आवेदन की प्राप्ति तिथि से साठ दिनों के भीतर धन वापसी नहीं की जाती है, तो परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा अधिसूचित दर से नौ प्रतिशत से अधिक ब्याज, आवेदन की प्राप्ति तिथि से साठ दिनों की समाप्ति के तुरंत बाद की तिथि से धन वापसी की तिथि तक देय होगा।
स्पष्टीकरण .--- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहाँ अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय द्वारा धारा 54 की उपधारा (5) के अंतर्गत उचित अधिकारी के आदेश के विरुद्ध वापसी का कोई आदेश दिया जाता है, तो अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय द्वारा पारित आदेश उक्त उपधारा (5) के अंतर्गत पारित आदेश माना जाएगा।
बशर्ते कि यदि किसी निर्णय प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय द्वारा पारित किसी ऐसे आदेश से धन वापसी का दावा उत्पन्न होता है जो अंतिम हो चुका है और ऐसे आदेश के परिणामस्वरूप दाखिल किए गए आवेदन की प्राप्ति तिथि से साठ दिनों के भीतर धन वापसी नहीं की जाती है, तो परिषद की अनुशंसाओं पर सरकार द्वारा अधिसूचित दर से नौ प्रतिशत से अधिक ब्याज, आवेदन की प्राप्ति तिथि से साठ दिनों की समाप्ति के तुरंत बाद की तिथि से धन वापसी की तिथि तक देय होगा।
स्पष्टीकरण .--- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहाँ अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय द्वारा धारा 54 की उपधारा (5) के अंतर्गत उचित अधिकारी के आदेश के विरुद्ध वापसी का कोई आदेश दिया जाता है, तो अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय द्वारा पारित आदेश उक्त उपधारा (5) के अंतर्गत पारित आदेश माना जाएगा।
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