CGST Act 54अध्याय XI · Refunds
धारा 54 · कर की वापसी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति जो किसी कर और उस पर भुगतान किए गए ब्याज, यदि कोई हो, या उसके द्वारा भुगतान की गई किसी अन्य राशि की वापसी का दावा करता है, वह संबंधित तिथि से दो वर्ष की समाप्ति से पहले निर्धारित प्रपत्र और तरीके से आवेदन कर सकता है:
बशर्ते कि पंजीकृत व्यक्ति, धारा 49 की उपधारा (6) के प्रावधानों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में किसी शेष राशि की वापसी का दावा करते हुए, ऐसी वापसी का दावा 1 [ऐसे रूप और] तरीके से कर सकता है जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(2) संयुक्त राष्ट्र संगठन की कोई विशेष एजेंसी या संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार और उन्मुक्ति) अधिनियम, 1947 (46 ऑफ 1947) के तहत अधिसूचित कोई बहुपक्षीय वित्तीय संस्था एवं संगठन, विदेशी देशों का वाणिज्य दूतावास या दूतावास या धारा 55 के तहत अधिसूचित कोई अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग, जो माल या सेवाओं या दोनों की आवक आपूर्ति पर भुगतान किए गए कर की वापसी का हकदार है, ऐसी वापसी के लिए, निर्धारित प्रपत्र और तरीके से, उस तिमाही के अंतिम दिन से 2 [दो वर्ष] की समाप्ति से पहले आवेदन कर सकता है जिसमें ऐसी आपूर्ति प्राप्त हुई थी।
(3) उपधारा (10) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, एक पंजीकृत व्यक्ति किसी भी कर अवधि के अंत में किसी भी अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी का दावा कर सकता है:
बशर्ते कि निम्नलिखित मामलों के अलावा किसी भी स्थिति में अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी---
(i) कर भुगतान के बिना की गई शून्य दर वाली आपूर्ति;
(ii) जहां इनपुट पर कर की दर आउटपुट आपूर्ति (शून्य दर वाली या पूर्णतः कर मुक्त आपूर्ति को छोड़कर) पर कर की दर से अधिक होने के कारण ऋण संचित हुआ हो, सिवाय उन वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के जिन्हें परिषद की सिफारिशों पर सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है:
3 * * * * *
इसके अलावा, इनपुट टैक्स क्रेडिट की कोई वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी, यदि वस्तुओं या सेवाओं या दोनों का आपूर्तिकर्ता केंद्रीय कर के संबंध में ड्रॉबैक का लाभ उठाता है या ऐसी आपूर्तियों पर भुगतान किए गए एकीकृत कर की वापसी का दावा करता है।
(4) आवेदन के साथ निम्नलिखित संलग्न होने चाहिए---
(क) आवेदक को धन वापसी देय होने का प्रमाण सिद्ध करने हेतु निर्धारित दस्तावेजी साक्ष्य; और
(ख) आवेदक द्वारा ऐसे दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य (धारा 33 में निर्दिष्ट दस्तावेजों सहित) प्रस्तुत किए जाएं, जिनसे यह सिद्ध हो सके कि कर और उस पर देय ब्याज, यदि कोई हो, या ऐसी वापसी का दावा की गई किसी अन्य राशि का भुगतान उससे किया गया था या उसके द्वारा किया गया था, और ऐसे कर और ब्याज का भार किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाला गया था।
बशर्ते कि जहां धनवापसी के रूप में दावा की गई राशि दो लाख रुपये से कम है, वहां आवेदक के लिए कोई दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा, बल्कि वह अपने पास उपलब्ध दस्तावेजी या अन्य साक्ष्यों के आधार पर एक घोषणा प्रस्तुत कर सकता है, जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि ऐसे कर और ब्याज का भार किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाला गया था।
(5) यदि ऐसा कोई आवेदन प्राप्त होने पर उचित अधिकारी संतुष्ट हो कि वापसी के रूप में दावा की गई राशि का पूरा या आंशिक भाग वापसी योग्य है, तो वह तदनुसार आदेश दे सकता है और इस प्रकार निर्धारित राशि धारा 57 में निर्दिष्ट निधि में जमा की जाएगी।
(6) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, उचित अधिकारी, पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा शून्य-रेटेड माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के कारण वापसी के किसी दावे के मामले में, ऐसे पंजीकृत व्यक्तियों की श्रेणी को छोड़कर, जिन्हें सरकार परिषद की सिफारिशों पर अधिसूचित कर सकती है, अनंतिम आधार पर दावा की गई कुल राशि का नब्बे प्रतिशत वापस कर सकता है, 4 *** ऐसे तरीके से और ऐसी शर्तों, सीमाओं और सुरक्षा उपायों के अधीन रहते हुए जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, और उसके बाद आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के विधिवत सत्यापन के बाद वापसी के दावे के अंतिम निपटान के लिए उपधारा (5) के तहत आदेश दे सकता है।
(7) उचित अधिकारी उपधारा (5) के तहत आदेश आवेदन प्राप्त होने की तिथि से साठ दिनों के भीतर जारी करेगा, बशर्ते आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण हो।
(8) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, वापसी योग्य राशि निधि में जमा करने के बजाय आवेदक को भुगतान की जाएगी, यदि ऐसी राशि निम्नलिखित से संबंधित है---
(क) वस्तुओं या सेवाओं या दोनों के निर्यात पर या ऐसे निर्यात करने में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं पर भुगतान किए गए कर की वापसी;
(ख) उपधारा (3) के अधीन अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी;
(ग) ऐसी आपूर्ति पर भुगतान किए गए कर की वापसी जो पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रदान नहीं की गई है और जिसके लिए चालान जारी नहीं किया गया है, या जहां वापसी वाउचर जारी किया गया है;
(घ) धारा 77 के अनुसरण में कर की वापसी;
(ई) आवेदक द्वारा भुगतान किया गया कर और ब्याज, यदि कोई हो, या कोई अन्य राशि, यदि उसने ऐसे कर और ब्याज का भार किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाला हो; या
(f) आवेदकों के ऐसे अन्य वर्ग द्वारा वहन किया जाने वाला कर या ब्याज, जिसे सरकार परिषद की अनुशंसाओं पर अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है।
6 [(8ए) सरकार राज्य कर की वापसी का वितरण ऐसे तरीके से कर सकती है जैसा कि निर्धारित किया जाए।]
(9) अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री, आदेश या निर्देश में या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में या उस समय लागू किसी अन्य कानून में इसके विपरीत कुछ भी निहित होने के बावजूद, उप-धारा (8) के प्रावधानों के अनुसार ही कोई वापसी की जाएगी।
(10) जहां किसी पंजीकृत व्यक्ति को कोई धनवापसी देय हो, जिसने कोई रिटर्न प्रस्तुत करने में चूक की हो या जिसे कोई कर, ब्याज या जुर्माना अदा करना हो, और जिसे किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या अपीलीय प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट तिथि तक स्थगित न किया गया हो, तो उचित अधिकारी---
(क) उक्त व्यक्ति द्वारा रिटर्न प्रस्तुत करने या कर, ब्याज या जुर्माना अदा करने तक देय धनवापसी का भुगतान रोक दिया जाए;
(ख) देय धनवापसी में से कोई कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क या कोई अन्य राशि काट ली जाएगी, जिसका भुगतान कर योग्य व्यक्ति को करना है, लेकिन जो इस अधिनियम या मौजूदा कानून के तहत अदा नहीं की गई है।
स्पष्टीकरण .--- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "निर्दिष्ट तिथि" अभिव्यक्ति का अर्थ इस अधिनियम के तहत अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि होगा।
(11) जहाँ किसी वापसी का आदेश अपील या आगे की कार्यवाही का विषय है, या जहाँ इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अन्य कार्यवाही लंबित है, और आयुक्त की राय है कि ऐसे धनवापसी का अनुदान उक्त अपील या अन्य कार्यवाही में राजस्व को कदाचार या धोखाधड़ी के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है, तो वह कर योग्य व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद, धनवापसी को तब तक रोक सकता है जब तक वह निर्धारित करे।
(12) जहां उपधारा (11) के तहत वापसी रोकी जाती है, वहां धारा 56 में निहित किसी भी बात के बावजूद, कर योग्य व्यक्ति छह प्रतिशत से अधिक की दर से ब्याज का हकदार होगा, जैसा कि परिषद की सिफारिशों पर अधिसूचित किया जा सकता है, यदि अपील या आगे की कार्यवाही के परिणामस्वरूप वह वापसी का हकदार हो जाता है।
(13) इस धारा में किसी विपरीत प्रावधान के होते हुए भी, धारा 27 की उपधारा (2) के अंतर्गत आकस्मिक कर योग्य व्यक्ति या अनिवासी कर योग्य व्यक्ति द्वारा जमा की गई अग्रिम कर की राशि तब तक वापस नहीं की जाएगी, जब तक कि उस व्यक्ति ने उस पूरी अवधि के लिए, जिसके लिए उसे जारी किया गया पंजीकरण प्रमाण पत्र वैध रहा हो, धारा 39 के अंतर्गत अपेक्षित सभी रिटर्न प्रस्तुत न कर दिए हों।
(14) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (5) या उपधारा (6) के तहत आवेदक को कोई धनवापसी नहीं दी जाएगी, यदि राशि एक हजार रुपये से कम हो।
8 [(15) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, शून्य दर वाली वस्तुओं की आपूर्ति के कारण अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट या शून्य दर वाली वस्तुओं की आपूर्ति के कारण भुगतान किए गए एकीकृत कर की कोई वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी, जहां ऐसी शून्य दर वाली वस्तुओं की आपूर्ति निर्यात शुल्क के अधीन हो।]
स्पष्टीकरण .--- इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए,---
(1) "रिफंड" में वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की शून्य-रेटेड आपूर्ति पर या ऐसी शून्य-रेटेड आपूर्ति करने में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं पर भुगतान किए गए कर की वापसी, या डीम्ड निर्यात मानी जाने वाली वस्तुओं की आपूर्ति पर कर की वापसी, या उपधारा (3) के तहत प्रदान किए गए अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी शामिल है।
(2) "प्रासंगिक तिथि" से तात्पर्य है---
(क) भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं के मामले में, जहां वस्तुओं के संबंध में या, जैसा भी मामला हो, ऐसी वस्तुओं में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, ---
(i) यदि माल का निर्यात समुद्र या वायु मार्ग से किया जाता है, तो वह तिथि जिस पर वह जहाज या विमान जिसमें ऐसा माल लादा गया है, भारत से रवाना होता है; या
(ii) यदि माल का निर्यात भूमि मार्ग से किया जाता है, तो वह तिथि जिस पर ऐसा माल सीमा पार करता है; या
(iii) यदि माल डाक द्वारा निर्यात किया जाता है, तो संबंधित डाकघर द्वारा भारत के बाहर किसी स्थान पर माल भेजने की तिथि;
(ख) माल की आपूर्ति के मामले में, जिसे मानित निर्यात माना जाता है और जहां माल के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, वह तिथि जिस पर ऐसे मानित निर्यात से संबंधित विवरण प्रस्तुत किया जाता है;
9 [(ख) किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र डेवलपर या विशेष आर्थिक क्षेत्र इकाई को माल या सेवाओं या दोनों की शून्य-रेटेड आपूर्ति के मामले में, जहां ऐसी आपूर्तियों के संबंध में या, जैसा भी मामला हो, ऐसी आपूर्तियों में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, ऐसी आपूर्तियों के संबंध में धारा 39 के तहत रिटर्न प्रस्तुत करने की नियत तिथि; ]
(ग) भारत से निर्यात की जाने वाली सेवाओं के मामले में, जहां सेवाओं के संबंध में या, जैसा भी मामला हो, ऐसी सेवाओं में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, तो वह तिथि---
(i) परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में भुगतान की प्राप्ति, 10 [या भारतीय रुपये में, जहाँ भी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमति दी गई हो] जहाँ सेवाओं की आपूर्ति ऐसे भुगतान की प्राप्ति से पहले पूरी हो चुकी हो; या
(ii) इनवॉइस जारी करना, जहां सेवाओं के लिए भुगतान इनवॉइस जारी करने की तिथि से पहले अग्रिम रूप से प्राप्त हो चुका हो;
(घ) यदि अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय के निर्णय, आदेश या निर्देश के परिणामस्वरूप कर वापसी योग्य हो जाता है, तो ऐसे निर्णय, आदेश या निर्देश की सूचना की तिथि;
11 [(ई) उपधारा (3) के प्रथम परंतुक के खंड (ii) के अधीन अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी के मामले में, धारा 39 के तहत उस अवधि के लिए रिटर्न प्रस्तुत करने की नियत तिथि जिसमें वापसी का ऐसा दावा उत्पन्न होता है;]
(f) यदि इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अधीन कर का भुगतान अनंतिम रूप से किया जाता है, तो अंतिम मूल्यांकन के बाद कर के समायोजन की तिथि;
(g) आपूर्तिकर्ता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के मामले में, उस व्यक्ति द्वारा माल या सेवाओं या दोनों की प्राप्ति की तिथि; और
(h) अन्य किसी मामले में, कर भुगतान की तिथि।
बशर्ते कि पंजीकृत व्यक्ति, धारा 49 की उपधारा (6) के प्रावधानों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में किसी शेष राशि की वापसी का दावा करते हुए, ऐसी वापसी का दावा 1 [ऐसे रूप और] तरीके से कर सकता है जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(2) संयुक्त राष्ट्र संगठन की कोई विशेष एजेंसी या संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार और उन्मुक्ति) अधिनियम, 1947 (46 ऑफ 1947) के तहत अधिसूचित कोई बहुपक्षीय वित्तीय संस्था एवं संगठन, विदेशी देशों का वाणिज्य दूतावास या दूतावास या धारा 55 के तहत अधिसूचित कोई अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग, जो माल या सेवाओं या दोनों की आवक आपूर्ति पर भुगतान किए गए कर की वापसी का हकदार है, ऐसी वापसी के लिए, निर्धारित प्रपत्र और तरीके से, उस तिमाही के अंतिम दिन से 2 [दो वर्ष] की समाप्ति से पहले आवेदन कर सकता है जिसमें ऐसी आपूर्ति प्राप्त हुई थी।
(3) उपधारा (10) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, एक पंजीकृत व्यक्ति किसी भी कर अवधि के अंत में किसी भी अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी का दावा कर सकता है:
बशर्ते कि निम्नलिखित मामलों के अलावा किसी भी स्थिति में अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी---
(i) कर भुगतान के बिना की गई शून्य दर वाली आपूर्ति;
(ii) जहां इनपुट पर कर की दर आउटपुट आपूर्ति (शून्य दर वाली या पूर्णतः कर मुक्त आपूर्ति को छोड़कर) पर कर की दर से अधिक होने के कारण ऋण संचित हुआ हो, सिवाय उन वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के जिन्हें परिषद की सिफारिशों पर सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है:
3 * * * * *
इसके अलावा, इनपुट टैक्स क्रेडिट की कोई वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी, यदि वस्तुओं या सेवाओं या दोनों का आपूर्तिकर्ता केंद्रीय कर के संबंध में ड्रॉबैक का लाभ उठाता है या ऐसी आपूर्तियों पर भुगतान किए गए एकीकृत कर की वापसी का दावा करता है।
(4) आवेदन के साथ निम्नलिखित संलग्न होने चाहिए---
(क) आवेदक को धन वापसी देय होने का प्रमाण सिद्ध करने हेतु निर्धारित दस्तावेजी साक्ष्य; और
(ख) आवेदक द्वारा ऐसे दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य (धारा 33 में निर्दिष्ट दस्तावेजों सहित) प्रस्तुत किए जाएं, जिनसे यह सिद्ध हो सके कि कर और उस पर देय ब्याज, यदि कोई हो, या ऐसी वापसी का दावा की गई किसी अन्य राशि का भुगतान उससे किया गया था या उसके द्वारा किया गया था, और ऐसे कर और ब्याज का भार किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाला गया था।
बशर्ते कि जहां धनवापसी के रूप में दावा की गई राशि दो लाख रुपये से कम है, वहां आवेदक के लिए कोई दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा, बल्कि वह अपने पास उपलब्ध दस्तावेजी या अन्य साक्ष्यों के आधार पर एक घोषणा प्रस्तुत कर सकता है, जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि ऐसे कर और ब्याज का भार किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाला गया था।
(5) यदि ऐसा कोई आवेदन प्राप्त होने पर उचित अधिकारी संतुष्ट हो कि वापसी के रूप में दावा की गई राशि का पूरा या आंशिक भाग वापसी योग्य है, तो वह तदनुसार आदेश दे सकता है और इस प्रकार निर्धारित राशि धारा 57 में निर्दिष्ट निधि में जमा की जाएगी।
(6) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, उचित अधिकारी, पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा शून्य-रेटेड माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति के कारण वापसी के किसी दावे के मामले में, ऐसे पंजीकृत व्यक्तियों की श्रेणी को छोड़कर, जिन्हें सरकार परिषद की सिफारिशों पर अधिसूचित कर सकती है, अनंतिम आधार पर दावा की गई कुल राशि का नब्बे प्रतिशत वापस कर सकता है, 4 *** ऐसे तरीके से और ऐसी शर्तों, सीमाओं और सुरक्षा उपायों के अधीन रहते हुए जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, और उसके बाद आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के विधिवत सत्यापन के बाद वापसी के दावे के अंतिम निपटान के लिए उपधारा (5) के तहत आदेश दे सकता है।
(7) उचित अधिकारी उपधारा (5) के तहत आदेश आवेदन प्राप्त होने की तिथि से साठ दिनों के भीतर जारी करेगा, बशर्ते आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण हो।
(8) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, वापसी योग्य राशि निधि में जमा करने के बजाय आवेदक को भुगतान की जाएगी, यदि ऐसी राशि निम्नलिखित से संबंधित है---
(क) वस्तुओं या सेवाओं या दोनों के निर्यात पर या ऐसे निर्यात करने में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं पर भुगतान किए गए कर की वापसी;
(ख) उपधारा (3) के अधीन अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी;
(ग) ऐसी आपूर्ति पर भुगतान किए गए कर की वापसी जो पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रदान नहीं की गई है और जिसके लिए चालान जारी नहीं किया गया है, या जहां वापसी वाउचर जारी किया गया है;
(घ) धारा 77 के अनुसरण में कर की वापसी;
(ई) आवेदक द्वारा भुगतान किया गया कर और ब्याज, यदि कोई हो, या कोई अन्य राशि, यदि उसने ऐसे कर और ब्याज का भार किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाला हो; या
(f) आवेदकों के ऐसे अन्य वर्ग द्वारा वहन किया जाने वाला कर या ब्याज, जिसे सरकार परिषद की अनुशंसाओं पर अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है।
6 [(8ए) सरकार राज्य कर की वापसी का वितरण ऐसे तरीके से कर सकती है जैसा कि निर्धारित किया जाए।]
(9) अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री, आदेश या निर्देश में या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में या उस समय लागू किसी अन्य कानून में इसके विपरीत कुछ भी निहित होने के बावजूद, उप-धारा (8) के प्रावधानों के अनुसार ही कोई वापसी की जाएगी।
(10) जहां किसी पंजीकृत व्यक्ति को कोई धनवापसी देय हो, जिसने कोई रिटर्न प्रस्तुत करने में चूक की हो या जिसे कोई कर, ब्याज या जुर्माना अदा करना हो, और जिसे किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या अपीलीय प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट तिथि तक स्थगित न किया गया हो, तो उचित अधिकारी---
(क) उक्त व्यक्ति द्वारा रिटर्न प्रस्तुत करने या कर, ब्याज या जुर्माना अदा करने तक देय धनवापसी का भुगतान रोक दिया जाए;
(ख) देय धनवापसी में से कोई कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क या कोई अन्य राशि काट ली जाएगी, जिसका भुगतान कर योग्य व्यक्ति को करना है, लेकिन जो इस अधिनियम या मौजूदा कानून के तहत अदा नहीं की गई है।
स्पष्टीकरण .--- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "निर्दिष्ट तिथि" अभिव्यक्ति का अर्थ इस अधिनियम के तहत अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि होगा।
(11) जहाँ किसी वापसी का आदेश अपील या आगे की कार्यवाही का विषय है, या जहाँ इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अन्य कार्यवाही लंबित है, और आयुक्त की राय है कि ऐसे धनवापसी का अनुदान उक्त अपील या अन्य कार्यवाही में राजस्व को कदाचार या धोखाधड़ी के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है, तो वह कर योग्य व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद, धनवापसी को तब तक रोक सकता है जब तक वह निर्धारित करे।
(12) जहां उपधारा (11) के तहत वापसी रोकी जाती है, वहां धारा 56 में निहित किसी भी बात के बावजूद, कर योग्य व्यक्ति छह प्रतिशत से अधिक की दर से ब्याज का हकदार होगा, जैसा कि परिषद की सिफारिशों पर अधिसूचित किया जा सकता है, यदि अपील या आगे की कार्यवाही के परिणामस्वरूप वह वापसी का हकदार हो जाता है।
(13) इस धारा में किसी विपरीत प्रावधान के होते हुए भी, धारा 27 की उपधारा (2) के अंतर्गत आकस्मिक कर योग्य व्यक्ति या अनिवासी कर योग्य व्यक्ति द्वारा जमा की गई अग्रिम कर की राशि तब तक वापस नहीं की जाएगी, जब तक कि उस व्यक्ति ने उस पूरी अवधि के लिए, जिसके लिए उसे जारी किया गया पंजीकरण प्रमाण पत्र वैध रहा हो, धारा 39 के अंतर्गत अपेक्षित सभी रिटर्न प्रस्तुत न कर दिए हों।
(14) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (5) या उपधारा (6) के तहत आवेदक को कोई धनवापसी नहीं दी जाएगी, यदि राशि एक हजार रुपये से कम हो।
8 [(15) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, शून्य दर वाली वस्तुओं की आपूर्ति के कारण अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट या शून्य दर वाली वस्तुओं की आपूर्ति के कारण भुगतान किए गए एकीकृत कर की कोई वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी, जहां ऐसी शून्य दर वाली वस्तुओं की आपूर्ति निर्यात शुल्क के अधीन हो।]
स्पष्टीकरण .--- इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए,---
(1) "रिफंड" में वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की शून्य-रेटेड आपूर्ति पर या ऐसी शून्य-रेटेड आपूर्ति करने में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं पर भुगतान किए गए कर की वापसी, या डीम्ड निर्यात मानी जाने वाली वस्तुओं की आपूर्ति पर कर की वापसी, या उपधारा (3) के तहत प्रदान किए गए अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी शामिल है।
(2) "प्रासंगिक तिथि" से तात्पर्य है---
(क) भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं के मामले में, जहां वस्तुओं के संबंध में या, जैसा भी मामला हो, ऐसी वस्तुओं में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, ---
(i) यदि माल का निर्यात समुद्र या वायु मार्ग से किया जाता है, तो वह तिथि जिस पर वह जहाज या विमान जिसमें ऐसा माल लादा गया है, भारत से रवाना होता है; या
(ii) यदि माल का निर्यात भूमि मार्ग से किया जाता है, तो वह तिथि जिस पर ऐसा माल सीमा पार करता है; या
(iii) यदि माल डाक द्वारा निर्यात किया जाता है, तो संबंधित डाकघर द्वारा भारत के बाहर किसी स्थान पर माल भेजने की तिथि;
(ख) माल की आपूर्ति के मामले में, जिसे मानित निर्यात माना जाता है और जहां माल के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, वह तिथि जिस पर ऐसे मानित निर्यात से संबंधित विवरण प्रस्तुत किया जाता है;
9 [(ख) किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र डेवलपर या विशेष आर्थिक क्षेत्र इकाई को माल या सेवाओं या दोनों की शून्य-रेटेड आपूर्ति के मामले में, जहां ऐसी आपूर्तियों के संबंध में या, जैसा भी मामला हो, ऐसी आपूर्तियों में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, ऐसी आपूर्तियों के संबंध में धारा 39 के तहत रिटर्न प्रस्तुत करने की नियत तिथि; ]
(ग) भारत से निर्यात की जाने वाली सेवाओं के मामले में, जहां सेवाओं के संबंध में या, जैसा भी मामला हो, ऐसी सेवाओं में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं के संबंध में भुगतान किए गए कर की वापसी उपलब्ध है, तो वह तिथि---
(i) परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में भुगतान की प्राप्ति, 10 [या भारतीय रुपये में, जहाँ भी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमति दी गई हो] जहाँ सेवाओं की आपूर्ति ऐसे भुगतान की प्राप्ति से पहले पूरी हो चुकी हो; या
(ii) इनवॉइस जारी करना, जहां सेवाओं के लिए भुगतान इनवॉइस जारी करने की तिथि से पहले अग्रिम रूप से प्राप्त हो चुका हो;
(घ) यदि अपीलीय प्राधिकारी, अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय के निर्णय, आदेश या निर्देश के परिणामस्वरूप कर वापसी योग्य हो जाता है, तो ऐसे निर्णय, आदेश या निर्देश की सूचना की तिथि;
11 [(ई) उपधारा (3) के प्रथम परंतुक के खंड (ii) के अधीन अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी के मामले में, धारा 39 के तहत उस अवधि के लिए रिटर्न प्रस्तुत करने की नियत तिथि जिसमें वापसी का ऐसा दावा उत्पन्न होता है;]
(f) यदि इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अधीन कर का भुगतान अनंतिम रूप से किया जाता है, तो अंतिम मूल्यांकन के बाद कर के समायोजन की तिथि;
(g) आपूर्तिकर्ता के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के मामले में, उस व्यक्ति द्वारा माल या सेवाओं या दोनों की प्राप्ति की तिथि; और
(h) अन्य किसी मामले में, कर भुगतान की तिथि।
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