CGST Act 13अध्याय IV · Time and Value of Supply
धारा 13 · सेवाओं की आपूर्ति का समय।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) सेवाओं पर कर का भुगतान करने की देयता आपूर्ति के समय उत्पन्न होगी, जैसा कि इस धारा के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
(2) सेवाओं की आपूर्ति का समय निम्नलिखित तिथियों में से जो भी पहले हो, वह होगा, अर्थात्:---
(क) आपूर्तिकर्ता द्वारा चालान जारी करने की तिथि, यदि चालान धारा 31 के अंतर्गत निर्धारित अवधि के भीतर जारी किया गया हो, या भुगतान प्राप्ति की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो; या
(ख) सेवा प्रदान करने की तिथि, यदि चालान धारा 31 के अंतर्गत निर्धारित अवधि के भीतर जारी नहीं किया जाता है, या भुगतान प्राप्त होने की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो; या
(ग) वह तिथि जिस पर प्राप्तकर्ता अपने लेखा बही में सेवाओं की प्राप्ति दर्शाता है, उस स्थिति में जहां खंड (क) या खंड (ख) के प्रावधान लागू नहीं होते हैं:
बशर्ते कि जहां कर योग्य सेवा के आपूर्तिकर्ता को कर चालान में दर्शाई गई राशि से एक हजार रुपये तक की अतिरिक्त राशि प्राप्त होती है, तो उक्त आपूर्तिकर्ता के विकल्प पर, ऐसी अतिरिक्त राशि की सीमा तक आपूर्ति का समय ऐसी अतिरिक्त राशि से संबंधित चालान जारी करने की तिथि होगी।
स्पष्टीकरण .--- खंड (क) और (ख) के प्रयोजनों के लिए ---
(i) आपूर्ति को उस सीमा तक किया हुआ माना जाएगा जिस सीमा तक वह चालान या, जैसा भी मामला हो, भुगतान द्वारा कवर की गई है;
(ii) "भुगतान प्राप्ति की तिथि" वह तिथि होगी जिस दिन भुगतान आपूर्तिकर्ता के बहीखातों में दर्ज किया जाता है या वह तिथि जिस दिन भुगतान उसके बैंक खाते में जमा किया जाता है, इनमें से जो भी पहले हो।
(3) उन आपूर्तियों के मामले में जिन पर कर रिवर्स चार्ज आधार पर भुगतान किया जाता है या भुगतान किया जाना है, आपूर्ति का समय निम्नलिखित तिथियों में से जो भी पहले हो, वह होगा, अर्थात्:---
(क) प्राप्तकर्ता के बहीखातों में दर्ज भुगतान की तिथि या उसके बैंक खाते से भुगतान डेबिट होने की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो; या
(ख) चालान या उसके बदले में किसी अन्य दस्तावेज़, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए, जारी करने की तिथि से साठ दिनों के ठीक बाद की तिथि 2 [आपूर्तिकर्ता द्वारा, उन मामलों में जहां आपूर्तिकर्ता द्वारा चालान जारी करना आवश्यक है; या]
3 [(सी) प्राप्तकर्ता द्वारा चालान जारी करने की तिथि, उन मामलों में जहां चालान प्राप्तकर्ता द्वारा जारी किया जाना है:]
बशर्ते कि जहां खंड (क) या खंड (ख) , 3 [या खंड (ग) ] के तहत आपूर्ति का समय निर्धारित करना संभव न हो, वहां आपूर्ति का समय आपूर्ति प्राप्तकर्ता के लेखा बही में प्रविष्टि की तिथि होगी:
इसके अलावा, यदि संबद्ध उद्यमों द्वारा आपूर्ति की जाती है और सेवा प्रदाता भारत से बाहर स्थित है, तो आपूर्ति का समय आपूर्ति प्राप्तकर्ता के बहीखातों में प्रविष्टि की तिथि या भुगतान की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो, होगी।
(4) आपूर्तिकर्ता द्वारा वाउचरों की आपूर्ति के मामले में, आपूर्ति का समय होगा---
(क) वाउचर जारी करने की तिथि, यदि उस समय आपूर्ति की पहचान की जा सकती है; या
(ख) अन्य सभी मामलों में वाउचर के मोचन की तिथि।
(5) जहाँ उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) के प्रावधानों के तहत आपूर्ति का समय निर्धारित करना संभव न हो, वहाँ आपूर्ति का समय---
(क) यदि आवधिक रिटर्न दाखिल करना हो, तो वह तिथि होगी जिस पर ऐसा रिटर्न दाखिल किया जाना है; या
(ख) किसी अन्य मामले में, वह तिथि होगी जिस दिन कर का भुगतान किया जाता है।
(6) आपूर्ति का समय, जहां तक ब्याज, विलंब शुल्क या किसी प्रतिफल के विलंबित भुगतान के लिए दंड के रूप में आपूर्ति के मूल्य में वृद्धि से संबंधित है, वह तिथि होगी जिस दिन आपूर्तिकर्ता को मूल्य में ऐसी वृद्धि प्राप्त होती है।
(2) सेवाओं की आपूर्ति का समय निम्नलिखित तिथियों में से जो भी पहले हो, वह होगा, अर्थात्:---
(क) आपूर्तिकर्ता द्वारा चालान जारी करने की तिथि, यदि चालान धारा 31 के अंतर्गत निर्धारित अवधि के भीतर जारी किया गया हो, या भुगतान प्राप्ति की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो; या
(ख) सेवा प्रदान करने की तिथि, यदि चालान धारा 31 के अंतर्गत निर्धारित अवधि के भीतर जारी नहीं किया जाता है, या भुगतान प्राप्त होने की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो; या
(ग) वह तिथि जिस पर प्राप्तकर्ता अपने लेखा बही में सेवाओं की प्राप्ति दर्शाता है, उस स्थिति में जहां खंड (क) या खंड (ख) के प्रावधान लागू नहीं होते हैं:
बशर्ते कि जहां कर योग्य सेवा के आपूर्तिकर्ता को कर चालान में दर्शाई गई राशि से एक हजार रुपये तक की अतिरिक्त राशि प्राप्त होती है, तो उक्त आपूर्तिकर्ता के विकल्प पर, ऐसी अतिरिक्त राशि की सीमा तक आपूर्ति का समय ऐसी अतिरिक्त राशि से संबंधित चालान जारी करने की तिथि होगी।
स्पष्टीकरण .--- खंड (क) और (ख) के प्रयोजनों के लिए ---
(i) आपूर्ति को उस सीमा तक किया हुआ माना जाएगा जिस सीमा तक वह चालान या, जैसा भी मामला हो, भुगतान द्वारा कवर की गई है;
(ii) "भुगतान प्राप्ति की तिथि" वह तिथि होगी जिस दिन भुगतान आपूर्तिकर्ता के बहीखातों में दर्ज किया जाता है या वह तिथि जिस दिन भुगतान उसके बैंक खाते में जमा किया जाता है, इनमें से जो भी पहले हो।
(3) उन आपूर्तियों के मामले में जिन पर कर रिवर्स चार्ज आधार पर भुगतान किया जाता है या भुगतान किया जाना है, आपूर्ति का समय निम्नलिखित तिथियों में से जो भी पहले हो, वह होगा, अर्थात्:---
(क) प्राप्तकर्ता के बहीखातों में दर्ज भुगतान की तिथि या उसके बैंक खाते से भुगतान डेबिट होने की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो; या
(ख) चालान या उसके बदले में किसी अन्य दस्तावेज़, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए, जारी करने की तिथि से साठ दिनों के ठीक बाद की तिथि 2 [आपूर्तिकर्ता द्वारा, उन मामलों में जहां आपूर्तिकर्ता द्वारा चालान जारी करना आवश्यक है; या]
3 [(सी) प्राप्तकर्ता द्वारा चालान जारी करने की तिथि, उन मामलों में जहां चालान प्राप्तकर्ता द्वारा जारी किया जाना है:]
बशर्ते कि जहां खंड (क) या खंड (ख) , 3 [या खंड (ग) ] के तहत आपूर्ति का समय निर्धारित करना संभव न हो, वहां आपूर्ति का समय आपूर्ति प्राप्तकर्ता के लेखा बही में प्रविष्टि की तिथि होगी:
इसके अलावा, यदि संबद्ध उद्यमों द्वारा आपूर्ति की जाती है और सेवा प्रदाता भारत से बाहर स्थित है, तो आपूर्ति का समय आपूर्ति प्राप्तकर्ता के बहीखातों में प्रविष्टि की तिथि या भुगतान की तिथि, इनमें से जो भी पहले हो, होगी।
(4) आपूर्तिकर्ता द्वारा वाउचरों की आपूर्ति के मामले में, आपूर्ति का समय होगा---
(क) वाउचर जारी करने की तिथि, यदि उस समय आपूर्ति की पहचान की जा सकती है; या
(ख) अन्य सभी मामलों में वाउचर के मोचन की तिथि।
(5) जहाँ उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) के प्रावधानों के तहत आपूर्ति का समय निर्धारित करना संभव न हो, वहाँ आपूर्ति का समय---
(क) यदि आवधिक रिटर्न दाखिल करना हो, तो वह तिथि होगी जिस पर ऐसा रिटर्न दाखिल किया जाना है; या
(ख) किसी अन्य मामले में, वह तिथि होगी जिस दिन कर का भुगतान किया जाता है।
(6) आपूर्ति का समय, जहां तक ब्याज, विलंब शुल्क या किसी प्रतिफल के विलंबित भुगतान के लिए दंड के रूप में आपूर्ति के मूल्य में वृद्धि से संबंधित है, वह तिथि होगी जिस दिन आपूर्तिकर्ता को मूल्य में ऐसी वृद्धि प्राप्त होती है।
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