UP Police Regs 579अध्याय 40 · Appendix-4 Instructions for submitting applications addressed to the local government:-
धारा 579 · तृतीय भाग - विभाग प्रमुखों द्वारा आवेदनों का रोका जाना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(10) वे परिस्थितियाँ जिनमें आवेदन रोका जा सकता है-
वह विभाग प्रमुख जिसको कोई आवेदन प्रस्तुत या अग्रेषित किया गया हो, अपने विवेक के अनुसार आवेदन को रोक रख सकता है जब-
(1) आवेदक ने इन अनुदेशों के द्वितीय भाग के उपबन्धों का पूर्णतया पालन न किया हो,
(2) आवेदन अपठनीय, समझ में न आने वाला हो या उसमें ऐसी भाषा का समावेश हो जो विभाग प्रमुख के अभिमत में निष्ठाहीन या अग्रदरहीन या अनुचित हो,
(3) उसी विषय पर आवेदक की ओर से किसी आवेदन का स्थानीय सरकार द्वारा निपटारा किया जा चुका हो और विभाग प्रमुख के अभिमत में आवेदन कोई ऐसा नवीन तथ्य या परिस्थितियाँ प्रकट नहीं करता जो विषय के पुनर्विचार के लिये आधार बन सकें,
(4) वह आवेदन ऐसे निर्णय के विरुद्ध अभ्यावेदन है, जो किसी विधि या परिनियमितियों के नियम के द्वारा अन्तिम घोषित किया गया है,
(5) विधि, आवेदन की विषयवस्तु के सम्बन्ध में किसी भिन्न विनिर्दिष्ट उपाय के लिये उपबन्ध करती है चाहे ऐसे उपाय के लिये विहित की गई कोई काल मर्यादा समाप्त हो गई हो या न हुई हो,
(6) आवेदन किसी न्यायिक निर्णय के विरुद्ध अपील है,
परन्तु यह कि यदि आवेदन-
(क) किसी ऐसे मामले में न्यायिक निर्णय के विरुद्ध अपील हो जिसमें सरकार ने हस्तक्षेप करने का विवेक सुरक्षित कर रखा हो; या
(ख) ऐसे दावे के न्यायिक निर्णय के विरुद्ध अपील हो जिसमें सरकार पक्षकार थी; या
(ग) क्षमादान या प्राणदण्ड विनियमित करने की या दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 सं0 2 सन् 1973 के अधीन दण्डाज्ञा के निलम्बन या कम किये जाने की अभियाचना हो,
आवेदन रोका नहीं जायेगा, जब तक कि वह पद (2) के अन्तर्गत न आता हो।
(7) यदि आवेदन मात्र वित्तीय या अन्य अनुतोष के लिये हो जो-
(क) ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की गई हो जिसका प्रकट रूप से ही कोई दावा न हो या जो स्पष्ट रूप से किसी सारहीन स्वरूप के दावे को कर रहा हो।
(ख) इतने विलम्ब से लाई गई हो कि उसका विचार असम्भव हो।
(8) आवेदन-
(क) सरकारी सेवा में किसी ऐसे पद पर योजित किये जाने के लिये प्रार्थना-पत्र हो जिस पर सरकार के अधीनस्थ प्राधिकारियों द्वारा नियुक्तियाँ की जाती हों या ऐसे सेवायोजन के प्रार्थना-पत्रों के बारे में किसी नियम या घोषणा के बारे में न किया गया सेवायोजन के लिये प्रार्थना-पत्र हो; या
(ख) सरकारी सेवा में या किसी व्यवसाय या सेवायोजन में संलग्न होने के लिये किसी विधि या नियम द्वारा धारण करने के लिये विहित की गई योग्यताओं के उपबन्धों से छूट दिये जाने के लिये निवेदन हो।
परन्तु यह कि जहाँ किसी पद पर नियुक्ति के नियम ऐसी योग्यताओं से अपवाद स्वरूप मामलों में छूट दिये जाने के लिए उपबन्ध करते हों, छूट के लिए आवेदन इस पद के लिए नहीं रोका जायेगा।
(9) आवेदन किसी प्राइवेट व्यक्ति या प्राइवेट व्यक्तियों के समूह के आवेदक और ऐसे प्राइवेट व्यक्ति या समूह के सम्बन्धी के बारे में किए गए किसी कार्य के विरुद्ध कोई अभ्यावेदन हो।
(10) आवेदन ऐसा आवेदन न हो जैसा पद (6) के परन्तुक में निर्देशित किया गया है जिसमें आवेदक या कोई निजी प्रत्यक्ष हित न हो।
(11) आवेदन ऐसे विषय से सम्बन्धित है जिसमें विभाग प्रमुख आदेश पारित करने की सक्षम है और आवेदक द्वारा उसे, अनुतोष प्राप्ति के लिये कोई आवेदन न किया हो।
(12) आवेदन ऐसे आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन हो, जो आवेदक को आवेदन की प्रस्तुति से 6 मास से अधिक पूर्व संसूचित किया जा चुका हो और विलम्ब का कोई समाधानकारक स्पष्टीकरण न दिया गया हो।
(13) आवेदन ऐसे विवेक के प्रयोग की, जो विभाग प्रमुख में निहित हो, विफलता के विरुद्ध अभ्यावेदन हो।
परन्तु यह कि इस पद के अधीन, भारत सरकार या प्रान्तीय सेवा के किसी सदस्य द्वारा, जिस पर सरकार द्वारा नियुक्तियाँ की जाती हैं, नियुक्त किये गये किसी आवेदक का आवेदन रोका नहीं जावेगा।
(14) आवेदन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी व्यक्ति को, जो-
(क) परिवीक्षा पर नियुक्त किया गया हो, ऐसी परिवीक्षा के भीतर।
(ख) संविदा के अधीन के अतिरिक्त, अस्थाई नियुक्ति धारण करने के लिये नियुक्त व्यक्ति को ऐसी नियुक्ति के समयावधि के पश्चात् की पद मुक्ति के विरुद्ध अभ्यावेदन हो।
(15) आवेदन ऐसे व्यक्ति द्वारा अभ्यावेदन हो जो सरकार की सेवा में हो और रहा हो-
(क) पदच्युति या अन्य दण्ड की आज्ञा को संपुष्ट करते हुए किसी अपीलीय आदेश के विरुद्ध पुनरीक्षण में पारित आदेश से उत्पन्न हो; या
(ख) पदच्युति या अन्य दण्डाज्ञा के आदेश की सम्पुष्ट करते हुए किसी अपीलीय आदेश से उत्पन्न हो, सिवाय उस मामले के जिसमें पुनरीक्षण के लिए सरकार को आवेदन करने का अधिकारी किसी विधि या नियम के द्वारा प्रदत्त किया गया हो, या
(ग) सरकार के द्वारा पारित दण्ड का आदेश न होते हुए, ऐसे आदेश से उत्पन्न हो जिसके विरुद्ध अपील उसकी सेवाओं की शर्तों की विनियमित करने वाले किसी नियम, आदेश या संविदा के द्वारा अभिव्यक्त रूप से पारित हो।
परन्तु यह कि ऐसे अपीलीय या पुनरीक्षण में पारित आदेश, जिसका परिणाम सेवा से पदच्युत किया या हटाया जाना हो, के विरुद्ध कोई अभ्यावेदन जो विवादग्रस्त तथ्यों को या ऐसे आदेश के औचित्य को प्रश्नगत न करते हुए, केवल दया की याचना या प्रतिपूर्ति पेन्शन के लिए सीमित हो, रोका नहीं जावेगा।
(16) आवेदन सरकार की सेवा में होने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा उसकी सम्भावित भावी पेन्शन के सम्बन्ध में, उसकी सेवा शर्तों की विनियमित करने वाले किसी नियम, आदेश या संविदा के अनुसार होने के सिवाय प्रस्तुत किया गया हो।
(17) आवेदन किसी सरकारी सेवा में रहने वाले व्यक्ति की कार्यालयीन भावी सम्भावनाओं या स्थिति के बारे में कोई अभ्यावेदन हो जो ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत न किया गया हो।
(11) जब आवेदन रोका जावे आवेदक को सूचित किया जावे -
जब अनुदेश 10 के अधीन कोई आवेदन रोका जावे, विभाग प्रमुख, ऐसे रोक लिये जाने और उसके कारणों की सूचना आवेदक को देगा।
(12) रोके गये आवेदनों की सूची -
विभाग प्रमुख जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर मासों की 13 तारीख को, उसके द्वारा पूर्ववर्ती त्रिमास में, अनुदेश 10 के अधीन रोके गए आवेदनों का, संक्षेप में रोके जाने के कारणों को वर्णित करते हुए, सरकार की त्रैमासिक रूप से विवरणी भेजेगा।
वह विभाग प्रमुख जिसको कोई आवेदन प्रस्तुत या अग्रेषित किया गया हो, अपने विवेक के अनुसार आवेदन को रोक रख सकता है जब-
(1) आवेदक ने इन अनुदेशों के द्वितीय भाग के उपबन्धों का पूर्णतया पालन न किया हो,
(2) आवेदन अपठनीय, समझ में न आने वाला हो या उसमें ऐसी भाषा का समावेश हो जो विभाग प्रमुख के अभिमत में निष्ठाहीन या अग्रदरहीन या अनुचित हो,
(3) उसी विषय पर आवेदक की ओर से किसी आवेदन का स्थानीय सरकार द्वारा निपटारा किया जा चुका हो और विभाग प्रमुख के अभिमत में आवेदन कोई ऐसा नवीन तथ्य या परिस्थितियाँ प्रकट नहीं करता जो विषय के पुनर्विचार के लिये आधार बन सकें,
(4) वह आवेदन ऐसे निर्णय के विरुद्ध अभ्यावेदन है, जो किसी विधि या परिनियमितियों के नियम के द्वारा अन्तिम घोषित किया गया है,
(5) विधि, आवेदन की विषयवस्तु के सम्बन्ध में किसी भिन्न विनिर्दिष्ट उपाय के लिये उपबन्ध करती है चाहे ऐसे उपाय के लिये विहित की गई कोई काल मर्यादा समाप्त हो गई हो या न हुई हो,
(6) आवेदन किसी न्यायिक निर्णय के विरुद्ध अपील है,
परन्तु यह कि यदि आवेदन-
(क) किसी ऐसे मामले में न्यायिक निर्णय के विरुद्ध अपील हो जिसमें सरकार ने हस्तक्षेप करने का विवेक सुरक्षित कर रखा हो; या
(ख) ऐसे दावे के न्यायिक निर्णय के विरुद्ध अपील हो जिसमें सरकार पक्षकार थी; या
(ग) क्षमादान या प्राणदण्ड विनियमित करने की या दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 सं0 2 सन् 1973 के अधीन दण्डाज्ञा के निलम्बन या कम किये जाने की अभियाचना हो,
आवेदन रोका नहीं जायेगा, जब तक कि वह पद (2) के अन्तर्गत न आता हो।
(7) यदि आवेदन मात्र वित्तीय या अन्य अनुतोष के लिये हो जो-
(क) ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की गई हो जिसका प्रकट रूप से ही कोई दावा न हो या जो स्पष्ट रूप से किसी सारहीन स्वरूप के दावे को कर रहा हो।
(ख) इतने विलम्ब से लाई गई हो कि उसका विचार असम्भव हो।
(8) आवेदन-
(क) सरकारी सेवा में किसी ऐसे पद पर योजित किये जाने के लिये प्रार्थना-पत्र हो जिस पर सरकार के अधीनस्थ प्राधिकारियों द्वारा नियुक्तियाँ की जाती हों या ऐसे सेवायोजन के प्रार्थना-पत्रों के बारे में किसी नियम या घोषणा के बारे में न किया गया सेवायोजन के लिये प्रार्थना-पत्र हो; या
(ख) सरकारी सेवा में या किसी व्यवसाय या सेवायोजन में संलग्न होने के लिये किसी विधि या नियम द्वारा धारण करने के लिये विहित की गई योग्यताओं के उपबन्धों से छूट दिये जाने के लिये निवेदन हो।
परन्तु यह कि जहाँ किसी पद पर नियुक्ति के नियम ऐसी योग्यताओं से अपवाद स्वरूप मामलों में छूट दिये जाने के लिए उपबन्ध करते हों, छूट के लिए आवेदन इस पद के लिए नहीं रोका जायेगा।
(9) आवेदन किसी प्राइवेट व्यक्ति या प्राइवेट व्यक्तियों के समूह के आवेदक और ऐसे प्राइवेट व्यक्ति या समूह के सम्बन्धी के बारे में किए गए किसी कार्य के विरुद्ध कोई अभ्यावेदन हो।
(10) आवेदन ऐसा आवेदन न हो जैसा पद (6) के परन्तुक में निर्देशित किया गया है जिसमें आवेदक या कोई निजी प्रत्यक्ष हित न हो।
(11) आवेदन ऐसे विषय से सम्बन्धित है जिसमें विभाग प्रमुख आदेश पारित करने की सक्षम है और आवेदक द्वारा उसे, अनुतोष प्राप्ति के लिये कोई आवेदन न किया हो।
(12) आवेदन ऐसे आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन हो, जो आवेदक को आवेदन की प्रस्तुति से 6 मास से अधिक पूर्व संसूचित किया जा चुका हो और विलम्ब का कोई समाधानकारक स्पष्टीकरण न दिया गया हो।
(13) आवेदन ऐसे विवेक के प्रयोग की, जो विभाग प्रमुख में निहित हो, विफलता के विरुद्ध अभ्यावेदन हो।
परन्तु यह कि इस पद के अधीन, भारत सरकार या प्रान्तीय सेवा के किसी सदस्य द्वारा, जिस पर सरकार द्वारा नियुक्तियाँ की जाती हैं, नियुक्त किये गये किसी आवेदक का आवेदन रोका नहीं जावेगा।
(14) आवेदन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी व्यक्ति को, जो-
(क) परिवीक्षा पर नियुक्त किया गया हो, ऐसी परिवीक्षा के भीतर।
(ख) संविदा के अधीन के अतिरिक्त, अस्थाई नियुक्ति धारण करने के लिये नियुक्त व्यक्ति को ऐसी नियुक्ति के समयावधि के पश्चात् की पद मुक्ति के विरुद्ध अभ्यावेदन हो।
(15) आवेदन ऐसे व्यक्ति द्वारा अभ्यावेदन हो जो सरकार की सेवा में हो और रहा हो-
(क) पदच्युति या अन्य दण्ड की आज्ञा को संपुष्ट करते हुए किसी अपीलीय आदेश के विरुद्ध पुनरीक्षण में पारित आदेश से उत्पन्न हो; या
(ख) पदच्युति या अन्य दण्डाज्ञा के आदेश की सम्पुष्ट करते हुए किसी अपीलीय आदेश से उत्पन्न हो, सिवाय उस मामले के जिसमें पुनरीक्षण के लिए सरकार को आवेदन करने का अधिकारी किसी विधि या नियम के द्वारा प्रदत्त किया गया हो, या
(ग) सरकार के द्वारा पारित दण्ड का आदेश न होते हुए, ऐसे आदेश से उत्पन्न हो जिसके विरुद्ध अपील उसकी सेवाओं की शर्तों की विनियमित करने वाले किसी नियम, आदेश या संविदा के द्वारा अभिव्यक्त रूप से पारित हो।
परन्तु यह कि ऐसे अपीलीय या पुनरीक्षण में पारित आदेश, जिसका परिणाम सेवा से पदच्युत किया या हटाया जाना हो, के विरुद्ध कोई अभ्यावेदन जो विवादग्रस्त तथ्यों को या ऐसे आदेश के औचित्य को प्रश्नगत न करते हुए, केवल दया की याचना या प्रतिपूर्ति पेन्शन के लिए सीमित हो, रोका नहीं जावेगा।
(16) आवेदन सरकार की सेवा में होने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा उसकी सम्भावित भावी पेन्शन के सम्बन्ध में, उसकी सेवा शर्तों की विनियमित करने वाले किसी नियम, आदेश या संविदा के अनुसार होने के सिवाय प्रस्तुत किया गया हो।
(17) आवेदन किसी सरकारी सेवा में रहने वाले व्यक्ति की कार्यालयीन भावी सम्भावनाओं या स्थिति के बारे में कोई अभ्यावेदन हो जो ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत न किया गया हो।
(11) जब आवेदन रोका जावे आवेदक को सूचित किया जावे -
जब अनुदेश 10 के अधीन कोई आवेदन रोका जावे, विभाग प्रमुख, ऐसे रोक लिये जाने और उसके कारणों की सूचना आवेदक को देगा।
(12) रोके गये आवेदनों की सूची -
विभाग प्रमुख जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर मासों की 13 तारीख को, उसके द्वारा पूर्ववर्ती त्रिमास में, अनुदेश 10 के अधीन रोके गए आवेदनों का, संक्षेप में रोके जाने के कारणों को वर्णित करते हुए, सरकार की त्रैमासिक रूप से विवरणी भेजेगा।
इस धारा पर आपका निजी नोट
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