UP Police Regs 472अध्याय 30 · Promotions
धारा 472 · पैरा-459-ए
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
सवार पुलिस के कान्सटेबिल और प्रधान कान्सटेबिल जबकि वे क्रमशः पैरा 458 और 459 के अधीन प्रधान कान्सटेबिल और उप-निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किये जावें, क्रमशः एक और दो वर्ष की परिवीक्षा पर रहेंगे, जिसके पश्चात् यदि उनका कार्य और आचरण समाधान करके पाया जावे, वे मुख्यालय के पुलिस उप-महानिरीक्षक द्वारा संपुष्ट किये जा सकेंगे।
यदि पुलिस अधीक्षक का यह अभिमत हो कि किसी परिवीक्षाधीन को वापस कर देना चाहिये क्योंकि उसका कार्य असन्तोषजनक है, वह परिवीक्षाधीन को लेखीय में वह विनिर्दिष्ट शिकायतें और आधार, जिन पर वापसी प्रस्तावित है, प्रदाय करेगा और उसी के साथ उससे यह कारण बताने को कहेगा कि उसे वापस क्यों न कर दिया जावे। दिनिर्दिष्ट शिकायतों के विवरण की, परिवीक्षाधीन के स्पष्टीकरण के साथ, एक प्रति जब रेन्ज के पुलिस उप महानिरीक्षक के माध्यम से आदेश के लिए मुख्यालय के उप-महानिरीक्षक को अग्रेषित कर दी जावेगी।
यदि किसी कारण से, जिसे लेखीय में अभिलिखित किया जावे, मुख्यालय का पुलिस उप-महानिरीक्षक का यह अभिमत हो कि कोई परिवीक्षाधीन सम्पुष्टि के लिए उपयुक्त नहीं है, वह
परिवीक्षा की अवधि में एक वर्ष से अधिक की न होने वाली समयावधि का विस्तार कर सकता है। ऐसी कार्यवाही के कारण लेखीय में सम्बन्धित परिवीक्षाधीन को संसूचित किया जाना चाहिये। ऐसे मामलों में, जब सम्पुष्टि के आदेश वास्तव में पारित किये जावें, उस दिनांक से प्रभावशील होंगे, जिसको बढ़ाई हुई परिवीक्षा अवधि समाप्त हुई हो।
यदि पुलिस अधीक्षक का यह अभिमत हो कि किसी परिवीक्षाधीन को वापस कर देना चाहिये क्योंकि उसका कार्य असन्तोषजनक है, वह परिवीक्षाधीन को लेखीय में वह विनिर्दिष्ट शिकायतें और आधार, जिन पर वापसी प्रस्तावित है, प्रदाय करेगा और उसी के साथ उससे यह कारण बताने को कहेगा कि उसे वापस क्यों न कर दिया जावे। दिनिर्दिष्ट शिकायतों के विवरण की, परिवीक्षाधीन के स्पष्टीकरण के साथ, एक प्रति जब रेन्ज के पुलिस उप महानिरीक्षक के माध्यम से आदेश के लिए मुख्यालय के उप-महानिरीक्षक को अग्रेषित कर दी जावेगी।
यदि किसी कारण से, जिसे लेखीय में अभिलिखित किया जावे, मुख्यालय का पुलिस उप-महानिरीक्षक का यह अभिमत हो कि कोई परिवीक्षाधीन सम्पुष्टि के लिए उपयुक्त नहीं है, वह
परिवीक्षा की अवधि में एक वर्ष से अधिक की न होने वाली समयावधि का विस्तार कर सकता है। ऐसी कार्यवाही के कारण लेखीय में सम्बन्धित परिवीक्षाधीन को संसूचित किया जाना चाहिये। ऐसे मामलों में, जब सम्पुष्टि के आदेश वास्तव में पारित किये जावें, उस दिनांक से प्रभावशील होंगे, जिसको बढ़ाई हुई परिवीक्षा अवधि समाप्त हुई हो।
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