UP Police Regs 253अध्याय 20 · Registration and Monitoring of Bad Characters
धारा 253 · पैरा-244. धारा 110 सी० आर० पी० सी० की कार्यवाही की प्रक्रिया
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धारा 110 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन कार्यवाही करने के पूर्व, थानेदार को चाहिये कि वह प्रारूप क्रमांक 5 में मण्डल निरीक्षक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को आवेदन भेजे। मण्डल निरीक्षक बिना किसी विलम्ब के आवेदन पत्र अधीक्षक को संदिग्ध व्यक्ति के बारे में स्थानीय जाँच कर अपनी जानकारी की रिपोर्ट के साथ अग्रेषित कर देगा। यदि पुलिस अधीक्षक रिपोर्ट का अनुमोदन कर दे तो वह उसे, सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 के अधीन 'सूचना' के रूप में भेज देंगा। (टिप्पणी :- दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अधीन धारा 110 के अन्तर्गत सूचना पर विचार करने की अधिकारिता अब प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट को ही है।) यदि मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति से दण्ड प्रकिया संहिता की धारा 110 के अधीन कारण बताने की अपेक्षा करना आवश्यक समझे, वह उक्त धारा के द्वारा अपेक्षित विवरणों का वर्णन करते हुए धारा 112 के अधीन आदेश बनायेगा और प्रारूप 5 थानेदार को लौटा देगा, जो उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने और आवश्यक साक्ष्य के साथ मजिस्ट्रेट के पास पेश करने के लिये तत्काल पग उठायेगा। प्रारूप 5 अभियोजक अधिकारी की मामले के संक्षेप के रूप में प्रयोग के लिये भेज दिया जावेगा और यदि मजिस्ट्रेट उचित पावे, तो उसे फाइल के साथ संलग्न कर दिया जावेगा। नियम के तौर पर हिस्ट्री-शीट न्यायालयों को नहीं भेजी जावेगी, परन्तु वह तब भेजी जावेगी, जब न्यायालय उन्हें देखने के लिए माँगे। जब दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 या 110 के अधीन कार्यवाही करने के प्रयोजन के लिए जाँच कर रहे हो, पुलिस के द्वारा किसी कथन को अभिलिखित नहीं किया जाना चाहिये। यदि ऐसे कथन अभिलिखित किये जावें तो अभियुक्त दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 162 के अधीन उनकी प्रतियाँ प्राप्त करने में समर्थ हो सकता है [ तथापि, 1973 की दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 110 देखे ।]
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