UP Police Regs 548अध्याय 35 · Training of Gazetted Officers, Inspectors and Reserve Sub-Inspectors
धारा 548 · पैरा-528. परिवीक्षाधीन सहायक पुलिस अधीक्षकों का प्रशिक्षण
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
परिवीक्षाधीन सहायक पुलिस अधीक्षक से यह अपेक्षित है कि वह प्रान्तीय पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में सोलह मास की अवधि तक शिक्षण का पाठ्यक्रम पूरा करे।
उनके प्रशिक्षण, शिक्षण के विषयों, परीक्षाओं, जिले में व्यावहारिक प्रशिक्षण, स्थायीकरण तथा सेवामुक्ति सम्बन्धी नियम प्रान्तीय पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय मैनुअल के भाग 2 में दिये गये हैं।
महाविद्यालय छोड़ने के पश्चात् जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक का व्यावहारिक प्रशिक्षण निम्नानुसार कराया जाना चाहिये :-
(1) कार्यालय कार्य :
(क) अंग्रेजी - अधिकारियों को अंग्रेजी कार्यालय के सम्बन्ध में जिला पुलिस के मुख्य लिपिक, लेखाकार तथा पुलिस अधीक्षक के सभी कर्तव्यों का प्रशिक्षण दिया जावेगा। इसमें पत्र-व्यवहार करने की रीति, विशेष रिपोर्टों का प्रारूप तैयार करना, लेखा रखना, पेंशन कागजात, वेतन बिल तथा अन्य इसी प्रकार के दस्तावेज तैयार करना, अंग्रेजी में अपराध रजिस्टर रखना तथा दाण्डिक और अन्य विवरणियों का संकलन एवं प्रेषण सम्मिलित होगा। इस शाखा में उनका प्रशिक्षण पूरा करने के लिये अधिकारियों को बारी-बारी से मुख्य लिपिक तथा लेखाकार के वास्तविक प्रभार में इतनी अवधि के लिये रखा जावेगा जितनी अधीक्षक आवश्यक समझे।
(ख) भाषाएँ - अधिकारियों से यह अपेक्षित होगा कि वे पुलिस डायरियाँ और रिपोर्टें देखें, अधीक्षक की जानकारी और आदेश के लिये हिन्दी के कागजात तैयार करें, तथा थानों को भेजे जाने वाले पत्रों, आदेशों, हुलिया रिपोर्टों तथा सदस्यता कागजातों का अनुवाद करें।
(2) रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्य - अधिकारियों को रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्यों का पूर्ण प्रशिक्षण दिया जावेगा। वे गोला-बारूद भण्डार, शस्त्र, ड्यूटी तथा अन्य रजिस्टर रखने, रिजर्व की दैनिक ड्यूटियों का वितरण करने, कवायद तथा शस्त्र-संचालन के प्रशिक्षण का पर्यवेक्षण करने, अनुरक्षी दल को बदलने तथा गार्ड के निरीक्षण के बारे में सीखेंगे। उनका प्रशिक्षण पूरा करने के लिये उन्हें इतनी अवधि के लिये रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्यों के वास्तविक प्रभार में रखा जावेगा जितनी अधीक्षक आवश्यक समझे।
(3) अन्वेषण - अधिकारियों को चुने हुये अन्वेषण अधिकारियों के साथ जाने तथा अधीक्षक के पुनर्विलोकन के लिये टिप्पणियाँ और डायरियाँ तैयार करने के लिये नियुक्त किया जावेगा। तत्पश्चात् वे स्वयं छोटे मामलों का अन्वेषण करेंगे और दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 172 तथा इस विनियमावली के अध्याय 10 द्वारा अपेक्षित रीति से डायरियाँ प्रस्तुत करेंगे। अन्त में अधिकारियों को बीस दिन के लिये किसी नगर के थाने के वास्तविक प्रभार में रखा जावेगा। यदि थाने पर उनके ठहरने का स्थान न हो तो उनसे प्रतिदिन नौ घण्टे उपस्थित रहना अपेक्षित होगा, और उपस्थिति के घण्टे अधीक्षक द्वारा नियत किये जावेंगे। शिविर के मौसम में वे किसी महत्वपूर्ण ग्रामीण थाने के निकट दस दिन तक शिविर करेंगे और उस अवधि के लिये उसका प्रभार सँभालेंगे।
(4) विभागीय मामले - अधिकारियों को विभागीय दण्ड से सम्बन्धित मामलों में प्रारम्भिक जाँच करने के लिये नियुक्त किया जा सकता है।
(5) मामलों का अभियोजन - उनसे यह अपेक्षित होगा कि वे विनिश्चित मामलों पर, विशेषकर उन पर जिनमें अनियमितताएँ या अवैधताएँ हों, पुलिस अधीक्षक की जानकारी और आदेश के लिये अपनी टिप्पणियाँ अभिलिखित करें। उनसे साक्ष्य का सार तैयार करना तथा अपने निष्कर्ष लिखना अपेक्षित होगा। तत्पश्चात् वे किसी सक्षम अधिकारी के मार्गदर्शन में मामलों को अभियोजन के लिये तैयार करेंगे। वे प्रक्रिया और व्यवहार सीखने के लिये बहुधा न्यायालयों में उपस्थित रहेंगे और तीन महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन करेंगे।
(6) निरीक्षण - अधीक्षक प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों से यह अपेक्षा करेगा कि वे थानों में शस्त्र तथा गोला-बारूद भण्डारों के निरीक्षण के समय उसके साथ रहें। तत्पश्चात् अधिकारियों से स्वतन्त्र रूप से निरीक्षण करने तथा अधीक्षक के आदेश के लिये अपनी रिपोर्टें प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जानी चाहिये।
(7) पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय छोड़ने के पश्चात् तथा नीचे दिये गये (क) से (ङ) तक के प्रमाण-पत्र दिये जाने से पूर्व सहायक पुलिस अधीक्षक को प्रत्येक दशा में एक मास के लिये अपराध अन्वेषण विभाग तथा महानिरीक्षक के कार्यालय से सम्बद्ध किया जाना चाहिये।
(8) व्यावहारिक कार्य के लिये कोई परीक्षा विहित नहीं है, किन्तु किसी सहायक अधीक्षक के जिले के किसी सबडिवीजन का प्रभार धारण करने अथवा जिले के भारसाधक के रूप में पद धारण करने के लिये पात्र होने से पूर्व उससे यह अपेक्षित होगा कि वह पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय मैनुअल, भाग 2 में दिये गये 'पैदल (इन्फैन्ट्री)' तथा 'अश्वारोहण' प्रमाण-पत्र प्राप्त करे, तथा अधीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित और परिक्षेत्र के उप महानिरीक्षक द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित इस आशय का प्रमाण-पत्र प्राप्त करे कि वह -
(क) जनरल तथा केस डायरियों पर उचित आदेश पारित कर सकता है,
(ख) बुद्धिमत्तापूर्वक किसी अन्वेषण का अधीक्षण कर सकता है,
(ग) किसी थाने का दक्षतापूर्वक निरीक्षण कर सकता है,
(घ) पुलिस लेखाकार के कार्य का दक्षतापूर्वक पर्यवेक्षण कर सकता है,
(ङ) पुलिस ऐक्ट की धारा 7 के अधीन विभागीय कार्यवाही दक्षतापूर्वक कर सकता है।
उप महानिरीक्षक प्रमाण-पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करने से पूर्व सहायक अधीक्षक से प्रश्न करेगा और उसके कार्य की परीक्षा करेगा।
नोट - व्यावहारिक कार्य के (क) से (ङ) तक के प्रमाण-पत्र प्रतिहस्ताक्षर के लिये उप महानिरीक्षक को भेजते समय पुलिस अधीक्षक प्रत्येक अधिकारी के सम्बन्ध में यह प्रमाणित करेगा कि उसने 20 दिन तक नगर के थाने का तथा 10 दिन तक ग्रामीण थाने का प्रभार धारण किया है और तीन महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन किया है।
उनके प्रशिक्षण, शिक्षण के विषयों, परीक्षाओं, जिले में व्यावहारिक प्रशिक्षण, स्थायीकरण तथा सेवामुक्ति सम्बन्धी नियम प्रान्तीय पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय मैनुअल के भाग 2 में दिये गये हैं।
महाविद्यालय छोड़ने के पश्चात् जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक का व्यावहारिक प्रशिक्षण निम्नानुसार कराया जाना चाहिये :-
(1) कार्यालय कार्य :
(क) अंग्रेजी - अधिकारियों को अंग्रेजी कार्यालय के सम्बन्ध में जिला पुलिस के मुख्य लिपिक, लेखाकार तथा पुलिस अधीक्षक के सभी कर्तव्यों का प्रशिक्षण दिया जावेगा। इसमें पत्र-व्यवहार करने की रीति, विशेष रिपोर्टों का प्रारूप तैयार करना, लेखा रखना, पेंशन कागजात, वेतन बिल तथा अन्य इसी प्रकार के दस्तावेज तैयार करना, अंग्रेजी में अपराध रजिस्टर रखना तथा दाण्डिक और अन्य विवरणियों का संकलन एवं प्रेषण सम्मिलित होगा। इस शाखा में उनका प्रशिक्षण पूरा करने के लिये अधिकारियों को बारी-बारी से मुख्य लिपिक तथा लेखाकार के वास्तविक प्रभार में इतनी अवधि के लिये रखा जावेगा जितनी अधीक्षक आवश्यक समझे।
(ख) भाषाएँ - अधिकारियों से यह अपेक्षित होगा कि वे पुलिस डायरियाँ और रिपोर्टें देखें, अधीक्षक की जानकारी और आदेश के लिये हिन्दी के कागजात तैयार करें, तथा थानों को भेजे जाने वाले पत्रों, आदेशों, हुलिया रिपोर्टों तथा सदस्यता कागजातों का अनुवाद करें।
(2) रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्य - अधिकारियों को रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्यों का पूर्ण प्रशिक्षण दिया जावेगा। वे गोला-बारूद भण्डार, शस्त्र, ड्यूटी तथा अन्य रजिस्टर रखने, रिजर्व की दैनिक ड्यूटियों का वितरण करने, कवायद तथा शस्त्र-संचालन के प्रशिक्षण का पर्यवेक्षण करने, अनुरक्षी दल को बदलने तथा गार्ड के निरीक्षण के बारे में सीखेंगे। उनका प्रशिक्षण पूरा करने के लिये उन्हें इतनी अवधि के लिये रिजर्व निरीक्षक के कर्तव्यों के वास्तविक प्रभार में रखा जावेगा जितनी अधीक्षक आवश्यक समझे।
(3) अन्वेषण - अधिकारियों को चुने हुये अन्वेषण अधिकारियों के साथ जाने तथा अधीक्षक के पुनर्विलोकन के लिये टिप्पणियाँ और डायरियाँ तैयार करने के लिये नियुक्त किया जावेगा। तत्पश्चात् वे स्वयं छोटे मामलों का अन्वेषण करेंगे और दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 172 तथा इस विनियमावली के अध्याय 10 द्वारा अपेक्षित रीति से डायरियाँ प्रस्तुत करेंगे। अन्त में अधिकारियों को बीस दिन के लिये किसी नगर के थाने के वास्तविक प्रभार में रखा जावेगा। यदि थाने पर उनके ठहरने का स्थान न हो तो उनसे प्रतिदिन नौ घण्टे उपस्थित रहना अपेक्षित होगा, और उपस्थिति के घण्टे अधीक्षक द्वारा नियत किये जावेंगे। शिविर के मौसम में वे किसी महत्वपूर्ण ग्रामीण थाने के निकट दस दिन तक शिविर करेंगे और उस अवधि के लिये उसका प्रभार सँभालेंगे।
(4) विभागीय मामले - अधिकारियों को विभागीय दण्ड से सम्बन्धित मामलों में प्रारम्भिक जाँच करने के लिये नियुक्त किया जा सकता है।
(5) मामलों का अभियोजन - उनसे यह अपेक्षित होगा कि वे विनिश्चित मामलों पर, विशेषकर उन पर जिनमें अनियमितताएँ या अवैधताएँ हों, पुलिस अधीक्षक की जानकारी और आदेश के लिये अपनी टिप्पणियाँ अभिलिखित करें। उनसे साक्ष्य का सार तैयार करना तथा अपने निष्कर्ष लिखना अपेक्षित होगा। तत्पश्चात् वे किसी सक्षम अधिकारी के मार्गदर्शन में मामलों को अभियोजन के लिये तैयार करेंगे। वे प्रक्रिया और व्यवहार सीखने के लिये बहुधा न्यायालयों में उपस्थित रहेंगे और तीन महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन करेंगे।
(6) निरीक्षण - अधीक्षक प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों से यह अपेक्षा करेगा कि वे थानों में शस्त्र तथा गोला-बारूद भण्डारों के निरीक्षण के समय उसके साथ रहें। तत्पश्चात् अधिकारियों से स्वतन्त्र रूप से निरीक्षण करने तथा अधीक्षक के आदेश के लिये अपनी रिपोर्टें प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जानी चाहिये।
(7) पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय छोड़ने के पश्चात् तथा नीचे दिये गये (क) से (ङ) तक के प्रमाण-पत्र दिये जाने से पूर्व सहायक पुलिस अधीक्षक को प्रत्येक दशा में एक मास के लिये अपराध अन्वेषण विभाग तथा महानिरीक्षक के कार्यालय से सम्बद्ध किया जाना चाहिये।
(8) व्यावहारिक कार्य के लिये कोई परीक्षा विहित नहीं है, किन्तु किसी सहायक अधीक्षक के जिले के किसी सबडिवीजन का प्रभार धारण करने अथवा जिले के भारसाधक के रूप में पद धारण करने के लिये पात्र होने से पूर्व उससे यह अपेक्षित होगा कि वह पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय मैनुअल, भाग 2 में दिये गये 'पैदल (इन्फैन्ट्री)' तथा 'अश्वारोहण' प्रमाण-पत्र प्राप्त करे, तथा अधीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित और परिक्षेत्र के उप महानिरीक्षक द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित इस आशय का प्रमाण-पत्र प्राप्त करे कि वह -
(क) जनरल तथा केस डायरियों पर उचित आदेश पारित कर सकता है,
(ख) बुद्धिमत्तापूर्वक किसी अन्वेषण का अधीक्षण कर सकता है,
(ग) किसी थाने का दक्षतापूर्वक निरीक्षण कर सकता है,
(घ) पुलिस लेखाकार के कार्य का दक्षतापूर्वक पर्यवेक्षण कर सकता है,
(ङ) पुलिस ऐक्ट की धारा 7 के अधीन विभागीय कार्यवाही दक्षतापूर्वक कर सकता है।
उप महानिरीक्षक प्रमाण-पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करने से पूर्व सहायक अधीक्षक से प्रश्न करेगा और उसके कार्य की परीक्षा करेगा।
नोट - व्यावहारिक कार्य के (क) से (ङ) तक के प्रमाण-पत्र प्रतिहस्ताक्षर के लिये उप महानिरीक्षक को भेजते समय पुलिस अधीक्षक प्रत्येक अधिकारी के सम्बन्ध में यह प्रमाणित करेगा कि उसने 20 दिन तक नगर के थाने का तथा 10 दिन तक ग्रामीण थाने का प्रभार धारण किया है और तीन महत्वपूर्ण मामलों में अभियोजन किया है।
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