UP Police Regs 137अध्याय 12 · Inquest into Death, Post Mortem Examination and Treatment of Injured Persons
धारा 137 · पैरा-132. पंचायतनामा का मृत्यु समीक्षा-रिपोर्ट तथा केस डायरी के रूप में लिखा जाना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के अधीन पंचायतनामा (मृत्यु समीक्षा) अन्वेषण करने वाली पुलिस द्वारा, यदि सम्भव हो तो, शव को छूने या हटाने से पूर्व किया जाना चाहिये। मृत्यु समीक्षा-रिपोर्ट प्रारूप क्रमांक 211 में होनी चाहिये। ऐसे मामलों में जहाँ इस बारे में कोई सन्देह न हो कि मृत्यु दुर्घटना से हुई या आत्महत्या से, और जहाँ अन्वेषण एक ही दिन में पूरा हो जाता हो, वहाँ यही प्रारूप दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के अधीन मृत्यु समीक्षा-रिपोर्ट के रूप में तथा धारा 172 के अधीन विहित केस डायरी के रूप में, दोनों रूपों में प्रयोग किया जा सकता है।
नोट
पंचायतनामा का प्रयोजन मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण ज्ञात करना है, अर्थात् यह कि मृत्यु सन्देहजनक परिस्थितियों में हुई या अस्वाभाविक कारणों से। यह अवधारित करने के लिये कि उस व्यक्ति की हत्या किसने की, मृत्यु किस प्रकार हुई अथवा किन परिस्थितियों में हुई, पंचायतनामा न तो सुसंगत है और न विधितः आवश्यक, जैसा कि पेद्दा नारायण बनाम राज्य, 1975 में विनिश्चित हुआ। शकीला खादर बनाम नौशेर कामा के अनुसार उसमें न तो साक्षियों के कथन सम्मिलित करने की आवश्यकता है और न प्रत्यक्षदर्शी साक्षियों के नाम देने की। राजिक राम बनाम जसवन्त सिंह में यह कहा गया है कि यदि उसमें साक्षियों के कथन सम्मिलित कर दिये जायें तो वह धारा 162 से वर्जित हो जावेगा। अन्वेषण अधिकारी को मृतक के शरीर पर पाई गई क्षतियों का विवरण देना चाहिये, अन्यथा कथन आदि देना केवल भ्रम उत्पन्न करेगा, जैसा कि नरपाल सिंह बनाम राज्य में हुआ। ए० आई० आर० 1971 एस० सी० 2256 में यह घोषित किया गया है कि पंचायतनामा के आधार पर साक्ष्य का खण्डन नहीं किया जा सकता।
नोट
पंचायतनामा का प्रयोजन मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण ज्ञात करना है, अर्थात् यह कि मृत्यु सन्देहजनक परिस्थितियों में हुई या अस्वाभाविक कारणों से। यह अवधारित करने के लिये कि उस व्यक्ति की हत्या किसने की, मृत्यु किस प्रकार हुई अथवा किन परिस्थितियों में हुई, पंचायतनामा न तो सुसंगत है और न विधितः आवश्यक, जैसा कि पेद्दा नारायण बनाम राज्य, 1975 में विनिश्चित हुआ। शकीला खादर बनाम नौशेर कामा के अनुसार उसमें न तो साक्षियों के कथन सम्मिलित करने की आवश्यकता है और न प्रत्यक्षदर्शी साक्षियों के नाम देने की। राजिक राम बनाम जसवन्त सिंह में यह कहा गया है कि यदि उसमें साक्षियों के कथन सम्मिलित कर दिये जायें तो वह धारा 162 से वर्जित हो जावेगा। अन्वेषण अधिकारी को मृतक के शरीर पर पाई गई क्षतियों का विवरण देना चाहिये, अन्यथा कथन आदि देना केवल भ्रम उत्पन्न करेगा, जैसा कि नरपाल सिंह बनाम राज्य में हुआ। ए० आई० आर० 1971 एस० सी० 2256 में यह घोषित किया गया है कि पंचायतनामा के आधार पर साक्ष्य का खण्डन नहीं किया जा सकता।
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