UP Police Regs 235अध्याय 20 · Registration and Monitoring of Bad Characters
धारा 235 · पैरा-226. भाग 3, दोषसिद्धियाँ (सजायावी)
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
भाग 3 में गाँव के सभी निवासी निम्नलिखित अपराधों के दोषसिद्ध व्यक्तियों के विवरण होंगे-
क'
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 75 के आशयों के लिए
भारतीय दण्ड संहिता का अध्याय बारह- धारायें 241, 254 और 262 के अधीन दण्डनीय अपराधों के सिवाय सभी अपराध।
भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय सत्रह
धाराएँ 379 से 382-सभी प्रकार की चोरियाँ।
धाराएँ 385 के सिवाय, धाराएँ 384 से 389- सभी प्रकार के उद्दापन ।
धाराएँ 395, 316, 399 और 402- सभी प्रकार की डकैती।
धाराएँ 400 और 401-चोरी या डकैती के दल से सम्बन्धित होना।
धाराएँ 406 से 408-आपराधिक न्याय भंग।
धाराएँ 409-लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग।
धाराएँ 411 से 414- चोरी की हुई सम्पत्ति प्राप्त करना।
धाराएँ 418 से 422-छल।
धाराएँ 429 से 433 और 435 से 440- गम्भीर रिष्टि ।
धाराएँ 449 से 452-अपराध करने के लिए गृह अतिचार।
धाराएँ 454 से 457- प्रछन्न गृह अतिचार या साधारण से अन्य गृह भेदन।
धारा 458-गृह भेदन के सभी प्रयास।
धाराएँ 459 और 460-गृह भेदन में कारित घोर अपहति या मृत्यु।
धारा 462-न्यास में प्राप्त बन्द पात्र का कपटपूर्वक खोलना।
ख'
ह्वीपिंग एक्ट, 1909 को चौथे की धारा 3 और 4 के आशयों के लिए
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376- बलात्कार, धारा 377 - अप्राकृतिक अपराध ।
ग
आपराधिक जन-जाति अधिनियम की धारा 22 और 33 को, और अधिनियम की धाराएँ 21, 22, 24 और 25 के अधीन या अधिनियम की अनुसूची में सम्मिलित किसी अपराध के लिए, आपराधिक जन-जाति अधिनियम की धारा 3 के अधीन आपराधिक जन-जाति होना घोषित हुई जन -जाति के सदस्यों की दोषसिद्धि के आशयों के लिए।
घ'
अन्य अपराध
भारतीय दण्ड संहिता की धाराएँ 121, 121-क और 124-क राज्य के विरुद्ध अपराध।
धारा 170-लोक सेवक का प्रतिरूपण करना।
भारतीय दण्ड संहिता की धाराएँ 212, 213, 215, 216 और 216-क-संश्रय देना या लोक न्यास के विरुद्ध अन्य अपराध।
धारा 311-ठग होना।
धाराएँ 363 से 369-व्यपहरण।
धारा 461-बेईमानी से बन्द पत्र को तोड़कर खोलना।
धारा 465 से 469-कूट रचना।
धाराएँ 489-क से 489-घ-बैंक और मुद्रा नोट्स की कूट रचना।
दण्ड प्रक्रिया संहिता की धाराएँ 109 और 110-बुरी जीविका।
1867 के अधिनियम क्रमांक तीसरे की धाराएँ 3 और 4- सामान्य जुआघर को बनाये रखना और उसमें जुआ खेलना।
1910 के अधिनियम क्रमांक चार की धारा 60, 62, 63 और 65-आबकारी अधिनियम के अधीन अपराध।
1878 के अधिनियम क्रमांक 1 की धारा 9- अफीम अधिनियम के अधीन अपराध।
1959 के अधिनियम क्रमांक 54 की धारा 25 और 26-आयुध अधिनियम के अधीन अपराध।
भारतीय दण्ड संहिता की निम्नलिखित धाराओं के अधीन दोषसिद्धि व्यक्तियों के पुलिस नाम, अधीक्षक के केवल विशेष आदेश द्वारा भाग 3 में प्रविष्ट किये जावेंगे-
धाराएँ 143 से 153-बलवा, विधि विरुद्ध जमाव ।
धारा 302-हत्या।
धारा 304-आपराधिक मानव वध।
धारा 307-हत्या करने का प्रयत्न।
धाराएँ 324 से 325-अपहति और घोर अपहति ।
भाग तीन के अभियुक्तियों के स्तम्भ में अपराधों की प्रकृति, यथा- "पशु चोरी", "बहुमूल्य आभूषण रोकने की चाल" दर्शाई जावेगी। यदि कोई पूर्व दोषसिद्ध प्रसिद्ध दल का सदस्य हो तो इस तथ्य को भी अंकित किया जावेगा। सेन्धमारी के लिये सजायाफ्ता व्यक्तियों की कार्यप्रणाली वर्णित की जानी चाहिये। यदि कोई पूर्व दोषसिद्ध स्थायी रूप से अपना निवास बदल ले, तो अन्तिम स्तम्भ में नया निवास अंकित किया जायेगा और उस गाँव के रजिस्टर के, जिसमें वह गया है, भाग तीन में उसका नाम प्रविष्ट किया जावेगा। उस दोषसिद्ध व्यक्ति का नाम, जो केवल एक बार दोषसिद्ध किया गया हो और जिसकी हिस्ट्री शीट कभी भी न खोली गई हो उसकी सजा से बीस वर्ष व्यतीत हो जाने पर; हटा दिया जावेगा। अन्य दोषसिद्ध व्यक्तियों के नाम केवल उनकी मृत्यु के बाद हटाये जायेंगे।
प्रत्येक थाने में ग्राम अपराध नोट बुक के भाग तीन में वर्णक्रमानुसार निम्नलिखित शीर्षों में विभाजित एक विषय सूची बनाई जावेगी और प्रत्येक के लिये अलग रजिस्टर, या भाग आवंटित किया जावेगा-डकैती, पशु चोरी, जेबकटी, रेलवे सवारी चोरी, मालगाड़ी से चोर, बाइसिकिल चोरी, विविध चोरियाँ, विषदान, पशु विषदान, बुरी जीविका, सिक्का कूटकरण, कूट रचना, कोकीन और अफीम की तस्करी, छल, अनैतिक आशाओं के लिये व्यपहरण, राज्य के विरुद्ध अपराध, टेलीग्राफ के तारों को काटना और भाग तीन में विशिष्ट "अन्य विविध अपराध"।
सूची उप-महानिरीक्षक या पुलिस के अधीक्षक के आदेश द्वारा अतिरिक्त उप विभाजित की जा सकेगी। यदि कोई व्यक्ति इन शीर्षों में से एक से अधिक के अधीन जाने वाले अपराधों के लिए दोषसिद्ध हो तो उसका नाम हर एक में प्रविष्ट किया जावेगा।
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भारतीय दण्ड संहिता की धारा 75 के आशयों के लिए
भारतीय दण्ड संहिता का अध्याय बारह- धारायें 241, 254 और 262 के अधीन दण्डनीय अपराधों के सिवाय सभी अपराध।
भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय सत्रह
धाराएँ 379 से 382-सभी प्रकार की चोरियाँ।
धाराएँ 385 के सिवाय, धाराएँ 384 से 389- सभी प्रकार के उद्दापन ।
धाराएँ 395, 316, 399 और 402- सभी प्रकार की डकैती।
धाराएँ 400 और 401-चोरी या डकैती के दल से सम्बन्धित होना।
धाराएँ 406 से 408-आपराधिक न्याय भंग।
धाराएँ 409-लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग।
धाराएँ 411 से 414- चोरी की हुई सम्पत्ति प्राप्त करना।
धाराएँ 418 से 422-छल।
धाराएँ 429 से 433 और 435 से 440- गम्भीर रिष्टि ।
धाराएँ 449 से 452-अपराध करने के लिए गृह अतिचार।
धाराएँ 454 से 457- प्रछन्न गृह अतिचार या साधारण से अन्य गृह भेदन।
धारा 458-गृह भेदन के सभी प्रयास।
धाराएँ 459 और 460-गृह भेदन में कारित घोर अपहति या मृत्यु।
धारा 462-न्यास में प्राप्त बन्द पात्र का कपटपूर्वक खोलना।
ख'
ह्वीपिंग एक्ट, 1909 को चौथे की धारा 3 और 4 के आशयों के लिए
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376- बलात्कार, धारा 377 - अप्राकृतिक अपराध ।
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आपराधिक जन-जाति अधिनियम की धारा 22 और 33 को, और अधिनियम की धाराएँ 21, 22, 24 और 25 के अधीन या अधिनियम की अनुसूची में सम्मिलित किसी अपराध के लिए, आपराधिक जन-जाति अधिनियम की धारा 3 के अधीन आपराधिक जन-जाति होना घोषित हुई जन -जाति के सदस्यों की दोषसिद्धि के आशयों के लिए।
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अन्य अपराध
भारतीय दण्ड संहिता की धाराएँ 121, 121-क और 124-क राज्य के विरुद्ध अपराध।
धारा 170-लोक सेवक का प्रतिरूपण करना।
भारतीय दण्ड संहिता की धाराएँ 212, 213, 215, 216 और 216-क-संश्रय देना या लोक न्यास के विरुद्ध अन्य अपराध।
धारा 311-ठग होना।
धाराएँ 363 से 369-व्यपहरण।
धारा 461-बेईमानी से बन्द पत्र को तोड़कर खोलना।
धारा 465 से 469-कूट रचना।
धाराएँ 489-क से 489-घ-बैंक और मुद्रा नोट्स की कूट रचना।
दण्ड प्रक्रिया संहिता की धाराएँ 109 और 110-बुरी जीविका।
1867 के अधिनियम क्रमांक तीसरे की धाराएँ 3 और 4- सामान्य जुआघर को बनाये रखना और उसमें जुआ खेलना।
1910 के अधिनियम क्रमांक चार की धारा 60, 62, 63 और 65-आबकारी अधिनियम के अधीन अपराध।
1878 के अधिनियम क्रमांक 1 की धारा 9- अफीम अधिनियम के अधीन अपराध।
1959 के अधिनियम क्रमांक 54 की धारा 25 और 26-आयुध अधिनियम के अधीन अपराध।
भारतीय दण्ड संहिता की निम्नलिखित धाराओं के अधीन दोषसिद्धि व्यक्तियों के पुलिस नाम, अधीक्षक के केवल विशेष आदेश द्वारा भाग 3 में प्रविष्ट किये जावेंगे-
धाराएँ 143 से 153-बलवा, विधि विरुद्ध जमाव ।
धारा 302-हत्या।
धारा 304-आपराधिक मानव वध।
धारा 307-हत्या करने का प्रयत्न।
धाराएँ 324 से 325-अपहति और घोर अपहति ।
भाग तीन के अभियुक्तियों के स्तम्भ में अपराधों की प्रकृति, यथा- "पशु चोरी", "बहुमूल्य आभूषण रोकने की चाल" दर्शाई जावेगी। यदि कोई पूर्व दोषसिद्ध प्रसिद्ध दल का सदस्य हो तो इस तथ्य को भी अंकित किया जावेगा। सेन्धमारी के लिये सजायाफ्ता व्यक्तियों की कार्यप्रणाली वर्णित की जानी चाहिये। यदि कोई पूर्व दोषसिद्ध स्थायी रूप से अपना निवास बदल ले, तो अन्तिम स्तम्भ में नया निवास अंकित किया जायेगा और उस गाँव के रजिस्टर के, जिसमें वह गया है, भाग तीन में उसका नाम प्रविष्ट किया जावेगा। उस दोषसिद्ध व्यक्ति का नाम, जो केवल एक बार दोषसिद्ध किया गया हो और जिसकी हिस्ट्री शीट कभी भी न खोली गई हो उसकी सजा से बीस वर्ष व्यतीत हो जाने पर; हटा दिया जावेगा। अन्य दोषसिद्ध व्यक्तियों के नाम केवल उनकी मृत्यु के बाद हटाये जायेंगे।
प्रत्येक थाने में ग्राम अपराध नोट बुक के भाग तीन में वर्णक्रमानुसार निम्नलिखित शीर्षों में विभाजित एक विषय सूची बनाई जावेगी और प्रत्येक के लिये अलग रजिस्टर, या भाग आवंटित किया जावेगा-डकैती, पशु चोरी, जेबकटी, रेलवे सवारी चोरी, मालगाड़ी से चोर, बाइसिकिल चोरी, विविध चोरियाँ, विषदान, पशु विषदान, बुरी जीविका, सिक्का कूटकरण, कूट रचना, कोकीन और अफीम की तस्करी, छल, अनैतिक आशाओं के लिये व्यपहरण, राज्य के विरुद्ध अपराध, टेलीग्राफ के तारों को काटना और भाग तीन में विशिष्ट "अन्य विविध अपराध"।
सूची उप-महानिरीक्षक या पुलिस के अधीक्षक के आदेश द्वारा अतिरिक्त उप विभाजित की जा सकेगी। यदि कोई व्यक्ति इन शीर्षों में से एक से अधिक के अधीन जाने वाले अपराधों के लिए दोषसिद्ध हो तो उसका नाम हर एक में प्रविष्ट किया जावेगा।
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