UP Police Regs 245अध्याय 20 · Registration and Monitoring of Bad Characters
धारा 245 · पैरा-236. हिस्ट्रीशीटर की निगरानी का तरीका
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
किसी विधिक कार्यवाही को अभ्यास में लाने, ऐसे शहर में शरण देने, जिससे वे पायें कि वे विशेष स्थानों या विशेष परिस्थितियों में संदिग्ध व्यक्ति से सम्पर्क रख सकते हैं, के पुलिस अधीक्षक के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अधिक व्यवहारिक प्रयोजनों के लिये निम्नलिखित एक या अधिक उपायों को सम्मिलित करते हुये, निगरानी परिभाषित की जा सकेगी-
(क) संदिग्ध व्यक्तियों के मकानों और मकानों मे पहुँचने के मार्गों की गुप्त नाकाबन्दी।
(ख) ख्याति, आदत, साथ, आय, व्यय और व्यवसायों के बारे में, उपनिरीक्षक की श्रेणी से कम न होने वाले अधिकारी द्वारा नियतकालिक जाँच के माध्यम से।
(ग) कान्सटेबिल या चौकीदारों द्वारा उनकी गतिविधियों और घर से अनुपस्थिति की रिपोर्ट।
(घ) जाँच पर्चियों के साधन द्वारा गतिविधियाँ और अनुपस्थिति का सत्यापन ।
(ङ) आचरण पर प्रभाव डालने वाली सभी सूचनाओं का हिस्ट्री शीट में इकट्ठा और अभिलिखित करना।
टिप्पणी
पैरा 236 (बी), जिसमें संदिग्ध के घर पर जाकर पता करने की व्यवस्था थी, को मूलभूत अधिकार पर कुप्रभाव आने के कारण, असंवैधानिक करार दे दिया गया और खटक सिंह बनाम राज्य ने यह घोषित किया कि उक्त भाग प्रभावी न रहेगा। इसमें यह भी अभिव्यक्त हुआ कि विनियम कोई विधि नहीं है, बल्कि उ०प्र० राज्य के रिसायत पर आधारित है क्योंकि यह पुलिस एक्ट के किसी प्रावधान से उद्भूत नहीं है। इस पैरा को न्यायालय ने मध्य प्रदेश विनियम के पैरा 856 के समकक्ष जाना, जो उक्त एक्ट के धारा 46 (2) (सी) के अन्दर बनाया गया और व्यक्ति के घर जाकर देखने की अनुमति दी कि वह वहाँ है या अपराध करने कहीं गया है, इसकी मन्शा अपराध की रोकथाम करने की है जिसके लिये सरकार एक्ट से सामन्जस्य रखते हुये निगम बनाने में अधिकृत है। गोविन्द बनाम राज्य में मध्य प्रदेश के उक्त विनियम को अदालत ने विधिक ठहराया जिसमें व्यक्ति के एकांतता अधिकार व व्यक्ति के स्वतन्त्रता पर भी विचार हुआ था। अनुच्छेद 21 में व्यक्तिगत स्वतन्त्रता को व्यापक माना गया जिसमें अनेक प्रकार के अधिकारी का समावेश है और जो संविधान के अनुच्छेद 19 (बी) (डी) में आये विशिष्ट अधिकार से भिन्न परिधि में है।
धन्जी राम बनाम पुलिस अधीक्षक दिल्ली में यह भी माना गया है किसी व्यक्ति का नाम इतिवृत्ता व रजिस्टर पर लाने के लिये पुलिस अधिकारी का समुचित विश्वास पर्याप्त है कि वह अपराध करने का वादी है, और इसके लिए प्रदत्त आदेश में इस विश्वास के कारणों का दिया जाना आवश्यक नहीं है।
राज्य ने आदतन अपराध पाये जाने का निर्णय लेने के बाद व्यक्ति की हिस्ट्री शीट खोली, मगर तथ्यों को देखने से ज्ञात हुआ कि उसे जुआ खेलने के अपराध में 50 रु० जुर्माना हुआ था तथा चौथाई बोतल विदेशी शराब उसके पास से आबकारी एक्ट में बरामद हुआ था। यह भी पाया गया कि उसकी गिरफ्तारी धारा 151/110 जा० फौ० में नहीं हुई थी। किसी व्यक्ति को हिस्ट्री शीट पर लाने से समाज में उसका स्तर नीचा होता है इसलिये इस विषयक नियमावली का उसकी भावना के अनुरूप ही पालन होना चाहिये। उसके विरुद्ध पाये गये तथ्यों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह एक आदतन अपराधी था या वह ऐसे लोगों को मदद या बढ़ावा देता था। इस कारण उसकी हिस्ट्री शीट रद्द घोषित की गई। रमेश कुमार बनाम राज्य (आई० जे० रिपोर्ट्स) 3 इस सन्दर्भ में सुदेश कुमार बनाम पुलिस कमिश्नर का निर्णय भी अवलोकनीय है।
(क) संदिग्ध व्यक्तियों के मकानों और मकानों मे पहुँचने के मार्गों की गुप्त नाकाबन्दी।
(ख) ख्याति, आदत, साथ, आय, व्यय और व्यवसायों के बारे में, उपनिरीक्षक की श्रेणी से कम न होने वाले अधिकारी द्वारा नियतकालिक जाँच के माध्यम से।
(ग) कान्सटेबिल या चौकीदारों द्वारा उनकी गतिविधियों और घर से अनुपस्थिति की रिपोर्ट।
(घ) जाँच पर्चियों के साधन द्वारा गतिविधियाँ और अनुपस्थिति का सत्यापन ।
(ङ) आचरण पर प्रभाव डालने वाली सभी सूचनाओं का हिस्ट्री शीट में इकट्ठा और अभिलिखित करना।
टिप्पणी
पैरा 236 (बी), जिसमें संदिग्ध के घर पर जाकर पता करने की व्यवस्था थी, को मूलभूत अधिकार पर कुप्रभाव आने के कारण, असंवैधानिक करार दे दिया गया और खटक सिंह बनाम राज्य ने यह घोषित किया कि उक्त भाग प्रभावी न रहेगा। इसमें यह भी अभिव्यक्त हुआ कि विनियम कोई विधि नहीं है, बल्कि उ०प्र० राज्य के रिसायत पर आधारित है क्योंकि यह पुलिस एक्ट के किसी प्रावधान से उद्भूत नहीं है। इस पैरा को न्यायालय ने मध्य प्रदेश विनियम के पैरा 856 के समकक्ष जाना, जो उक्त एक्ट के धारा 46 (2) (सी) के अन्दर बनाया गया और व्यक्ति के घर जाकर देखने की अनुमति दी कि वह वहाँ है या अपराध करने कहीं गया है, इसकी मन्शा अपराध की रोकथाम करने की है जिसके लिये सरकार एक्ट से सामन्जस्य रखते हुये निगम बनाने में अधिकृत है। गोविन्द बनाम राज्य में मध्य प्रदेश के उक्त विनियम को अदालत ने विधिक ठहराया जिसमें व्यक्ति के एकांतता अधिकार व व्यक्ति के स्वतन्त्रता पर भी विचार हुआ था। अनुच्छेद 21 में व्यक्तिगत स्वतन्त्रता को व्यापक माना गया जिसमें अनेक प्रकार के अधिकारी का समावेश है और जो संविधान के अनुच्छेद 19 (बी) (डी) में आये विशिष्ट अधिकार से भिन्न परिधि में है।
धन्जी राम बनाम पुलिस अधीक्षक दिल्ली में यह भी माना गया है किसी व्यक्ति का नाम इतिवृत्ता व रजिस्टर पर लाने के लिये पुलिस अधिकारी का समुचित विश्वास पर्याप्त है कि वह अपराध करने का वादी है, और इसके लिए प्रदत्त आदेश में इस विश्वास के कारणों का दिया जाना आवश्यक नहीं है।
राज्य ने आदतन अपराध पाये जाने का निर्णय लेने के बाद व्यक्ति की हिस्ट्री शीट खोली, मगर तथ्यों को देखने से ज्ञात हुआ कि उसे जुआ खेलने के अपराध में 50 रु० जुर्माना हुआ था तथा चौथाई बोतल विदेशी शराब उसके पास से आबकारी एक्ट में बरामद हुआ था। यह भी पाया गया कि उसकी गिरफ्तारी धारा 151/110 जा० फौ० में नहीं हुई थी। किसी व्यक्ति को हिस्ट्री शीट पर लाने से समाज में उसका स्तर नीचा होता है इसलिये इस विषयक नियमावली का उसकी भावना के अनुरूप ही पालन होना चाहिये। उसके विरुद्ध पाये गये तथ्यों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह एक आदतन अपराधी था या वह ऐसे लोगों को मदद या बढ़ावा देता था। इस कारण उसकी हिस्ट्री शीट रद्द घोषित की गई। रमेश कुमार बनाम राज्य (आई० जे० रिपोर्ट्स) 3 इस सन्दर्भ में सुदेश कुमार बनाम पुलिस कमिश्नर का निर्णय भी अवलोकनीय है।
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